चीन को जबरदस्त झटका, लद्दाख में घुसपैठ की कोशिश कर रहे चीन के हाथों से फिसल रहा हांगकांग

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लद्दाख में भारत के लिए मुश्किलें खड़ी करने की कोशिश में जुटे चीन को तगड़ा झटका लगा है. एक तरफ तो वो लद्दाख में घुसपैठ की कोशिशें कर रहा है वहीँ दूसरी तरफ खुद उसके हाथ से हांगकांग फिसलता जा रहा है. पिछले साल जोरदार हिं’सक प्रदर्शन देख चुके हांगकांग में एक बार फिर प्रदर्शनों का दूसरा दौर शुरू हो गया है और चीन की नींद उड़ गई है. हांगकांग चीन में एक राष्ट्र दो सिस्टम वाला शहर है. हांगकांग का अपना सिस्टम है. 1997 में ‘एक देश, दो व्यवस्था’ के तहत ब्रिटेन ने चीन को हांगकांग सौंपा था तो हांगकांग को खुद के भी कुछ अधिकार मिले हैं. इसमें अलग न्यायपालिका और नागरिकों के लिए आजादी के अधिकार शामिल हैं. यह व्यवस्था 2047 तक के लिए है. लेकिन चीन ने हांगकांग को मिले विशेष अधिकारों को ख़त्म करने की कई बार कोशिश की. चीन ने कई बार हांगकांग पर अपने बनाए नियम और क़ानून थोपने की कोशिश की है और हर बार चीन की साजिशों के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए हैं. इस बार फिर एक नए क़ानून के खिलाफ प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया है.

शुक्रवार को चीनी सरकार ने हॉन्ग-कॉन्ग के लिए नैशनल सिक्यॉरिटी कानून को संसद में पेश किया. इस प्रस्तावित क़ानून का उद्देश्य अलगाववादियों और विध्वंसक गतिविधियों को रोकने के साथ ही विदेशी हस्तक्षेप और आतंकवाद पर रोक लगाना बताया गया है , लेकिन हांगकांग के लोग चीन की मक्कारी को भलीभांति जानते हैं. इसलिए इस क़ानून के खिलाफ हांगकांग में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. चीन समर्थित पुलिस लोकतंत्र की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों का सख्ती के साथ दमन कर रही है.

हांगकांग दुनिया का सबसे प्रमुख और प्रसिद्द वित्तीय केंद्र है. यहाँ दुनिया भर की बड़ी बड़ी कंपनियों के कार्यालय हैं . हांगकांग की चमक दमक देख चीन कई सालों पर हांगकांग पर पूर्ण नियंत्रण करने की कोशिश कर रहा है. और इसी लिए वो एक के बाद विवादस्पद क़ानून ला रहा है जिसका हांगकांग के लोग जबरदस्त विरोध कर रहे हैं. इस तरह के क़ानून के जरिये चीन उन शर्तों को भी तोड़ रहा है जिन शर्तों के साथ उसे हांगकांग सौंपा गया था.