ज़ोमैटो विवाद पर क्या सोचते हैं लोग, देखिये

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ज़ोमैटो का विवाद ठंडा होने का नाम नहीं ले रहा . दुसरे दिन भी ट्विटर पर हैशटैग ज़ोमैटो अनइन्सटाल्ड ट्रेंड कर रहा था और लोग ज़ोमैटो के रवैये के प्रति विरोध जताते हुए उसे अपने मोबाईल फोन से अनइनस्टॉल कर रहे हैं . ज़ोमैटो का विरोध करने वाले लोगों की नाराजगी का कारण दो अलग अलग धर्म के लोगों के साथ कंपनी का दोहरा रवैया है . ये सारा विवाद तब शुरू हुआ जब अमित शुक्ल नाम के यूजर ने सावन के महीने में मुस्लिम डिलीवरी बॉय से खाना लेने से इनकार कर दिया .

ज़ोमैटो ने जब रिप्लाई किया कि खाने का कोई धर्म नहीं होता तो बहुत से लोगों को उसका जवाब पसंद आया जबकि कई लोग ज़ोमैटो के पुराने स्क्रीनशॉट खोज लाये और उसपर दो धर्मों के यूजर के प्रति अलग अलग रवैया रखने का आरोप लगाया . साथ ही कई लोग ज़ोमैटो का आर्डर लौटाने वाले अमित शुक्ल के समर्थन में इस तर्क के साथ आ कर खड़े हो गए कि दुसरे समुदाय वाले मंदिर के प्रसाद में ज़हर मिलाने की साजिश करते हैं तो इनपर कैसे भरोसा किया जाए .

दरअसल बीते दिनों एक खबर आई कि महाराष्ट्र ATS ने 10 ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है जो महाराष्ट्र के प्रसिद्ध 400 साल पुराने मुंब्रेश्वर मंदिर के प्रसाद में जहर मिलाने की साजिश कर रहे थे . ये सभी विवादस्पद इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक से प्रभावित थे . ATS ने खुलासा किया कि जिस दिन मंदिर के प्रसाद में जहर मिलान एकी योजना थी उस दिन करीब 40 हज़ार लोगों ने मंदिर का प्रसाद ग्रहण किया था . इसी खबर के आधार पर एक यूजर कमेन्ट कर ज़ोमैटो विवाद पर अमित शुक्ल का पक्ष लेते हुए कहा कि कि जब ये लोग मंदिर के प्रसाद में ज़हर मिलाने की साजिश कर सकते हैं तो ज़ोमैटो किस खेत की मूली है .

हालाँकि इस पुरे विवाद में कुछ लोग ऐसे भी थे जिनका कहना था कि पूरा विवाद बेवजह खड़ा किया गया है . कई लोगों का कहना था कि अगर सावन में गैर हिन्दू से खाना लेना अगर मंजूर नहीं तो बेहतर है आदमी अपने घर का खाना खाए . कई लोगों ने सवाल उठाये कि डिलीवरी बॉय का धर्म पता चला तो आर्डर कैंसल कर दिया, क्या उस शेफ का धर्म पता किया जिसने खाना तैयार किया था .