राहुल गाँधी की पोल खोल कर रख दिया ऑपइंडिया के इस आर्टिकल ने! नुपूर शर्मा ने वाड्रा को भी किया एक्सपोज

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ऑप इंडिया में नुपुर शर्मा की एक रिपोर्ट छपी हैं. जिसमें राफेल, राहुल गाँधी, रोबर्ट वाड्रा, संजय भंडारी, HL पाहवा के बीच के सम्बन्ध को समझाया गया है. यह मुद्दा देश में सबसे चर्चित मुद्दों में से एक और साथ ही साथ देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है. इस वीडियो को आपको जरुर देखना चाहिए लेकिन वीडियो शुरू करने से पहले ही आपको बता दें कि पूरी रिपोर्ट को समझने के लिए आपके पास कम से कम 10 मिनट होना चाहिए!

राहुल गाँधी राफेल को लेकर लगातार सरकार पर हमला बोले जा रहे हैं. माना जाये तो औसतन राहूल गाँधी अपने हर दुसरे स्टेटमेंट में राफेल का जिक्र करते हैं. हालाँकि अब राहुल गांधी खुद सवालों के घेरें में आ गया हैं. दरअसल संसद में बोलते हुए अरुण जेटली ने कहा था कि कॉन्ग्रेस शासन के दौरान जब MMRCA के लिए नीलामी प्रक्रिया चल रही थी, उसी समय बैकरूम में यूरोफाइटर के लिए रिश्वत को लेकर सौदे की बात भी चल रही थी। आसन भाषा में कहें तो राफेल और यूरोफाइटर टाइफून नीलामी के लिए शुरुआती 6 दावेदारों में शामिल थे

जिसमें से राफेल को 2012 में तकनीकी मानकों पर चुना गया था…. अफवाह फैलाई गयी कि राहुल गाँधी ने यूरोफाइटर टाइफून के अधिकारीयों के साथ मुलाक़ात की थी… अब भंडारी के साथ उनका लिंक सामने आने के बाद सवाल अब और भी गभीर हो गये हैं…अब आपको बताते है की भंडारी असल में है कौन

.. संजय भंडारी राहुल गाँधी के जीजा रोबर्ट वाड्रा का करीबी है… संजय भंडारी हथियारों का सौदागर भी है… साल 2012 से 2015 तक संजय भंडारी राफेल सौदे में ऑफ़सेट पार्टनर बनने की पैरवी कर रहे थे लेकिन असाल्ट ने उन्हें शामिल करने से इंकार कर दिया था.. 126 विमानों की खरीद की फ़ाइल रक्षा मंत्रालय से गायब हो गयी थी बाद में वो सड़क पर पायी थी. संजय भंडारी पर फाइल गायब करने का भी आरोप है… भंडारी इन फाइलों की फोटोकॉपी करवाकर रक्षा ठेकेदारों को देते थे..
अब आते हैं मुख्य मुद्दे पर…..
ईडी द्वारा HL पाहवा से जब्त किये गये कागजात से पता चलता है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने पलवल के हसनपुर में 6.5 एकड़ जमीन खरीद रखी है..दिन 3 मार्च 2008 मूल्य मात्र ₹26,47,000..रजिस्ट्रेशन डीड 4780, इस जमीन को खरीदने के लिए 24 लाख रूपये चेक से दिए गये और फिर बाकी के पैसे अन्य चेक से दिए गये… जिसपर 17 मार्च 2008 की तारीख़ लिखी हुई है…
लेकिन फाइलों को देखने पर पता चलता है कि लेन देन के लिए स्टंप शुल्क को नगद में दिया गया जिसे पाहवा द्वारा इसे वापस नही लिया गया… जिससे यह बात साफ़ हो जाती है कि इस जमीन के खरीददार कोई और नही बल्कि राहुल गाँधी है. ओपइंडिया में छपी नुपुर शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक़ मिली फाइलों में एक खुलासा और हुआ जिसमें पता चलता है कि पाहवा यह जमीन ₹33,22,003 में बेचना चाहते थे, लेकिन वो इसे ₹26,47,000 में बेचने के लिए राजी हो गए… अब आप सोचिये क्यों?
इसी के साथ साल 2009 में जब हरियाणा में हुए चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस ने फरीबाद के तिगाँव से पहली बार रियाल्टर ललित नागर को खड़ा किया… फिर साल 2012 में टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक़ “ललित नागर के भाई महेश नागर ने रॉबर्ट वाड्रा की ओर से न केवल हरियाणा में बल्कि राजस्थान में भी जगह खरीदी है”
3 मार्च 2008 के इस डीड को देखिये आयर समझिये कि हरियाणा के पलवल जिले में 9 एकड़ ज़मीन को गुड़गांव के रहने वाले एच एल पाहवा द्वारा रॉबर्ट वाड्रा को ₹36.9 लाख में बेचा गया था. इसपर पाहवा के हस्ताक्षर भी हैं लेकिन रोबर्ट वाड्रा की जगह महेश नागर के हस्ताक्षर है… खरीददार के नाम के साथ Robert Vadra through Mahesh Nagar’ लिखा हुआ है, जो बताता है कि वाड्रा ने अपनी पॉवर ऑफ ऑटरनी महेश नागर को दी हुई थी…
राजस्थान के बीकानेर जिले की एक डीड से यह भी पता चल रहा है कि बस्ती गाँव की गंगानगर तहसील में 4.63 एकड़ की जमीन को अप्रैल 2009 में 42 साल की सरिता देवी बोथारा द्वारा रियल अर्थ एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड को बेचा गया था.. सबसे ख़ास बात तो यह है कि इस कम्पनी के डायरेक्टर खुद रोबर्ट वाड्रा है और इस जमीन की खरीददारी को भी वाड्रा की ओर से महेश नागर ने ही किया था
आपको यह भी जानना चाहिए कि प्रियंका गाँधी भी एचएल पाहवा से ही जमीन खरीद चुकी है. 28 अप्रैल 2006 को प्रियंका गाँधी वाड्रा ने एचएल पाहवा से 2 चेक में ₹15,00,000 देकर जमीन खरीदी थी और फिर 17 फरवरी 2010 को इसे वापस एचएल पाहवा को कई चेक के माध्यम से ₹84,15,006 में बेच दिया. पाहवा ने इसकी कीमत पांच किस्तों में 22 मई 2009 से 11 सितंबर 2009 के बीच चुकाई. किस्तों में भुगतान करने के पीछे की वजह पैसों की कमी थी…

