जब एंकर ने प्रशांत किशोर से राहुल गाँधी और पीएम मोदी में पूछा अंतर तो उन्होंने दिया ये जवाब !

पश्चिम बंगाल में हो रहे विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प होते जा रहे हैं. बंगाल में भाजपा और TMC में ही सीधे तौर पर ही टक्कर मानी जा रही है क्योकि ये दोनों ही दल चुनाव जीतने के लिए जमकर मेहनत कर रहे हैं. एक तरफ भाजपा ने अपने सभी दिग्गज नेताओं को बंगाल में प्रचार प्रसार के लिए लगा दिया है तो वहीँ ममता बनर्जी भी एक के बाद एक बड़ा दाव चल रही हैं.

जानकारी के लिए बता दें पश्चिम बंगाल में मशहूर रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने TMC के लिए रणनीति तैयार की हैं और इस बात का दावा किया था कि राज्य में ममता बनर्जी अच्छे बहुमत से सरकार बनाएंगी. उनके इस दावे के बाद भाजपा ने राज्य में जमकर मेहनत की है और गाँव गाँव में मजबूत पकड़ बनाई है. एक टीवी चैनल को दिए गये इंटरव्यू के दौरान प्रशांत किशोर से राहुल गाँधी और पीएम मोदी में अंतर पूछा गया तो उन्होंने अपने जवाब में दोनों के बीच अंतर बताया.

आज तक के शो में दिए गये इंटरव्यू में जब अंजना ओम कश्यप ने प्रशांत किशोर से पीएम मोदी और राहुल गाँधी में फर्क जानने के लिए सवाल किये तो उन्होंने कहा “दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है. इसका बैठकर विश्लेषण करने की जरूरत है. दोनों की कार्यशै’ली अलग है। मोदीजी के जो काम करने का तरीका है, वो उनको सूट करता है उनके लिए वो सफल रहा है.”

गौरतलब है कि अंजना ने आगे प्रशांत किशोर से पूछा कि आप दोनों नेताओं को कैसे इंटरएक्ट करते थे तो इसके जवाब में उन्होंने कहा “कैसे इंटरऐक्ट करते थे, ये बताना मुश्किल है. लेकिन वे कुछ ठीक कर रहे होंगे, तभी जीतकर आए होंगे. हर मुख्यमंत्री तो प्रधानमंत्री बन नहीं जाता. अगर वे सात साल से इस पद पर बने हुए हैं, तो कुछ तो ठीक कर रहे होंगे.” इसके आगे पी के ने राहुल गाँधी पर कहा “मैंने उनके साथ लंबे समय तक काम किया नहीं है. राहुल गांधी पर मैं बोलूं मुझे लगता है कि ये मेरे से बहुत बड़ी बात है। मैं कौन होता हूं राहुल गांधी पर बोलने वाला. राहुल गांधी सक्षम हैं अपने विषय में बताने के लिए. उनकी बड़ी पार्टी है. 100 साल पुरानी पार्टी है. इतने बड़े-बड़े नेता हैं.” वहीँ जब एंकर ने पीके से पूछा कि आप दोनों नेताओं में क्या प्रोफेशनल अंतर समझते हैं? इस सवाल पर प्रशांत किशोर ने कहा “मोदीजी की जो ताकत है कि वे एक गजब लिस्नर हैं. यानी दूसरों को सुनने में मजबूत हैं. शायद ये मेरे देखने का नजरिया है. लोकतंत्र में एक सबसे बड़ी चीज है कि आप कितना दूसरी आवाजों को सुन सकते हैं. वे काफी अच्छे से आवाजें सुनते हैं.”

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