क्या बंगाल में भाजपा के बढ़ते जनाधार से बेचैन हैं ममता बनर्जी?

262

लोकसभा चुनाव के 6 चरण बीत चुके हैं. अब बस आखिरी चरण बचा है. बंगाल मे सियासी लड़ाई चरम पर है. राजनीतिक हिंसा के साथ साथ जुबानी जंग भी चरम पर है. बंगाल की लड़ाई में जीत के लिए भाजपा ने जी जान जान लगा दिया है तो अपनी जमीन बचाने के लिए ममता बनर्जी भी वो हर कदम उठा रही है जिससे राजनीतिक मर्यादाएं तार तार हो रही है.

छठे चरण के दौरान हिंसा के बावजूद बंगाल में जबरदस्त वोटिंग हुई. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि केन्द्रीय सुरक्षा बलों की वर्दी में भाजपा और RSS के लोग हैं जबकि भाजपा ने चुनाव आयोग में शिकायत की है कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्त्ता उनके उम्मीदवारों के साथ मारपीट कर रहे हैं.
दक्षिण परगना जिले बसंती में रैली को संबोधित करते हुए ममता ने कहा – “मैं सुरक्षा बलों का अपमान नहीं करना चाहती लेकिन भाजपा ने उन्हें मतदान को प्रभावित करने का निर्देश दिया है. RSS कार्यकर्ताओं को सुरक्षा बलों के रूप में बंगाल भेजा गया है. आपको ये करते हुए शर्म आनी चाहिए क्योंकि आप यहाँ अपना कर्तव्य निभाने के लिए आए हैं.”

ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया है कि वो राज्य में समानांतर सरकार चला रहे हैं , और केन्द्रीय बलों की वर्दी में भाजपा और RSS के लोगों को बंगाल भेजा जा रहा है. ममता ने खुले तौर पर पीएम मोदी को धमकी देते हुए कहा है कि चुनाव के बाद जब मोदी सत्ता से बाहर हो जायेंगे तो कहाँ जा कर छुपेंगे ? मैं उनसे इंच इंच का बदला लुंगी. उन्होंने कहा कि मोदी ने मुझे और बंगाल को बदनाम कर दिया है. एक एक चीज का बदला लिया जाएगा .

आखिरी चरण में 19 मई को राज्य के 9 सीटों पर वोट डाले जायेंगे. उससे पहले राज्य में एक बार फिर हेलिकॉप्टर लैंडिंग के मुद्दे ने राज्य लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ताजा मामला है जाधवपुर का. जाधवपुर में अमित शाह की रैली के लिए उनके हेलिकॉप्टर को लैंडिंग की इजाजत नहीं मिली. सोमवार को अमित शाह की तीन रैलियां होनी थी. पहले तीनों रैली के लिए हेलिकॉप्टर लैंडिंग की इजाजात नहीं मिलने की खबर आई. बवाल बढ़ा तो दो रैलियों की इजाजत दे दी गई लेकिन जाधवपुर में हेलिकॉप्टर लैंडिंग की इजाजत नहीं मिली और रैली को रद्द कर दिया गया. भाजपा नेताओं के हेलिकॉप्टर को लैंडिंग की इजाजत नहीं मिलने का ये पहला मामला नहीं है. पहले भी कई बार ऐसा हो चूका है. अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के हेलिकॉप्टर को कई बार लैंडिंग की इजाजत नहीं दी गई.

अब सवाल ये है कि ममता आखिर इतनी बौखलाई और खुद को असुरक्षित महसूस क्यों कर रही हैं ? इसका जवाब आपको बंगाल के 2014 के बाद उभरे राजनितिक हालातों पर नज़र डाल कर मिलेगा. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बद राज्य में भाजपा ने तेजी से अपना विस्तार किया है. लेफ्ट और कांग्रेस के सिमटने के बाद ममता विरोधी वोट बैंक भाजपा की शरण में आया जिससे ममता भाजपा में अपना शत्रु देखने लगी. भाजपा ने राज्य में 42 में से 22 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है और ममता बनर्जी अपने राज्य में भाजपा को किसी भी कीमत पर बढ़ते नहीं देख सकती . भाजपा और तृणमूल नेताओं के बीच राजनीतिक हिंसा भी इसी की परिणति है.

बंगाल में राजनीतिक हिंसा का इतिहास बहुत पुराना है. पहले से स्थापित पार्टियों को जब लगता है कि कोई नई पार्टी उसके वर्चस्व को चुनौती दे रही है तो उसे दबाने के लिए राजनीतिक हिंसा का सहारा लिया जाता है. कभी लेफ्ट ने तृणमूल के साथ यही किया था और अब तृणमूल , भाजपा के साथ यही कर रही है.
ममता बनर्जी खुद को प्रधानमंत्री पद का दावेदार मानती हैं और प्रधानमंत्री मोदी से सीधी टक्कर ले कर वो ये साबित करना चाहती है कि राष्ट्रीय स्तर पर वो एकलौती ऐसी नेता है जो मोदी से टकरा सकती हैं और उन्हें रोक सकती हैं. कहीं न कहीं ममता को ये डर हो गया है कि जिस तरह उन्होंने लेफ्ट को उखाड़ फेंका था वैसे भाजपा बढ़ते बढ़ते एक दिन उन्हें उखाड़ फेकेगी .

अक्सर विपक्षी पार्टियाँ आरोप लगाती रही है कि मोदी सरकार में लोकतांत्रिक व्यवस्था तार तार हो गई है और विपक्ष को दबाने के लिए तानाशाही कर रही है लेकिन बंगाल में ममता बनर्जी के व्यवहार को लेकर विपक्षी पार्टियाँ चुप्पी साध लेती है . मोदी राज में बढती असहिष्णुता के मुद्दे पर देश के लेखको और प्रबुद्ध लोगों ने सरकार के खिलाफ अवार्ड वापसी का अभियान भी चलाया था लेकिन बंगाल की घटना पर सब आँखे मूंदे रहते हैं जो ये दर्शाता है कि पार्टियों और बुद्धिजीवियों की सहूलियत के हिसाब से लोकतंत्र खतरे में आता है.