हम आतंकवाद की कमर तोड़ देंगे- PM मोदी

गर फिरदौस बर रू ए ज़मी अस्त


हमीं अस्त ओ.. हमीं अस्त ओ.. हमीं अस्त ओ


यानि धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है.. यहीं है.. यहीं है.. यहीं है..

अमीर खुसरो ने यह शेर कश्मीर की ख़ूबसूरती पर लिखा था…

पर इस खूबसूरती पर सालों से दाग लगा है आतंकवाद का… अलगाववाद का.. भारत विरोधी भावना का..

कश्मीर अक्सर गोलिबारी की आवाजों से दहलता रहता है..

यहाँ की वादियों में बारूद की गंध हमेशा घुली रहती है..

आतंकवाद का कश्मीर के ऊपर इतना गहरा असर है कि यहाँ आने से पहले 100 बार सोचना पड़ता है, यहाँ  रहने वाली अलगाववादी जो खुद को पाकिस्तानी मानते हैं, और कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा मानते हैं उनकी भारत विरोधी भावना ने इन वादियों में आतंक फैला रखा है.. और इस बार इन अलगाववादियों ने पूरे हिमालयी क्षेत्र में बंद का आह्वान कर दिया.. लोगों को डरा कर रख दिया.. भारतीय शासन के खिलाफ विद्रोह की आवाज़ बुलंद करने लगे.. यहाँ वहां छिटपुट आतंकी घटनाएँ करने लगे कि यहाँ डर का साया और भी गहरा जाए.. खैर भारतीय शासन के खिलाफ इनकी आवाज पहली बार नहीं उठी है.. यहाँ ये चलता रहता है लेकिन इस बार इनके मंसूबों पर पानी फिर गया.. वो हुआ जिसकी इन्होने उम्मीद नहीं की.. इनके अलगाववादियों के बंद के आह्वान को चुनौती दी प्रधानमंत्री मोदी ने.. जिस वक़्त अलगाववादी कश्मीर बंद करना छह रहे थे.. उसी वक़्त प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीर में एक दिवसीय दौरा किया विकास कार्य की समीक्षा के लिए.

भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर लड़ाई लम्बे वक़्त से चल रही है, दोनों ही कश्मीर को अपना हिस्सा मानते हैं,  भारत अधिकृत कश्मीर को लेकर 1989 से कश्मीर में विद्रोह की ज्वाला जली हुई है जो चाहती है कि या तो कश्मीर को पाकिस्तान के हवाले कर दिया जाये या फिर उसे भारत से अलग कर अलग देश का दर्जा दिया जाये…

“हम आतंकवाद से जबरदस्ती लड़ेंगे। हम इसकी कमर तोड़ देंगे। यह कहना था pm मोदी का कश्मीर दौरे के दौरान

इस दौरान भी इन अलगाववादियों ने अशांति फैलाने का पूरा प्रयास किया.. अपना डर फैलाने की भरपूर कोशिश की.. लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार कमिटमेंट कर दिया तो फिर वो अपने आप की भी नहीं सुनते.. जिस वक़्त पूरे कश्मीर में डर की लहर दौड़ रही थी और अंदेशा था कि कश्मीर में अलगाववादी कुछ भी कर सकते हैं.. प्रधानमंत्री की जान को भी खतरा हो सकता है.. उस वक़्त pm मोदी ने अपने प्रोग्राम में बिना कोई बदलाव किये अपने कश्मीर दौरे को जारी रखा… और उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा सुरक्षा कर्मियों ने.. रातों रात दर्जनों अलगाववादियों को गिरफ्तार किया गया.. वो कोई हरकत ना करें उन्हें इसके लिए घर में ही नजरबन्द कर दिया गया.. इन्टरनेट बंद किया गया.. ट्रेन्स को रोक दिया गया जिससे कोई दंगा ना भड़के

हज़ारों की संख्या में पुलिस फ़ोर्स और कमांडोस ने PM की सुरक्षा का मोर्चा संभाला… और प्रधानमंत्री मोदी ने एक दिवसीय कश्मीर यात्रा पूरी की.. इस दौरान जो मुख्य बातें रही उनपर बात करते हैं..

प्रधानमंत्री ने अवन्तिपुर,श्री नगर और विजयपुर, जम्मू में दो नए एम्स(AIIMS) की शिला रखी जिससे राज्य में स्वास्थ्य सेवा, स्वास्थय संबंधी शिक्षा, और स्वास्थ्य प्रशिक्षण का स्तर बहुत बेहतर होगा.

लद्दाख में एक नई यूनिवर्सिटी का उदघाटन किया गया

कश्मीर की खूबसूरत डल झील जहाँ आतंकी साया गहराया रहता है वहां बिना किसी ख़ास सुरक्षा के गए और उसकी खूबसूरती का भरपूर आनंद भी लिया.

तमाम जोखिमों को देखते हुए भी प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी कश्मीर यात्रा को जारी रखा और वहां के लोगों से पर्सनली मिलकर यह वादा भी किया कि वो यहाँ आते रहेंगे और अपने द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं का ब्योरा भी समय समय पर यहाँ आकर लेते रहेंगे.

इस दौरान जो सबसे ख़ास बात देखने को मिली वो ये थी कि कश्मीर में जब भी थोडा बहुत तनाव होता है तो किसी भी मंत्री या सरकारी कर्मचारी का वहां जाने का कार्यक्रम रद्द हो जाता है.. या फिर इस तरह के कार्यक्रम में अलगाववादी कोई ना कोई अड़चन जरूर डालते हैं.. ऐसे में प्रधानमंत्री का वहां जाना और किसी भी प्रकार की हिंसा को ना होने देना यह सन्देश देती है कि कोई भी विद्रोही ताकत जो देश और लोकतंत्र के खिलाफ है देश की सुरक्षा व्यवस्था से ऊपर नहीं है.

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