पोप फ्रांसिस ने माना चर्च में नन का पादरियों ने किया बलात्कार

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“उसके इशारे.. उसकी हरकतें.. दिन-ब-दिन और गंदे होते चले गए.. जब तक उसने मेरा बलात्कार नहीं कर लिया”
“वो खुद को नियंत्रित नहीं रख पाता था, वो दोहरे चरित्र वाला इंसान था”

यह बयान है फ्रांस की रहने वाली क्र्यस्टेल का, क्र्यस्टेल चर्च में नन थी.. और उसका बलात्कार करने वाला उस चर्च का पादरी.

क्र्यस्टेल जैसी ही हज़ारों नन के साथ बार बार हुए बलात्कार की कई कहानियां उन चर्च में रहने वाली लड़कियों के मन में दबी हैं.. और उन में से चंद लड़कियों की पुलिस फाइल्स में.. यह नन जो देखने में बेहद शांत और दीन दुनिया से विरक्त लगती हैं.. उनके मन में कोहराम मचा हुआ है.. समाज के बनाये आडम्बरों से निकल यह इश्वर की शरण में आई पर अफ़सोस वो पादरी जिन्होंने इन्हें संरक्षण दिया वो ही व्याभिचारी निकले… यह वो पादरी हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि यह ईश्वर के सबसे करीब होते हैं जिनके मन में पाप, लोभ, अहंकार और काम कुछ नहीं होता पर अफ़सोस की ईश्वर की आढ़ में यह अपने नापाक इरादों को सालों से अंजाम दे रहे हैं.. जिसका शिकार बन रही हैं यहाँ रहने वाली लड़कियां, कम उम्र के बच्चे और युवक भी.

अफ़सोस कि यह स्थान जिसे भगवान् का घर माना जाता है सबसे पवित्र माना जाता है वो भी पाप की छाया से बच नहीं पाया.

आप कहते हैं ईश्वर के करीब जाकर आपके मन का हर द्वन्द, हर दुःख, हर बुराई ख़त्म हो जाती है और शांति मिल जाती है… पर जो लोग यहां आपको शांत नजर आते हैं… भक्ति में लीन दिखते हैं… जिनमें आप ईश्वर का स्वरुप ढूंढते हैं वो भी पाप कर रहे होते हैं…

इसका खुलासा खुद कैथोलिक चर्च के पोप फ्रांसिस ने किया है.. पोप फ्रांसिस ने माना है कि पादरियों ने नन का यौन शोषण किया है, और उन्हें सेक्स स्लेव के रूप में रखा गया था। पोप फ्रांसिस ने पहली बार कैथोलिक चर्च में पादरियों द्वारा ननों के यौन शोषण को स्वीकार किया है। पोप ने यह भी बताया कि चर्च इस समस्या को सुलझाने का भरपूर प्रयास कर रहा है.. इसमें कई सारे आरोपियों को चर्च से निष्काषित भी कर दिया गया है.. पोप फ्रांसिस ने बताया कि उनसे पहले पोप बेनेडिक्ट इन हज़ारों नन्स को चर्च से निकालने के लिए भी मजबूर हो गए जिनका अन्य पादरियों द्वारा शोषण किया जा रहा था.

पिछले साल नवम्बर में कैथोलिक चर्च’स ग्लोबल आर्गेनाईजेशन फॉर नन्स ने” चर्च के उन नियमों की निंदा की जिसमें उन्हें चुप्पी और गोपनीयता बनाये रखने के लिए कहा जाता है.. इन्ही नियमों की वजह से चर्च की तमाम लड़कियां अपने साथ हुई दुर्घटनाओं का विरोध नहीं कर पाई.

पोप फ्रांसिस इस वक़्त मध्य पूर्वी देशों के ऐतिहासिक दौरे पर हैं.. पत्रकारों से हुई बातचीत में उन्होंने खुद स्वीकारा कि चर्च में औरतों को वो सम्मान नहीं दिया जाता जिसकी वो हक़दार हैं.. उन्हें हेय दृष्टि से देखा जाता है, चर्च में बिशप और पादरियों द्वारा नन्स के साथ लम्बे समय से चल रहे दुर्व्यवहार के बारे में चर्च अवगत था.. और इस मामले में दोषी कई सारे पादरियों को चर्च से निकाला गया है.  पोप फ्रांसिस ने यह भी माना कि यह समस्या लम्बे वक़्त से चल रही थी.. जिसका शिकार अमूमन नई लड़कियां बनती हैं. इन लड़कियों से पादरी अपने निजी काम करवाते हैं.. यहाँ तक कि उन्हें जबरन शारीरिक संबंध बनने के लिए भी मजबूर करते हैं.. और फिर उनका जबरदस्ती गर्भपात कराया जाता है.. जिसको वास्तव में चर्च के नियमों के मुताबिक़ अमान्य माना गया है.

चर्च के पादरियों द्वारा नन्स के साथ हो रहे दुराचार वैटिकन सिटी के अलावा और भी कई देशों में चल रहा है.. वैटिकन सिटी के अलावा इटली और अफ्रीका में भी ऐसे मामले सामने आये. पिछले साल भारत में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था जिसमे पंजाब के बिशप फ्रांको मुलक्कल पर एक नन ने आरोप लगाया था कि उन्होंने 2014 से 2016 के बीच उसका 13 बार बलात्कार किया. जगह बदलती रही, देश बदलते रहे पर औरतों की स्थिति वही है.

कैसी विडंबना है… कि हर पुरुष दुराचारी नहीं होता.. लेकिन फिर भी हर लड़की के पास उसके शोषण की कहानी होती है.. और शोषण हर बार शारीरिक ही नहीं होता.. मानसिक भी होता है.. मी टू मूवमेंट में अलग अलग देशों की अलग अलग इंडस्ट्री से, अमूमन हर इंडस्ट्री से जुड़ी लड़कियों ने अपने साथ हुई दुर्घटनाओं का ज़िक्र किया था… जिसे किसी ने सच माना.. किसी ने कहा इन्हें अपने शोषण की कहानी दस साल बाद याद आ रही हैं… 20 साल बाद याद आ रही है, दस साल पहले भी बता देती तो भी आप क्या कर लेते… आप तब भी असंवेदनशील थे.. आप आज भी असंवेदनशील हैं… आप कल भी असंवेदनशील ही रहेंगे.. इसलिए कोई बहन अपने भाई को, कोई बेटी अपने बाप को अपने साथ हुए गलत व्यवहार के बारे में नहीं बताती और इस तरह से इन दुर्घटनाओं का ज़िक्र लड़कियों के बीच ही ख़त्म हो जाता है. कभी घर, कभी स्कूल, कभी कॉलेज, कभी बस, ट्रेन , सड़क और अब वो जगह भी जिसे दुनिया में सबसे पवित्र माना जाता है.. औरतों के साथ हो रहे शोषण की साक्षी बन गई.. अफ़सोस यह वो जगह है जिसमें  ईश्वर का वास होता है, अफ़सोस अब यह मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर भी पवित्र नहीं रह गए… यहाँ भी पाप होते रहे.. वो लोग जिनमें आप ईश्वर का स्वरुप ढूंढते हैं वो भी पाप करते रहे…  और इंसानियत शर्मसार होती रही