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अब हैरान करने वाली बात यह है कि जो आदमी आये दिन जमीन खरीद और बेच रहा हो.. अपनी ही जमीन को बेचकर फिर उसे पांच गुना अधिक दाम में खरीद्द्ता हो उसके पास पैसों की कमी? सोचने वाली बात है ये…
यहाँ गौर करने वाली बात यह भी है कि एचएल पाहवा ने अक्सर जमीनों को नकद में खरीदा था और ऐसे मामले भी देखे गए हैं जहाँ उसने नेगेटिव कैश बैलेंस होने के बावजूद भी जमीन की खरीददारी की… अब आश्चर्य जरूर होगा कि निगेटिव बैलेंस होने के बाद उसने जमीन की खरीददारी कैसे की… तो बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय की फाइलों ने बताया है कि पाहवा को सीसी थम्पी द्वारा ₹54 करोड़ दिए गए थे। अब सीसी थम्सी कौन है?


आपको पता होगा कि कुछ दिन पहले जब रोबर्ट वाड्रा से ईडी ने पूछताछ किया था तब उनसे सीसी थम्सी को लेकर भी पूछताछ की गयी थी.. 2009 में हुए एक पेट्रोलियम करार के लिए एक शारजाह स्थित कम्पनी के माध्यम से डील फाइनल किया गया था। इस कम्पनी के संयुक्त अरब अमीरात स्थित एनआरआई व्यवसायी सीसी थम्पी द्वारा नियंत्रित होने की बात सामने आई थी। वाड्रा से सीसी थम्पी और संजय भंडारी के साथ लंदन में बेनामी संपत्ति रखने के बारे में भी पूछताछ भी की गई थी। संयुक्त अरब अमीरात में थम्सी की स्काईलाइट्स नाम की कम्पनी है और भारत में स्काईलाइट्स प्राइवेट लिमिटेड के वाड्रा के साथ सम्बन्ध की बात सामने आई है. राजस्थान के बीकानेर में एक जमीन खरीददारी को लेकर यह कम्पनी भी ईदी के निशाने पर है. सीसी थम्पी पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के उल्लंघन का मामला भी चल रहा है। यह मामला सैंकड़ों करोड़ रुपयों की हेराफेरी से जुड़ा है. यहाँ आपको समझना चाहिए कि रोबर्ट वाड्रा. सीसी थम्सी और संज भंडारी करीबी दोस्त हैं.
सीसी थम्पी और संजय भंडारी के बीच के कारोबारी सम्बन्ध भी हैं यूपीए सरकार के दौरान इन दोनों को अच्छा खासा फायदा पहुंचाया गया… ऐसे लगभग चार कम्पनियां है जो इस समय जांच के घेरे में हैं.. दुबई, लन्दन में जमीन खरीददारी, बिक्री में भी भंडारी, वाड्रा और थम्सी पर भी हेरफेर का आरोप है..


