पोल्लाची सेक्स स्कैंडल – सोशल मीडिया के जरिये लड़कियों को फंसाकर उनकी वीडियोस बनाते थे ये लड़के

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कभी निर्भया.. कभी गुडिया.. कभी आसिफा.. और ऐसे ही ना जाने कितनी ही लड़कियां हैं जिनके शोषण की कहानी गुमनामी में खो गई.. यह हमारा दुर्भाग्य है कि साल, सदियाँ और दशक बीतते गए.. पर आज भी हमें इस तरह की ख़बरों से रू ब रू होना पड़ता है.. अफ़सोस कि आज भी हमारे बीच इंसान के रूप में हैवान रह रहे हैं.. अपने घटिया मंसूबों को अंजाम दे रहें हैं.. इन्हें ना तो भगवान् का डर है और ना ही कानून का..

यह वीडियो पोल्लाची काण्ड की एक पीडिता की है, और ऐसी ही दुर्दशा 250 से भी ज्यादा लड़कियों की हुई है.. वीडियो में लड़की को बेल्ट से मारा जा रहा है और उससे कपडे उतारने को कहा जा रहा है.. लडकी रो रही है.. रहम की भीख मांग रही है.. भैया प्लीज मुझे छोड़ दो.. प्लीज मुझे जाने दो.. पर ये दरिंदा अपनी जिद पर अड़ा रहा कपडे उतारो क्यूंकि उसे लडकी की वीडियो बनानी थी.. और यह सिर्फ इन लड़कों का शौक नहीं.. बल्कि उनका धंधा था.. 250 से भी ज्यादा लड़कियां इनकी हैवानियत का शिकार बनी.. इस घटना को नाम दिया गया “पोल्लाची काण्ड”

पोल्लाची तमिल नाडू का एक शहर है जो कोयम्बटूर के पास है.. पोल्लाची के ही चार लडके जो फ़िलहाल जेल की सलाखों के पीछे हैं साल 2012 से सोशल मीडिया खासकर फेसबुक और इन्स्टाग्राम के जरिये मासूम, जवान और सुंदर लड़कियों को अपने जाल में फंसाते थे.. उनसे दोस्ती करते थे.. उन्हें मिलने बुलाते थे और फिर उनसे जबरदस्ती करते थे.. उन्हें बेल्ट से मारा जाता था.. टॉर्चर किया जाता था.. उनके कपडे उतरवाए जाते थे.. उनके वीडियो बनाते थे.. उन्हें गंदी साइट्स पर डालते थे.. वीडियोस के जरिये क्लाइंट्स बुलाते थे.. फिर उन लड़कियों को ब्लैकमेल करते थे.. उनसे पैसे ऐंठते थे.. उन्हें बार बार मिलने बुलाते थे.. लड़कियों को और लड़कियां लाने को कहते थे.. बार बार उनके साथ दरिंदगी की फिर वही  कहानी दोहराते थे..

thirunavukaarasu

सालों  से यह सिलसला चल रहा था.. इसमें फंसने वाली कई लड़कियों ने खुदकुशी कर ली.. एक लडकी जो मानसिक रूप से विक्षिप्त थी.. वो तो गर्भवती हो गई थी.. उसका एबॉर्शन कराया गया.. एक पीड़ित लडकी पिछले दो साल से सदमे में है जो कुछ बोल ही नहीं पा रही..

यह सारी लड़कियां शिकार हुई आदमी के रूप में छिपे उन भेडियों का जो उन्हें नोंच नोंच कर खा जाना चाहते थे.

अब बात करते हैं कि आखिर यह काण्ड कैसे सामने आया..

12 फरवरी 2019 के दिन 19 साल की एक लडकी प्रिया जिसका नाम काल्पनिक है मगर पात्र वास्तविक, उसे उसके कॉलेज का ही एक लड़का सब्रिराजन उसे कुछ जरूरी बात करने के बहाने बस स्टॉप पर बुलाता है जहाँ पर पहले से ही उसका दोस्त थिरुनावुक्कारासु मौजूद होता है.. जब प्रिया वहां जाती है तो दोनों एक कार के पास खड़े होते हैं.. जैसे ही प्रिया उनके पास पहुँचती है तो यह दोनों उसे जबरदस्ती गाडी में घुसा देते हैं जिसमें पहले से ही दो और लड़के सतीश और वसन्तकुमार मौजूद होते हैं.. यह चारों लड़के प्रिया के साथ जबरदस्ती करने लगते हैं.. और उसकी वीडियो बनाने लगते हैं.. और उसे धमकाते हैं जब जब वो उसे सेक्सुअल फेवर मांगेंगे और पैसे मांगेगे तो देना पड़ेगा नहीं तो उसकी यह वीडियो वो इन्टरनेट पर अपलोड कर देंगे.. जब प्रिया विरोध करना और चिल्लाना बंद नही करती तो पकडे जाने के डर से यह उससे उसकी गोल्ड की चैन छीनकर गाडी से बाहर फेंककर भाग जाते हैं जिससे उसे लगे कि यह डकैती का मामला है मगर प्रिया यहाँ छुप नहीं बैठती और सारा वाकया अपने भाई सुभाष को बता देती है सुभाष इन लड़कों को ट्रैक करता है.. उन्हें पकड़ता है.. उन्हें मारता है.. इनके फ़ोन छीन लेता है.. जब सुभाष के हाथ में इनके फ़ोन आते हैं तो पता चलता है कि मामला सिर्फ प्रिया तक ही सीमित नहीं था.. उनके फ़ोन में 3 और लड़कियों के वीडियोस और फोटोज होते हैं जिन्हें यह ब्लैकमेल कर रहे थे.. सुभाष यह सारे प्रूफ लेकर मौजूदा पुलिस स्टेशन में इनके खिलाफ कंप्लेंट दर्ज करा देता है.. चारों लड़कों के फ़ोन और लैपटॉप जब्त क्र लिए जाते हैं और तब पता चलता है कि यह मामला 3-4 लड़कियों तक सीमित नहीं था.. यह पूरा रैकेट 2012 से चल रहा था जिसमें 2019 तक 250 से भी ज्यादा लड़कियां फंस चुकी थी

