राहुल गाँधी जो कर रहे हैं उसे फुस्स पटाखों में आग लगाना कहते हैं

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जब आप छोटे थे तो दीवाली पर पटाखे छोड़ते वक़्त कई पटाखे ऐसे होते हैं जिनमे आग तो लगती है लेकिन वो बजते नहीं थे. उन्हें हम फुस्स पटाखें कहते थे. फिर अगली सुबह हम उन पटाखों को ढूंढते थे ताकि उन्हें धुप में सुखा कर फिर से बजा सकें. ये काम हम बचपन में करते थे. बड़े हुए तो ये आदत छूट गई लेकिन कांग्रेस के युवराज राहुल गाँधी ये काम अब भी कर रहे हैं. क्योंकि उनका बचपना तो अब तक गया ही नहीं.

अब हम बताते हैं कि माजरा क्या है? बस चंद दिन बचे हुए हैं महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग में. बेजान कांग्रेस के चुनावी अभियान में जान फूंकने उनके युवराज राहुल गाँधी मैदान में आये और प्रचार अभियान का आगाज़ किया. रविवार को उन्होंने ताबड़तोड़ कई चुनावी सभाएं की. महाराष्ट्र की फड़नवीस सरकार के साथ साथ केंद्र की मोदी सरकार भी जमकर हमले किये. राहुल जी के तेवर वही पुराने थे जिसने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की भद्द पिटवाई थी और तेवर के साथ मुद्दे भी वही पुराने थे. गब्बर सिंह टैक्स, नोटबंदी, नीरव मोदी, राफेल और चौकीदार चोर है वगैरह वगैरह. आप इसे यूँ कह सकते हैं कि जो पटाखे लोकसभा चुनाव में फुस्स हो चुके थे राहुल गाँधी उन्ही फुस्स पटाखों से विधानसभा चुनाव में धमाका करना चाहते हैं.

राहुल गांधी ने प्रचार के पहले ही दिन महाराष्ट्र के लातूर, चांदवली और धारावी में जनसभाएं कीं और नोटबंदी से लेकर राफेल में घोटाले तक का जिक्र कर दिया. जब राफेल में घोटाले का जिक्र किया तो चौकीदार चोर है का नारा भी सुनाई पड़ा. लेकिन क्या इन बातों से राहुल मरी हुई कांग्रेस में जान फूंक पायेंगे? ये बात अगर राहुल गाँधी से पूछा जाए तो वो भी सर झुका लेंगे. इन मुद्दों को तो जनता लोकसभा चुनाव में ही नकार चुकी है. तब यही जनता थी, यही मुद्दे थे, यही चेहरे थे और यही चुनावी मैदान था. 6 महीने बीत गए लोकसभा चुनाव का परिणाम आये. इन 6 महीनों में भाजपा ने आर्टिकल 370, तीन तलाक, अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में भारत का बढ़ता कद जैसे नए मुद्दे खड़ा कर लिए और कांग्रेस इन 6 महीनों में आगे बढ़ने की बजाये उस बासी कढ़ी में उबाल लाने की कोशिश कर रही है जिसे खा कर वो वेंटिलेटर पर पहुँच गई है.

ताज्जुब होता है ये सोच कर कि राहुल जी के सलाहकार हैं कौन जो उन्हें जहरीली बासी कढ़ी उबाल कर खाने को मजबूर कर रहे हैं. या फिर ये सोच कर ताज्जुब होता है कि आखिर राहुल जी के पास ऐसी क्या मज़बूरी है कि वो इन सलाहकारों की बातें मान रहे हैं. पहला राफेल देश को मिल गया, शस्त्र पूजन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छा गई, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उसमे बैठ कर उड़ान भर लिए लेकिन राहुल की सुई अब तक वहीँ अटकी है कि राफेल में घोटाला हुआ है.

वैसे सलाहकार की बात से याद की कहीं वो प्रोपगैंडा वेबसाईट द वायर की जर्नलिस्ट आरफा खानम शेरवानी जी की बातों पर तो अमल नहीं कर रहे. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि ट्विटर पर एक विडियो वायल है जिसमे आरफा इस बात पर निराशा जाहिर करती हैं कि जिस राफेल से राहुल गाँधी लोकसभा चुनाव में सत्ता पलटने की बात करते थे उस राफेल को तो भूल ही गए. रश्म अदायगी के लिए भी राहुल अब इसका जिक्र नहीं करते. उधर आरफा जी ने ये शिकवा किया और इधर राहुल जी ने राफेल का जिक्र कर दिया. वैसे जरा गौर करें तो फुस्स पटाखे खोज खोज कर बजाने के अलावा कांग्रेस के पास और चारा भी क्या है. तीन तलाक और आर्टिकल 370 जैसे धमाकेदार बमों को तो हाथ भी नहीं लगा सकती. इसलिए फुस्स पटाखों के जरिये ही धमाका की कोशिश की जा रही है. देखतें हैं इससे भाजपा हिलती है या खुद कांग्रेस?