निष्कर्ष….
१) राहुल गांधी ने कथित रूप से कम कीमत पर एचएल पाहवा से जमीन खरीदी।
२) रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा भी एचएल पाहवा से जमीन खरीदी गई थी। कई मामलों में, एचएल पाहवा द्वारा इन्हीं ज़मीनों को बढ़े हुए मूल्य पर वापस खरीदा गया था। वो भी तब जबकि पाहवा का कैश बैलेंस निगेटिव में था।
३) इस खरीद पर साफ-सुथरा दिखाने के लिए एचएल पाहवा ने सीसी थम्पी से पैसे लिए थे।
४) सीसी थम्पी और संजय भंडारी करीबी दोस्त हैं। उनके बीच कई वित्तीय लेनदेन भी हुए थे।
५) संजय भंडारी एक हथियार डीलर है और रॉबर्ट वाड्रा का करीबी दोस्त भी। उसे रक्षा सौदे और पेट्रोलियम सौदे में कमिशन (किकबैक) भी मिला था।
६) कमिशन (किकबैक) की इसी राशि से संजय भंडारी ने रॉबर्ट वाड्रा से बेनामी संपत्ति खरीदी थी, यहाँ तक ​​कि उसने इन संपत्तियों के नवीनीकरण (रेनोवेशन) के लिए भी भुगतान किया था।
७) इस संपत्ति को फिर सीसी थम्पी को बेचा गया था।
८) फिलहाल ईडी थम्पी के साथ रॉबर्ट वाड्रा की निकटता की जाँच कर रहा है।
९) संजय भंडारी एक हथियार डीलर है। 2012 से 2015 के बीच राफेल सौदे में ऑफ़सेट पार्टनर बनने की पैरवी संजय भंडारी कर रहा था लेकिन राफेल बनाने वाली कंपनी दसौंल्ट ने उसे अपने साथ करने से मना कर दिया था।
१०) 126 राफेल जेट की खरीद से संबंधित फाइल रक्षा मंत्रालय से गायब हो गई थी और बाद में इसे सड़क पर पाया गया था। आरोप है कि भंडारी ने फाइल चुराई थी। आरोप यह भी है कि भंडारी महत्वपूर्ण फाइलों की फोटोकॉपी करता था और जिन डिफेंस कॉन्ट्रैक्टरों के साथ उसके संबंध अच्छे थे, उन्हें वो कॉपी उपलब्ध करवाता था।
१२) अरुण जेटली ने आरोप लगाया था कि जब कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान राफेल को अंतिम रूप दिया जा रहा था, तो यूरोफाइटर के बारे में बैकरूम बातें हुआ करती थीं।
१३) ऐसी अफवाहें भी हैं कि राहुल गाँधी जर्मनी में यूरोफाइटर के प्रतिनिधियों से मिले थे।


ऊपर बताई गयी सभी कड़ियों को ध्यान से देखने और समझने पर पता चलता है कि भंडारी ना कि वाड्रा के करीबी हैं बल्कि राहुल गांधी के भी करीबी की बात सामने आई है… राहुल गांधी राफेल को लेकर जितना हमलवार हो रहे हैं, वो उनके लिए उतनी ही मुसीबत बनता जा रहा है. संजय भंडारी जो न केवल गाँधी परिवार का करीबी है, बल्कि राफेल सौदे में जिसे दसौं ने फटकार भी लगाई थी.. आरोप तो यह भी है कि राफेल को लेकर राहुल गांधी इतने हमलावर क्यों है क्योंकि क्योंकि हथियारों के डीलर संजय भंडारी और राहुल गाँधी के सीधे संपर्क के कारण यूरोफाइटर के साथ बैकरूम चर्चा UPA सरकार के दौरान और भी अधिक तेज हो गई थी,,डिफेंस डील में परत-दर-परत खुलते राज और फिलहाल राहुल गाँधी द्वारा राफेल सौदे पर जोर-शोर से हमला करना, कॉन्ग्रेस को उस ओर ले जा रहा है जहाँ वो खुद राहुल गाँधी के हथियार डीलर संजय भंडारी संग रिश्ते की बात और सच्चाई पर खुलासा करने को मजबूर करेगी।