बंगाल में बवाल : क्या लोकतंत्र की तिलांजलि दे कर लोकतंत्र बचाएंगी ममता बनर्जी?

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बंगाल में लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में 9 सीटों पर मतदान होना है, ये सभी सीटें सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस की गढ़ है. इन 9 सीटों पर कब्ज़ा करने के लिए भाजपा और टीएमसी में घमासान चरम पर है. सोमवार को जाधवपुर में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को हेलिकॉप्टर उतारने की इजाजत नहीं दी गई जिस कारन उन्हें रैली रेड करनी पड़ी थी और आज मंगलवार को कोलकाता में उनके रैली स्थल पर पुलिस पहुँच गई और रैली के लिए परमिशन पेपर मांगने लगी.

अमित शाह ने सोमवार को जॉयनगर लोकसभा क्षेत्र में ममता बनर्जी को ललकारते हुए कहा था– “यदि कोई ‘जय श्री राम’ का उद्घोष करता है तो ममता दी नाराज हो जाती है. मैं जॉयनगर के मंच से जय श्री राम बोलता हूँ और कल कलकता जा रहा हूँ. हिम्मत हो तो गिरफ्तार कर लेना.”

मंगलवार को उत्तरी कोलकाता में अमित शाह की रैली स्थल पर पुलिस पहुंची और स्टेज से जुड़े परमिशन पेपर मांगे हैं और पेपर न देने पर मंच को तोड़ने को कहा है. उत्तरी कोलकाता कोलकाता के धर्मतल्ला में ही आज अमित शाह की रैली है. पुलिस के पहुँचते ही रैली स्थल पर माहौल तनावपूर्ण हो गया. भाजपा कार्यकर्ता नारे लगते हुए पुलिस को घेरने लगे. भाजपा ने आरोप लगाया है कि राज्य का प्रशासन ममता के आदेश पर काम कर रहा है. भाजपा नेता मुकुल रॉय ने आरोप लगाया कि राज्य के चुनाव अधिकारी भी हालात से आँखे मूंदे हुए हैं और ममता सरकार के समर्थक के रूप में काम कर रहे हैं.

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव ने भी tweet कर आरोप लगाया -“अमित शाह जी की रैली में अड़ंगेबाजी, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने भाजपा को परेशान करने के लिए प्रशासन को खुला छोड़ रखा है. अमित शाह जी की रैली में अड़चन डालने के लिए लाऊडस्पीकर को पुलिस ने मुद्दा बना लिया है. ये चुनाव आचार संहिता है या ममता सरकार की हठधर्मी?”

15 मई को होने वाली योगी आदित्यनाथ की रैली भी रद्द कर दी गई है .भाजपा ने टीएमसी के गढ़ में सेध लगाने में एडी चोटी का जोर लगा दिया है तो टीएमसी ने भी अपना गढ़ बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. दिलचस्प बात ये है कि हिंसात्मक चुनाव और भाजपा उम्मीदवारों पर हो रहे लगातार हमलों और भाजपा नेताओं की रैलियों को रोकने के बावजूद टीएमसी भाजपा पर ही आरोप लगाती है. ममता बनर्जी ने चुनाव के दौरान सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का एक नया अध्याय लिख दिया है.

वैसे तो भाजपा ने राज्य की 42 सीटों में से 22 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है लेकिन पार्टी जानती है कि अगर उनसे 15 सीटें भी हासिल कर ली तो वो बंगाल में एक बड़ी ताकत बन जायेगी और ममता समझती है कि अगर भाजपा ने इस चुनाव में अपना पांच जमा लिया और अगर मोदी दोबारा सता में आए तो उनके भविष्य की योजनाओं को तगड़ा झटका तो लगेगा ही साथ ही उनकी राष्ट्रीय महत्वकांक्षाओं पर भी ग्रहण लग जाएगा .

केन्द्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद राज्य के चुनावों में हो रही हिंसा ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. विश्लेषक मानते हैं कि चुनाव आयोग ने केन्द्रीय सुरक्षा बलों को तैनात करने का आदेश तो दे दिया लेकिन उनकी तैनाती सही तरीके से नहीं की गई . राज्य में अभी तक के सभी चरण हिंसात्मक ही रहे हैं. ऐसे में आखिरी चरण में उस 9 सीटों पर चुनाव है जो टीएमसी का गढ़ है. इनमे कोलकाता भी शामिल है. कोलकाता ही वो शहर है जहाँ टीएमसी का जन्म हुआ था और यही वो जगह है जहाँ से उसने लेफ्ट के किले में सेंध लगाई थी. अब भाजपा , टीएमसी के उसी किले में सेंध लगानेका मौका ढूंढ रही है और यही ममता बनर्जी की बेचैनी का कारण भी है .