सदन के बाहर दिन रात मोदी सरकार को कोसने वाले राहुल गाँधी सदन में एक भी सवाल क्यों नही पूँछ पाए?

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मोदी सरकार का पांच साल पूरा होना वाला है. इसी के साथ संसद के सत्र का भी कार्यकाल पूरा हो गया है. इसके बाद अब सभी सांसदों के कार्यों को लेकर लेखा जोखा कि या जा रहा है. आज द चौपाल भी आपके लिए नेताओं के पांच साल के कार्यकाल के दौरान किये गये कार्यों का लेखा जोखा लेकर आया है. किसी के बोलने से भूकम्प आने वाला था तो किसी के बोलने से सदन ठहाकों से गूँज उठा..कोई बोला तो जूठा साबित हुए तो कोई बोला ही नही…ऐसे ही कुछ सासंद का हाल रहा है सदन में…


सबसे पहले हम बात कर रहे हैं राहुल गाँधी की… जो कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और अमेठी से सांसद भी… मोदी सरकार को घेरने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं राहुल गाँधी… राफेल को लेकर रोज प्रेस कांफ्रेस करते हैं.. घंटों मोदी सरकार को कोसते हैं… दावा करते हैं कि अगर वे बोलेंगे तो भूकम्प आ जाएगा…हालाँकि हमारी जानकारी में हैं कि ससंद में राहुल गाँधी एक भी सवाल नही पूछ पाए.. जी हाँ दिन रात मोदी सरकार को घेरने वाले राहुल गाँधी संसद के कार्यकाल के दौरान एक भी सवाल पूछने की हिम्मत नही जुटा पाए! राहुल गाँधी के साथ साथ, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी,दिग्गज भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, शत्रुघ्न सिन्हा,सपा के दिग्गज नेता मुलायम सिंह यादव जैसे नेताओं ने एक भी सवाल नही पूछा.. यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि राहुल गाँधी अक्सर सदन के बाहर सरकार से खूब सवाल पूछते हैं लेकिन सदन में सवाल पूछने क्यों डरते हैं? आखिर पांच सालों में राहुल गाँधी एक भी सवाल क्यों नही पूछा वो भी ऐसे में जब वे एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष है और पार्टी के तरफ से प्रधानमंत्री के प्रमुख दावेदार..


इतना ही नही राहुल गांधी तो सांसद निधि( जो क्षेत्र के विकास के लिए होता है) को खर्च करने में भी बड़े ही कंजूस निकले….राहुल गांधी ने एमपी लैड की जहां लगभग 60.56 फीसदी राशि खर्च की है..सिर्फ राहुल गाँधी ही नही बल्कि कांग्रेस के कुल 45 सांसदों में से सिर्फ दो सांसदों को छोड़कर सारे फिसड्डी साबित हुए हैं. सांसद निधि का सबसे अधिक खर्च करने वाले टॉप 50 सांसदों में कांग्रेस के दो सांसद क्रमशः 45वे और 49वे नम्बर हैं. अब राहुल गांधी की तरफ से इन सांसदों के साथ एक सेल्फी तो बनती है कि कम से कम किसी क्षेत्र में तो आगे निकले. वहीँ निनोंग एरिंग और डीके सुरेश ही इस सूची में स्थान बनाने में कामयाब रहे..बीजेपी सांसद अश्विनी कुमार चौबे, गिरिराज सिंह, मुरली मनोहर जोशी और अनुराग ठाकुर जैसे कुछ सांसद ऐसे भी हैं, जिन्होंने एमपी लैड का 95 फीसदी से अधिक इस्तेमाल कर दिखाया..
हालाँकि वही कुछ ऐसे भी सांसद है जिन्होंने सदन में अपना पूरा योगदान दिया है. प्रिया सुले, विजय सिंह, मोहिते पाटिल और धनंजय महादिक जैसे सांसद भी हैं जो सवाल पूछने में सबसे आगे हैं। सोलहवीं लोकसभा में कुल 1 लाख 42 हजार से ज्यादा सवाल पूछे गए और इसमें लगभग 93 फीसदी सांसदों की सक्रिय भागीदारी रही..
सवालों से ज्यादा सांसदों की रुचि बहस और अन्य संसदीय कामकाज में दिखी और इसमें 94 फीसदी से ज्यादा सांसदों ने भागीदारी दर्ज कराई। इस लोकसभा के पांच सालों में 32,314 बार विभिन्न विषयों पर बहस हुई और भाजपा के बांदा से सांसद भैरो प्रसाद मिश्र 2038 बार बहस में अपनी सक्रिय भूमिका निभाकर सबसे आगे रहे..


विपक्ष के जबरदस्त हंगामे के बीच लोकसभा में सबसे अधिक काम 2016 के बजट सत्र में और सबसे कम काम इसी वर्ष हुए शीतकालीन सत्र में हुआ। बजट सत्र में जहां 126 फीसदी काम हुआ वहीं शीतकालीन सत्र में महज 17 फीसद काम हो पाया। लोकसभा में कुल मिलाकर 1659:47 घंटे ही काम हुआ और तकरीबन 500 से ज्यादा घंटे का समय बर्बाद हुआ…
अब सोचने वाली बात है कि राहुल गाँधी के पास सवालों की लिस्ट इतनी लम्बी है कि वे दावा करते है अगर प्रधानमंत्री को उनके सामने डिबेट के लिए बैठा दिया जाए तो वे पांच मिनट भी नही रुक सकते..तो आखिरकार राहुल गाँधी ये रिकॉर्ड कायम करने में कामयाब कैसे हो गये? मैं बोलूँगा तो भूकम्प आ जाएगा का दावा करने वाले राहुल गाँधी सदन में एक बार भी खड़े होने की हिम्मत क्यों नही जुटा पाए… आखिर क्या कारण था कि राहुल गाँधी जो देशभर में घुमते हैं वे सदन में एक भी सवाल क्यों नही दाग पाए?………
आखिर क्या कारण है जो राहुल गांधी तमाम मुद्दे, समस्याएं और आरोप गिनाते हैं वही राहुल गाँधी संसद में सवाल पूछने में नाकाम क्यों हो गये?


ये आप सोचिये क्या सवाल पूछने के लिए राहुल गाँधी के पास मुद्दे ही नही थे? क्या उनके संसदीय क्षेत्र का भी कोई ऐसा मुद्दा नही था जिसपर वे सवाल पूछ सकते? या फिर उन्हें कुछ पता ही नही था कि सदन में सवाल भी पूछा जाता है. वजह चाहे जो भी रही हो लेकिन अमेठी की हालत को देखकर तो नही लगता कि अगर राहुल गाँधी चाहते तो उनके पास सवालों की कमी होती! इसीलिए अब राहुल गाँधी के अमेठी जाने पर लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा है.