आचार संहिता में न फंस जाये प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि

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लोक सभा चुनाव 2019 की तारीखों का ऐलान चुनाव आयोग दस मार्च को कर चुका है. और इसी के साथ ही आचार संहिता यानी मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट भी लागू हो गया है. आचार संहिता के चलते किसानों को नगद सहयोग देने वाली केंद्र सरकार कि सबसे बड़ी योजना फंसती हुई दिख रही है. इस योजना के अंतर्गत किसानों को छह हज़ार रुपए हर साल दो दो हज़ार कि तीन किश्तों में दिए जायेंगे. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना देश के करीब सवा सात करोड़ किसानों को मिलेगी या नहीं इसका फैसला चुनाव आयोग करेगा. लाभार्थी किसानों को ये राशि मिल सके इसके लिए कृषि मंत्रालय ने चुनाव आयोग से अनुमति मांगी है.

ये वे किसान है जिन्हें केंद्र सरकार लाभार्थी तो मानती है लेकिन जिन्होंने अभी तक अपना रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन नहीं कराया है. चुनाव आयोग के निर्देश अनुसार ही इस मामले में अब केंद्र सरकार कोई कदम उठा सकेगी. वहीं दूसरी और जिन किसानों का रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन हो चुका है उनको इस योजना का फायदा मिलना तय है. ऐसे कुल 4.75 करोड़ किसान हैं. ऐसे किसानों को एक किश्त पहले ही मिल चुकी है और बहुत जल्द दूसरी किश्त भी मिलने वाली है.

केंद्रीय राज्य मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के अनुसार देश के करीब 12 करोड़ किसानों को इस योजना के तहत सालाना 6 हज़ार रुपए कि मदद की जाएगी. उन्होंने आगे बताया कि ऐसे किसान जिनका रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन नहीं हुआ है उनके खाते में अभी पैसा ट्रान्सफर तो नहीं होगा लेकिन इस बीच वे अपने रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन कि प्रक्रिया पूरी कर सकते है ताकि जल्दी से जल्दी उन्हें इस योजना का फायदा मिल सके. आगे गजेन्द्र सिंह कहते हैं कि अगर चुनाव आयोग कहेगा तो हम नए रजिस्टर्ड किसानों को भी पैसे भेज देंगे.

आपको बताते चले कि प्रधानमंत्री किसान निधि योजना केंद्र सरकार कि किसानों को लेकर सबसे अहम योजना है. इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री ने 24 फ़रवरी को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से की थी. सभी 12 करोड़ लाभार्थी किसानों का रजिस्ट्रेशन हो पाता इससे पहले ही आचार संहिता लागू हो गयी. सरकार कि माने को चुनाव के पहले साढ़े चार करोड़ से ज्यादा किसानों के खातों में सरकार वोटिंग से पहले चार-चार हज़ार रुपए भेज देगी. इसी दिशा में सरकार एक अप्रैल को दूसरी किश्त भेजने कि तैयारी कर रही है.

इस योजना को सही तरीके से कार्यान्वित किया जा सके इसके लिए केंद्र सरकार पहले ही इस ऑपरेशनल गाइडलाइन जारी कर चुकी है जिसमें ये बताया गया है कि लाभार्थी कौन होंगे और धन राशी कैसे दी जाएगी. लघु और सीमांत किसान परिवार कि परिभाषा में ऐसे परिवारों को शामिल किया गया है जिनमें पति, पत्नी और 18 वर्ष तक के नाबालिग बच्चे हो और पूरा परिवार सामूहिक रूप से दो हेक्टेयर यानी करीब पांच एकड़ तक कि जमीन पर खेती करते हों. मतलब पूरे परिवार को एक इकाई मान कर धन राशी खाते में ट्रान्सफर की जाएगी. जिन लाभार्थियों के नाम एक फ़रवरी 2019 तक लैंड रिकॉर्ड में पाए जायेंगे वही इसके हकदार होंगे.

लाभार्थियों को कृषि विभाग में रजिस्ट्रेशन कराना होगा जिसके बाद जिला प्रशासन इसकी वेरिफिकेशन करेगा. वेरिफिकेशन के लिए आधार कार्ड, बैंक अकाउंट नंबर, मोबाइल नंबर, जाती प्रमाण पत्र आदि की ज़रूरत होगी.
इस योजना कि शुरुआत बजट 2019 से ही शुरू कर दी थी. तभी इतनी जल्दी पहली किश्त साढ़े चार करोड़ से ज्यादा किसानों को मिल चुकी है. इस योजना से सरकार के ऊपर करीब 75 हजार करोड़ का भार पड़ेगा. इस योजना का लाभ उन किसानों को मिलेगा जिनका नाम 2015-2016 की कृषि जनगणना में आता है.

गौर करने कि बात यहाँ ये हैं कि कृषि मंत्रालय ने इस योजना कि गाइडलाइन जारी करके ये साफ़ कर दिया है कि भूतपूर्व या वर्तमान में संवैधानिक पद धारक जैसे, मंत्री, विधायक , संसद, एमएलसी मेयर आदि को इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा. क्या आपको पता कि भारत के 15.85% संसद अपने आप को किसान बताते हैं. योजना का लाभ लेने के लिए और भी कई कंडीशन लगाई गयी हैं जिससे सिर्फ जरूरतमंद लोगों को ही इस योजना का फायदा मिल सके.

सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज के अनुसार 2006 से 2014 के बीच एक करोड़ से ज्यादा कृषि आय दिखाने वाले कुल 2746 मामले सामने आये थे. इन मामलों में ज्यादातर लोग नेता ही थे.

नेताओं के अलावा केंद्र या राज्य सरकार में तैनात मल्टी टास्किंग स्टाफ, चतुर्थ श्रेणी, समूह डी कर्मचारी या ऐसे लोग जो 10 हजार से ज्यादा पेंशन पाने वाले किसानों को भी इसका लाभ नहीं मिलेगा. ऐसे किसान जो इंजिनियर, आर्किटेक्ट, डॉक्टर आदि है उनके साथ पिछले वित्तीय वर्ष में कर देने वाले किसानों को भी इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा.

प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य है कि 2022 तक किसानों कि आय दोगुनी हो. इस दिशा में ये योजना बहुत अहम है. ऐसा इसलिए है क्योंकि अब आधार के साथ और राशी सीधे खाते में आने के बाद से इस योजना का सीधा फायदा किसानों को मिल सकेगा. आगे अब देखना ये होगा कि लाभार्थी किसान मोदी सरकार का 2019 में समर्थन करते हैं या नहीं.