तेजस्वी यादव की ‘बेरोजगार यात्रा’को लेकर, जदयू ने किया पलटवार

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दिल्ली का चुनाव ख’त्म हुए कुछ दिन ही हुए है. जिसमे बीजेपी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी. दिल्ली चुनाव हारने के बाद बीजेपी ने अपनी कमी को तलाशा और अपनी पार्टी के पदाधिकारियों के साथ मीटिंग कर के दिल्ली चुनाव पर हार का मंथन किया. अभी कुछ दिन पहले दिल्ली हुनर हाट का आयोजन भारत सरकार की तरफ़ से किया गया है.दिल्ली हुनर हाट में लोगों को अपनी कला का प्रद’र्शन करने का मौका मिलता है. दिल्ली हाट में कई प्रदेश के लोग आते हैं.और अपने प्रदेश के खाने पीने या फिर हाँथ से बने कपडे या जो कुछ वहां का प्रसिध्द होता है. वो सब यहाँ स्टॉल लगा कर लोगों को आकर्षित करते हैं.

वही पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी अपने फैसले के लिए तो जाने जाते है. लेकिन अपने एक अलग अंदाज को लेकर भी जनता के बीच काफी लोकप्रिय है. इसका एक नमूना पेश किया था. नरेन्द्र मोदी ने अपने मंत्रियों के साथ मीटिंग करने के बाद अचानक वो दिल्ली हुनर हाट के लिए बिना किसी प्लान के निकल गए. ये बात उनके मंत्रिमंडल में मंत्री मुक्तार अब्बास नकवी जो दिल्ली हुनर हाट को आयोजित कर रहें है. उनको खुद नहीं पता था. जब उन तक ये बात पहुंची तो वो खुद अपने आवास से निकले और दिल्ली हाट पहुंचे.   

वहां पहुँचने के बाद मोदी ने बिहार का सबसे प्रसिध्द खाना लिट्टी- चोखा को मोदी ने चाव से खाया और उसके बाद वहां पर कुल्लड वाली चाय पी. दिल्ली हुनर हाट में मौजूद लोगो के बीच पहुँचते ही लोगों ने उनके साथ सेल्फी खिचवाई और वहां पर लोग मोदी मोदी के नारे लगाते हुए दिखे.

मोदी के लिट्टी चोखा कहने के वि’पक्षी पार्टियों ने मोदी को घेरने की कोशिश शुरू कर दी. वि’पक्षी पार्टियों का कहना था की मोदी ने लिट्टी चोखा खाकर बिहार चुनाव साधने की कोशिश की है. मुझे एक बात समझ नहीं आती है की अगर मोदी कुछ खाते है तो लोग उसको चुनावी रंग क्यों देना शुरू कर देते है. जबकि बिहार चुनाव इस साल के अंत में होना है. मोदी के लिट्टी चोखा खाने के बाद बिहार में लालू की पार्टी राजद ने बिहार के अंदर सबसे बड़े सियासी समर की स्क्रिप्ट लिखनी शुरू कर दी है.

इस राजनीतिक घमा’सान में सबसे बड़ा हथि’यार बना है पोस्टर. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव पटना में बेरो’जगारी हटाओ यात्रा का काफिला तैयार कर रहे हैं. इस यात्रा से ठीक पहले पोस्टर के जरिए आरजेडी और लालू फैमिली पर तं’ज कसा गया है. माना जा रहा है कि जेडीयू समर्थकों की तरफ से ये पोस्टर चस्पा किए गए हैं. बिहार राज्य में ये माना जा रहा है कि अति पिछड़ी जातियों को किंगमेकर के रूप में देखा जा रहा है. एक अनुमान है कि बिहार में अति पिछड़ी जातियों की तादाद कुल वोटर्स का 25 फीसदी है. इनमें लुहार, बढ़ई, कुम्हार, सुनार, केवट और कहार जैसी जातियां शामिल हैं.

इन सभी जातियों को साधने की तैयारी अभी से ही तेजस्वी यादव ने शुरू कर दी है.लेकिन अभी कुछ दिन पहले बिहार में कुछ वि’पक्षी पार्टियों में तेजस्वी को लेकर मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं मान रहें है. वि’पक्षी पार्टियों का कहना है की शरद यादव के चेहरे पर बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा जायेगा. इन सभी को देखते हुए तेजस्वी ने अभी से चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. लेकिन अब चुनाव आने के बाद ही बिहार की तस्वीर साफ़ होगी भी या नहीं ये देखने वाली बात है?.