राहुल गाँधी ने लगाये मोदी सरकार पर आरोप तो जावड़ेकर ने दी राहुल को नसीहत, कहा ‘इनसे लें ट्यूशन’

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देश के अंदर कोरोना वायरस को लेकर आज इकॉनमी रेंग रही हैं और सारी चीज़े ठप पड़ी हैं. इसी बीच मोदी सरकार ने बैंक में जो विल्फुल डिफाल्टर थे उनको लेकर एक्शन ले लिया हैं. जिस के बाद कांग्रेस को मिर्ची लग गई हैं. एक बात समझ नहीं आती हैं कि मोदी सरकार काम करे तो भी दिक्कत न करें तो भी कांग्रेस को दिक्कत होती हैं. आखिर कांग्रेस चाहती क्या हैं?

मोदी सरकार ने बैंकों के 50 बड़े विलफुल डिफाल्टर्स का 68,607 करोड़ रुपए का कर्ज बट्टे खाते में डाल दिया है. इसको लेकर मोदी सरकार पर कांग्रेस ह’मलावर होती दिख रही है. उसके जवाब में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज कांग्रेस के आ’रोपों का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि ‘कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम से ट्यूशन लेना चाहिए.’

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आगे कहा, ‘मैं राहुल गांधी की इस आ’रोप को सिरे से खारिज करता हूं कि मोदी सरकार ने 65,000 करोड़ रुपये माफ कर दिए हैं. एक भी पैसा माफ नहीं किया गया है. कर्ज को बट्टे खाते में डालने का मतलब माफ करना नहीं होता है. राहुल को चिदंबरम से क’र्ज माफी और क’र्ज को बट्टे खाते में डालने में अंतर समझने के लिए ट्यूशन लेना चाहिए.’

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर यही नहीं रुके उन्होंने ने लगे हाथो कांग्रेस को लताड़ते हुए कहा, ‘कर्ज को बट्टे खाते में डालना जमाकर्ताओं को बैंक की सही तस्वीरें दिखाने की प्रक्रिया है. बट्टे खाते में डालने का मतलब ये नहीं है की सबका क’र्ज माफ़ कर दिया गया हैं. बट्टे खाते में पैसा डालने का मतलब ये भी नहीं की बैंक उसपर कोई का’र्यवाई नहीं कर सकता हैं.

बट्टे खाते को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि ‘कांग्रेस के नेताओं ने जानबूझ कर बैंकों का कर्ज नहीं लौटाने वाले, फंसे कर्जों और राइट-ऑफ (बट्टे खाते) पर गुमराह करने की कोशिश की. 2009-10 और 2013-14 के बीच अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने 145226 करोड़ रुपये की राशि को राइट-ऑफ (बट्टे खाते में) किया था.’

आज जब मोदी सरकार ने वही काम किया तो कांग्रेस के पेट में द’र्द होने लगा. खुद कांग्रेस ने ये काम किया था. तब कोई दिक्कत नहीं थी. मतलब ये है कि कांग्रेस करे तो सब थी और अगर वही काम मोदी सरकार कर दे तो गलत.