पोल्लाची पुलिस 24 फरवरी को इन चारों लड़कों सबरीराजन, थिरुनावुक्करासु, सतीश और वसंतकुमार के खिलाफ धारा 354 ए (यौन उत्पीड़न के लिए ), धारा 354 बी (महिला के खिलाफ आपराधिक बल का इस्तेमाल या हमला करने के लिए ) और धारा 392 (डकैती) आईटी अधिनियम की धारा 66 ई (गोपनीयता का उल्लंघन); और तमिलनाडु अधिनियम की धारा 4 महिला यौन उत्पीड़न अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर लेती है;

पहला आरोपी 25 वर्षीय सबरीराजन उर्फ रिस्वांध पोलाची में सिविल इंजीनियर है। दूसरा 26 वर्षीय थिरुनावुक्करसु फाइनेंसर है एक बहुत बड़े परिवार का लड़का है जिसके दोस्त तमिल नाडू के डिप्टी स्पीकर पोल्लाची जयरामन के बेटे हैं, इनके नाम हैं मुकुन्दन और प्रवीण । तीसरा आरोपी वसंतकुमार ग्राहकों से पैसा इकट्ठा करने के लिए थिरुनावुक्कारसु के लिए काम करता है।और चौथा आरोपी सतीश पोलाची में एक रेडीमेड कपड़ों की दुकान चलता है।

यह वो चारों लड़के हैं जो मुख्य रूप से केस में सामने हैं.. लेकिन इनका दावा है कि इस केस में कई बड़े बड़े नाम जुड़े हुए हैं जो राजनीति और प्रशासन से जुड़े हैं.. लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही ये सारे गुनहगार सामने होंगे

लेकिन अब आप हमें बताइए कि इन लड़कों और इस तरह के लोगों का क्या किया जाना चाइये.. इनके परिवारों का क्या होना चाहिये जो इन्हें बचाने की कोशिश कर रहे हैं समाज को गलत सन्देश दे रहे हैं.. उन पुलिस वालों का क्या होना चाहिए जो रसूख वालों के बेटओं को बचाने की खातिर कोई कार्यवाही नही कर रहे.. क्या गुनहगार सिर्फ यह लड़के हैं.. या इनका परिवार, समाज और क़ानून?? 2012 से 2019 तक यह सिलसिला चलता रहा.. और किसी को पता नही चला.. क्यूंकि इन लड़कों का परिवार अपने बेटों के मोह में कुछ नहीं बोल पाया.. समाज को तब तक कोई फर्क नही पड़ता जब तक उनका कोई अपना भुक्तभोगी नहीं बनता और क़ानून खुद रसूख वालों के आगे झुका हुआ है.. पीड़ित लड़कियां और उनके परिवारों ने भी चुप्पी साधी रखी क्यूंकि उन्हें बदनामी का डर था और इसका भी कि इतने बड़े परिवार से कैसे टकरायेंगे., लेकिन सबसे अच्छा कदम उठाया गया वहां के वकीलों और कोर्ट द्वारा जिन्होंने इस मामले में फंसे सभी आरोपियों के समर्थन में केस लेने से साफ़ इनकार कर दिया है और यह भी कह दिया कि कोई और वकील भी जो इन आरोपियों के समर्थन में लडेगा उन्हें भी कोर्ट में घुसने तक नहीं देंगे.. वकीलों का यह फैसला सच में काबिल ए तारीफ़ है कि कोई तो है जो सच के साथ है.. और इसीलिये भारत के संविधान और क़ानून पर लोगों का भरोसा कायम है.. पोल्लाची में चल रही इस अंधेर नगरी को, इन काले कारनामों को छिपाने की बेहद कोशिश की गई लेकिन अंत में जीत सिर्फ और सिर्फ अच्छाई और सच की ही होती है.