अब यूपी में दो से अधिक बच्चे पैदा करने वालों की आएगी शामत, जनसंख्या नियंत्रण क़ानून का ड्राफ्ट तैयार, जानिये क्या है नियम

201

उत्तर प्रदेश में लगातार बढती जनसंख्या पर योगी सरकार बड़ी चोट करने वाली है. राज्य विधि आयोग ने यूपी जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण व कल्याण) विधेयक-2021 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है. अब 2 से अधिक बच्चे रखने वालों को कई सुविधाओं से वंचित रहना पड़ सकता है. इस ड्राफ्ट में 2 से अधिक बच्चे रखने वालों को सरकारी योजनाओं का लाभ न दिए जाने के अलावा स्थानीय निकायों में रोक लगाने का भी प्रस्ताव है. विधि आयोग ने ड्राफ्ट को अपनी वेबसाइट http://upslc.upsdc.gov.in/ पर अपलोड कर दिया है. 19 जुलाई तक जनता से राय मांगी गई है.

पूरे देश में लम्बे समय से जनसंख्या नियंत्रण क़ानून बनाने की मांग उठ रही है. सबसे पहले इस दिशा में असम सरकार ने पहल की. असम में लगातार दूसरी बार भाजपा की जीत के बाद जब हेमंत बिस्वा सरमा के हाथ राज्य की कमान आई तो उन्होंने राज्य में जनसँख्या नियंत्रण क़ानून बनाने की तैयारी शुरू कर दी. अब उत्तर प्रदेश में योगी सरकार भी इसी राह पर बढ़ रही है. यूपी विधि आयोग द्वारा पेश किये गए ड्राफ्ट के अनुसार दो ही बच्चों तक सीमित होने पर जो अभिभावक सरकारी नौकरी में हैं, उन्हें इंक्रीमेंट, प्रमोशन सहित कई सुविधाएं दी जाएंगी. सरकारी कर्मियों का प्रमोशन रोकने व बर्खास्तगी का भी प्रस्ताव इसमें है. इसके अलावा वैसे अभिभावक जो दो बच्चों के माता पिता ह्जैं और सरकारी नौकरी में नहीं हैं उन्हें पानी, बिजली, हाउस टैक्स, होम लोन में छूट व अन्य सुविधाएं देने का प्रस्ताव है.

राज्य विधि आयोग ने ये ड्राफ्ट ऐसे समय में पेश किया है जब योगी सरकार नई जनसंख्या नीति जारी करने वाली है. उत्तर प्रदेश में पिछली बार साल 2000 में जनसंख्या नीति लाई गई थी जो 2016 तक के लक्ष्य को निर्धारित कर लाई गई थी. अब नयी जनसँख्या नीति 2030 तक लागू रहेगी. नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 के अनुसार यूपी की जन्म दर अभी 2.7% है, जो राष्ट्रीय औसत से 2.2% से अधिक है. नयी जनसंख्या नीति में इसे 2.1 फीसदी पर लाने का लक्ष्य रखा गया है और 2030 तक इसे 1.9 तक लाने का लक्ष्य है.