Rafale’ पहुंचा कांग्रेस मुख्यालय के सामने

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विपक्ष के पास लोकसभा चुनाव से पहले और उसके दौरान बहुत से ऐसे मुद्दे थे जिसे उन्होंने बखूबी इस्तेमाल किया… हर दुसरे दिन सरकार के खिलाफ एक na एक मुद्दा आकर खडा हो जाता था… उन्ही में से एक मुद्दा था राफेल डील का…. राफेल के मुद्दे को राहुल गाँधी ने इतना उछाला है जो कि हमने भी देखा है … इसके वजह से लोगों को राफेल के बारे में भी पता लग गया…लेकिन Rahul Gandhi ने राफेल सौदे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर हमले किए…..उन्होंने राफेल सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उद्योगपति अनिल अंबानी की मदद करने का भी आरोप लगाया था….और यह भी आरोप लगाया था कि मोदी सरकार राफेल के खरीद राशि का दोगुना दाम बता रही है सरकार को….

हलाकि अब राफेल का इंतज़ार ख़त्म होने कि कगार पर है… हो देश को राफेल जेट की पहली खेप इसी साल मिलने की उम्मीद है…….लेकिन पहले ही वायुसेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ के सरकारी आवास के बाहर इस लड़ाकू विमान की एक रेप्लिका लगाई गई है मतलब कि प्रतिकृति या आम भाषा में कह ले तो इसका मॉडल…. दिलचस्प बात तो यह है कि बीएस धनोआ का घर कांग्रेस मुख्यालय के ठीक बगल में है…. मतलब कि जिस राफेल के राहुल गाँधी इतने दिनों से परेशान थे … संसद से लेकर रैलियों तक लोगों को इससे अवगत करा रहे थे…वो राफेल अब खुच दिनों में आने वाली है .. लेकिन अगर राहुल गाँधी को उसको देखना हो तो वो उसे अपने ऑफिस के बहार जा कर देख सकते हैं..

वैसे आपको बता दें कि जब राहुल गाँधी ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया था….लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांस से हुए 36 राफेल लड़ाकू विमान समझौते पर सरकार को क्लीन चिट दी है……. अगर सब कुछ सही रहा तो जल्द ही हमारी वायु सेना में ये लड़ाकू विमान शामिल हो जाएंगे….. और उसकी गुणवत्ता से पडोशी देशों से होने वाले युद्ध में बहुत लाभदायक होगा……..ऐसे में सबसे पहले हमे यह जानना जरूरी है कि ये पूरा समझौता क्या है और इससे हमारी कितनी ताकत बढ़ेगी?
साल 2012 में राफेल को एल-1 बिडर घोषित किया गया और इसके मैन्युफैक्चरर दसाल्ट ए‍विएशन के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर बातचीत शुरू हुई,…. लेकिन आरएफपी अनुपालन और लागत संबंधी कई मसलों की वजह से साल 2014 तक यह बातचीत अधूरी ही रही…
यूपीए सरकार के दौरान इस पर समझौता नहीं हो पाया, क्योंकि खासकर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के मामले में दोनों पक्षों में गतिरोध बन गया था. दसाल्ट एविएशन भारत में बनने वाले 108 विमानों की गुणवत्ता की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं थी. दसाल्ट का कहना था कि भारत में विमानों के उत्पादन के लिए 3 करोड़ मानव घंटों की जरूरत होगी, लेकिन एचएएल ने इसके तीन गुना ज्यादा मानव घंटों की जरूरत बताई, जिसके कारण लागत कई गुना बढ़ जानी थी.

साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी सरकार बनी तो उसने इस दिशा में फिर से प्रयास शुरू किया. पीएम की फ्रांस यात्रा के दौरान साल 2015 में भारत और फ्रांस के बीच इस विमान की खरीद को लेकर समझौता किया. इस समझौते में भारत ने जल्द से जल्द 36 राफेल विमान फ्लाइ-अवे यानी उड़ान के लिए तैयार विमान हासिल करने की बात कही. समझौते के अनुसार दोनों देश विमानों की आपूर्ति की शर्तों के लिए एक अंतर-सरकारी समझौता करने को सहमत हुए.

सुरक्षा मामलों की कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद दोनों देशों के बीच 2016 में आईजीए हुआ. समझौते पर दस्तखत होने के करीब 18 महीने के भीतर विमानों की आपूर्ति शुरू करने की बात है यानी 18 महीने के बाद भारत में फ्रांस की तरफ से पहला राफेल लड़ाकू विमान दिया जाएगा…. समझौते के बाद राफेल के लिए 15 % राशि का और भुगतान करना जिसके वजह से इसमें काफी देरी हुई…

राहुल गांधी राफेल जेट के सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते रहे हैं और उसकी जांच की मांग करते रहे हैं… इस सिलसिले में पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है… हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे में एफआइआर दर्ज करने या सीबीआइ जांच कराने का सवाल ही नहीं है, क्योंकि शीर्ष अदालत पहले ही इसे क्लीन चिट दे चुकी है… और अब कांग्रेस पार्टी के बहार इसकी रेप्लिका उनके काफी आशंकाओं को दूर करेगी…