घर चल दिए शहीद…

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सीआरपीएफ का काफिला जा रहा है.. 2500 से भी ज्यादा सुरक्षाबल एक साथ हैं.. सब बहुत खुश हैं कि घर से आये हैं… अगली छुट्टी तक के लिए ढेर सारी यादें समेटकर.. और आँखें नम भी हैं कि अब पता नहीं कितने दिन बाद मिलना होगा.. सब अपनी अपनी इतने दिनों की यादों को बांटते हुए चले जा रहे हैं… कोई गा रहा है.. कोई तस्वीरों में खोया है.. एक दुसरे के आंसुओं के पोंछते और फिर उन्हें गुदगुदाते ये सारे जवान निकल रहे हैं अगली तैनाती के लिए… और तभी एकाएक एक धमाका होता है.. और पल भर में यह जवान मांस के चीथड़ों में बदल जाते हैं..

आखिरी साँसों में अब तमाम सवाल हैं.. अब माँ की बूढ़े आँखें जब आंसुओं से धुंधला जाएँगी तो कौन उनके आंसू पोंछेगा?? बाप के बूढ़े हाथ जब कंपकंपायेगे तो अब कौन उन्हें थामेगा.. अब बेटा जब खेल में जीतकर आएगा तो कौन उसे कांधे पर चढ़ाएगा.. बेटी विदा होगी तो कौन उसके माथे को चूमेगा.. छुप छुप कर एक कोने में रोती मेरी बीवी को अब हिम्मत कौन दे पाएगा.. काश कुछ दिन और मातृभूमि की सेवा कर पता.. काश कुछ और दुश्मनों को नेस्तनाबूद कर पाता..

इनके अगले कुछ पल में देश के वो 40 जवान देश के शहीद बन गए.. आखिरी बार जय हिन्द बोलकर..

देश को आंसुओं में भिगोकर चले गए और देशवासियों के सीने में आक्रोश की ज्वाला जलाकर..

देश के तिरंगे में लिपटे यह सैनिक अपने अपने घरों की तरफ चल दिए हैं.. आखिरी बार.. आखिरी बार उन्ही गलियों से गुजरेंगे जहाँ खेलते वक़्त देशभक्ति की ज्वाला उनके सीने में धधकती थी.. माँ भारती के जयकारे लगते थे.. इन्ही गलियों में पहली बार वर्दी का सम्मान पहन कर आये थे.. और आज तिरंगे में लिपट आये हैं. आज जो यह सारा गाँव समाज रिश्तेदार एक साथ उसे आखिरी विदा देने आये हैं.. कल ही तो इन्हें आखों में आंसू और दिल में सम्मान लेकर सलाम देकर गए थे फिर आने की उम्मीद में.

तुम्हारी शहादत को सलाम देने आज ये सारा देश एक साथ है…

आज सबकी आँखें नम हैं.. पर सब तुम्हारे आखिरी क्षणों में तुम्हारे साथ हो जाना चाहते हैं..

लाखों की भीड़ आज तुम्हारे नाम के नारे लगा रही है और कह रही है…

“वीर तुम्हारे बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे.. वीर हम तुम्हारे गुनाहगारों को मौत के घाट उतार देंगे”

आज धरती माँ तुम्हे अपनी गोद में फिर से सुला लेगी.. और इस चिता की आग में सिर्फ जलेगा तुम्हारा पार्थिव शरीर पर जूनून देशभक्ति और त्याग नहीं.. देश की मिटटी का क़र्ज़ उतारते तुम्हारा शरीर आज मिटटी में मिल जायेगा पर नाम नहीं..

आज देश के अमर शहीद हो तुम.. कोई गुमनाम नहीं