प्रियंका के राजनीति में आने से राहुल गाँधी को खतरा, सिंधिया बनेंगे बलि का बकरा!

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देश में अलग थलग पड़ चुकी कांग्रेस अब प्रियंका गाँधी के सहारे लोकसभा चुनाव लड़ने जा रही हैं. इसी सिलिसले में अपना कारंवा बढाने के लिए कांग्रेस ने सोमवार यानि ( 11फरवरी) को अपने तीन नेताओं के साथ उत्तर प्रदेश की राजधानी में रोड शो करने पहुंची. जिसमें खुद अध्यक्ष राहुल गांधी. पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी और मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल थे. इस रोड शो की शुरुवात से जो भी कम जयादा नजारा दिखा उसमें सिर्फ प्रियंका गांधी ही थी. राहुल गांधी ना के बराबर थे… पोस्टरों, लोगों ने नारों.. और लोगों के हाथों के बैनरों में…सिर्फ प्रियंका गांधी थी.. हर जगह लोग प्रियंका के ही गुणगान करते दिखे और राहुल को उनकी बहन से कम स्पेस मिला ….राहुल गाँधी के समर्थकों को ढूढने के लिए आपको बहुत साबधानी से नजर दौरानी पड़ती. यहाँ गौर करने करने वाली बात तो यह है कि पूरे रोड शो के दौरान सिर्फ प्रियंका गांधी ही छाई रहीं चाहे वो मीडिया हो या फिर रोड शो के दौरान भीड़, सब की नजर प्रियंका पर ही थी. राहुल गांधी नाम मात्र के लिए साथ में थे. इस बात पर चर्चा इसलिए की जा रही है क्योंकि राहुल गांधी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और उन्हें प्रियंका गाँधी से ज्यादा तवज्जो मिलनी चाहिए थी लेकिन ऐसा हुआ नही!
राहुल गाँधी के नेतृत्व में पार्टी की असफलताओं से कार्यकर्ताओं में निराशा थी. कार्यकर्ता ठन्डे पड़ गये थे…वहीं प्रियंका गांधी के आने से कुछ हद तक कार्यकर्ताओं में जोश भर गया है. ऐसे में प्रियंका गाँधी को उस मौके पर सामने लाया गया है जब कांग्रेस के साथ कोई खड़ा भी नही होना चाहता हैं. प्रियंका आई… रोड शो किया.. भीड़ इकट्ठी हुई लेकिन उतनी नही ..जितने की उम्मीद की जा रही थी.. हालाँकि राहुल गांधी की अपेक्षा प्रियंका के आने से लोगों में उत्साह जरुर है.. कार्यकर्ताओं ने उनके जयकारे लगाने से लेकर उन्हें ‘बदलाव की आँधी’ तक करार दिया लेकिन राहुल गाँधी को लेकर ऐसे कोई ख़ास नारे नहीं लगे …..तो क्या अब प्रियंका गांधी ने राहुल गाँधी की पार्टी में नंबर दो का नेता बना दिया है. कांग्रेस की तरफ राहुल गाँधी ही प्रधानमंत्री के उम्मीदवार है लेकिन जो भी जनाधार हैं वो प्रियंका गाँधी की मिलता दिखाई दे रहा है. ऐसे में क्या राहुल गाँधी त्याग कर पायेंगे? प्रधानमंत्री बनना तो हर नेता का सपना होता है.. और इसका त्याग करना पाना बड़ा मुश्किल या फिर नामुमकिन!
लखनऊ रोड शो के दौरान यहाँ एक नेता और मौजूद थे जिनका नाम है ज्योतिरादित्य सिंधिया.. सिंधिया तो वैसे पिछले काफी समय से मध्य प्रदेश में अपनी पैठ बनाने की जुगत में लगे हुए थे..कुछ हद तो ये कामयाब भी हुई.. लेकिन उनका कद बढ़ता देख मध्य प्रदेश के बड़े नेताओं की चिंता बढ़ गयी.. मुख्यमंत्री बनाने को लेकर कांग्रेस में अंदर ही अंदर विवाद की भी खबर थी…लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ को बनाया गया.. सिंधिया ने उपमुख्यमंत्री बनने से भी इंकार कर दिया था हालाँकि बाद में उन्होंने इसे स्वीकार लिया. मतलब मध्य प्रदेश में सिंधिया का कद लगातार बढ़ता जा रहा था.जिससे कमलनाथ और दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं को डर सताने लगा…अब सिंधिया को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी गयी है. इस जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभाना सिंधिया के लिए बड़ी चुनौती है क्योंकि सिंधिया को ना यहाँ के कार्यकर्ताओं से पकड है और ना ही वे इससे पहले यहाँ की कोई जिम्मेदारी निभाएं हैं ऐसे में अगर सिंधिया असफल हो जाते हैं तो बलि का बकरा ही बनेगे! उनका कद गिर जाएगा और मध्य प्रदेश में उनके बढ़ते कद को आराम से रोकने में मदद मिलेगी.
अब एक तरफ जहां प्रियंका गाँधी एक सक्रीय राजनीति में आने से राहुल गाँधी के लिए खतरा पैदा हो सकता है. मध्य प्रदेश के युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के भी पर कतरने की तैयारी हो रही है. हालाँकि कांग्रेस पार्टी के आगे की राजनीति देखने में बड़ी ही दिलचस्प होने वाली हैं.