वायरल वीडियो में रामलीला की तुलना पो’र्न से कर दी एक्टर प्रकाश राज ने

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मंगलवार की दोपहर अचानक से ट्विटर पर एक नाम ट्रेंड करने लगा. वो नाम था प्रकाश राज. आप इन्हें अच्छे से पहचानते हैं. क्योंकि हिंदी फिल्म सिंघम ने इन्हें घर घर में जाना पहचाना नाम और चेहरा बना दिया. पहले हमें लगा कि शायद उनका जन्मदिन होगा इसलिए उनका नाम ट्रेंड कर रहा है लेकिन थोड़ी ही देर में माज़रा समझ आ गया.

प्रकाश राज इसलिए ट्रेंड कर रहे थे क्योंकि सोशल मीडिया पर उनका एक बयान वायरल हुआ. उस बयान में उन्होंने रामलीला की तुलना चाइल्ड पोर्न से की थी. ये दरअसल उनका डेढ़ साल पुराना बयान था. ये बयान प्रकाश राज ने फ़रवरी 2018 में न्यूज 18 इंडिया के एक कार्यक्रम चौपाल में दिया था.

घनघोर वामपंथी प्रकाश राज इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आलोचना कर रहे थे क्योंकि योगी ने अपने राज्य में रामलीला को प्रमोट करना शुरू किया.वो रामलीला जो दुनिया का सबसे पुराना थियेटर एक्ट है. वो रामलीला जो न जाने कितनी पीढ़ियों से भारत की सभ्यता और संस्कृति का प्रतीक बना हुआ है. वो रामलीला जो भारत की रगों में खून की तरह बहता है. उस रामलीला को प्रकाश राज ने पोर्न की तरह बता दिया. जिस कर्यक्रम में प्रकाश राज बोल रहे थे उस कार्यक्रम में हिन्दू दर्शक ही बैठे हुए थे और सब ख़ामोशी से उनकी बातें सुन रहे थे.

प्रकाश ये भी कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ धार्मिक त्योहारों को प्रमोट करके अल्पसंख्यकों को आतंकित करने का प्रयास कर रहे हैं. प्रकाश राज ये भी कहते हैं कि वो नहीं चाहते कि इस देश में रामलीला जैसा कोई सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम मनाया जाए. जब एंकर ने पूछा इससे क्या दिक्कत है तो प्रकाश राज कहते हैं कि रामलीला हमारे समाज के लिए खतरनाक है. प्रकाश राज वो सवाल करते हैं कि क्या आप अपने बच्चों को पोर्न देखेने की इजाजत देंगे? नहीं न… तो फिर रामलीला कैसे देखने देते हैं ? ये रामलीला अल्पसंख्यकों में डर पैदा करने के लिए होता है”

कितनी आसानी से प्रकाश राज ने रामलीला की तुलना पोर्न से कर दी. सोचिये अगर उन्होंने इस्लाम या पैगम्बर मोहम्मद के बारे में कुछ ऐसा कहा होता तो क्या होता ? किसी ने उनपर फतवा निकाल दिया होता. उनका गला काटने पर 51 लाख का इनाम घोषित कर दिया जाता और एक दिन उनका गला भी रेत दिया जाता. लेकिन रामलीला की तुलना पोर्न से करने पर सब कुछ शांत रहता है. एक साल बाद ट्विटर पर बस आउटरेज चला कर मामला रफा दफा कर दिया जाता है. न कोई फतवा निकला, न गला रेता गया. फिर भी असहिष्णु कौन कहलाता है? हिन्दू. फिर भी आतंकवादी किसे कहा जाता है? हिन्दू को. फिर भी डर किसे लगता है?गला रेतने वाले कौम को.

प्रकाश राज कहते हैं कि रामलीला समाज के लिए खतरनाक है. अगर रामलीला समाज के लिए खतरनाक है तो समाज के लिए अच्छा किसे माना जाए? त्यौहार के नाम पर लाखों जानवारों का खून बहाने वाले त्यौहार को समाज के लिए अच्छा माना जाए या फिर त्योहार के नाम पर खुद को जख्मी कर खून बहाने को समाज के लिए अच्छा माना जाए.

अपने देश में अल्पसंख्यक शब्द का जो कांसेप्ट है उसपर गौर कीजिये. इस देश सभी धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं. हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन, पारसी वगैरह वगैरह. हिन्दुओं के बाद सबसे ज्यादा आबादी इस देश में मुस्लिमों की है. सिख, बौद्ध, जैन, पारसी की आबादी सबसे कम है इसके बावजूद अल्पसंख्यक सिर्फ मुस्लिम कहलाते हैं. रामलीला से डर सिर्फ मुस्लिमों को लगता है और वोटबैंक भी सिर्फ मुस्लिम ही है. बेचारे भी सब मुस्लिम ही है और आतंकी, असहिष्णु , हिंसक हिन्दू है.

प्रकाश राज का पूरा इंटरव्यू यहाँ देखें –