आतंकी की फांसी रुकवाने के लिए चिट्ठी लिखने वाले बता रहे चिदंबरम की गिरफ्तारी को असंवैधानिक

बुधवार की रात आखिरकार पूर्व मंत्री पी चिदम्बरम को सीबीआई ने हिरासत में ले लिया लेकिन उससे पहले दो घंटे तक हाई प्रोफाइल ड्रामा चला . कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताया . जबकि कई पत्रकारों और लिबरल गैंग ने इसे भाजपा की साजिश और विपक्ष को ख़त्म करने की साजिश करार दिया . PIL दाखिल करने के लिए कुख्यात वकील प्रशांत भूषण ने भी चिदंबरम की गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताया .उन्होंने ट्वीट किया – चिदंबरम को पूछताछ’ के लिए गिरफ्तार करना पूरी तरह से गलत और संविधान के खिलाफ है। उन्होंने जांच में सहयोग किया और जब भी बुलाया गया, सीबीआई और ईडी के समक्ष पेश हुए। क्या वे (जांच एजेंसिया) हिरासत में यातना दे कर कबूल करवाना चाहते हैं? एजेंसियों का सरकारी दुरूपयोग असीमित है.”

अब जरा 4 साल पहले पर नज़र दौडाते हैं . साल 2015 में प्रशांत भूषण ने एक ट्वीट किया था कि 233 करोड़ के घोटाले के मामले में NDA सरकार चिदंबरम पर कारवाई क्यों नहीं करती? क्या भाजपा और कांग्रेस मिले हुए हैंय़ 2016 में भी प्रशांत ने न्यू इन्डियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को शेयर करते हुए ट्वीट किया था कि चिदंबरम के बेटे के बेनामी सम्पति के खिलाफ ED कारवाई क्यों नहीं करती? अब जबकि ED और सीबीआई ने चिदंबरम को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है तो प्रशांत भूषण के सुर बदल गए और उन्हें ये सब लोकतंत्र की हत्या और असंवैधानिक लग रहा है.

दरअसल प्रशांत भूषण दुनिया के सबसे असंतुष्ट और कुंठित इंसान प्रतीत होते हैं . अगर अपराधी को गिरफ्तार न करो तो दिक्कत . अपराधी को गिरफ्तार करो तो दिक्कत. उन्हें कभी किसी काम से संतुष्टि नहीं होती . वैसे अगर आपको याद न आ रहा हो तो बता दें कि प्रशांत भूषण उस गैंग में भी शामिल थे जिन्होंने मुंबई बम धमाकों के गुनाहगार याकूब मेनन की फांसी रुकवाने के लिए राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी थी और आधी रात को कोर्ट खुलवाया गया था. तो प्रशांत भूषण जी के लिए एक आतंकी की फांसी रुकवाने के लिए आधी रात को कोर्ट खुलवाना संवैधानिक था और जमानत खारिज होने के बाद 27 घंटों तक क़ानून के शिकंजे से भागने वाले को हिरासत में लेना असंवैधानिक है.

प्रशांत भूषण के बारे में आपको और याद दिला दें कि ये वही शख्स हैं जिन्होंने बिना किसी सबूत और गवाह के चुनावों के दौरान राफेल में घोटाले का मुद्दा उठाया था और इसकी जांच के लिए भी PIL दाखिल किया था. लेकिन चुनाव बीतते ही राफेल का मुद्दा भी गायब हो गया. प्रशांत भूषण के लिए लोकतंत्र की हत्या सहूलियत के हिसाब से होती है. प्रशांत भूषण के लिए कोई घटना असंवैधानिक सहूलियत के हिसाब से होती है. ऐसे लोगों का एक गैंग होता है जो ख़ास मौकों पर एक्टिव हो जाता है .

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