बंगाल में हिंसा के बाद चुनाव आयोग ने चलाया डंडा तो तिलमिला गई ममता बनर्जी

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बंगाल में लोकसभा चुनावों के दौरान हो रही हिंसा पर चुप्पी के कारण सवालों के घेरे में में आए चुनाव आयोग ने बुधवार को अपना डंडा चलाया और बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए निर्धारित दिनों में से एक दिन कम कर दिया. आखिरी चरण के लिए 19 मई को वोट डाले जायेंगे और नियमों के हिसाब से देखें तो 17 मई को शाम 5 बजे चुनाव प्रचार समाप्त होना था लेकिन बंगाल में जारी बवाल के बाद चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया और कहा कि राज्य में 16 मई को रात 10 बजे चुनाव प्रचार बंद हो जाएगा .
इतना ही नहीं, चुनाव आयोग ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए ममता के दो करीबी अफसरों के पर क़तर दिए. चुनाव आयोग ने राज्य के गृह सचिव अत्रि भट्टाचार्य को हटा दिया साथ ही बंगाल के एडीजी (सीआइडी) राजीव कुमार केन्द्रीय गृह मंत्रालय में भेज दिया. राजीव कुमार वही अफसर हैं जिसके लिए ममता बनर्जी कुछ महीनों पहले ममता धरने पर बैठ गई थीं.

चुनाव आयोग के आदेश के बाद ममता तिलमिला गई और उन्होंने बुधवार को देर रात प्रेस कांफ्रेंस कर के चुनाव आयोग पर मोदी और अमित शाह के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया. ममता बनर्जी ने कहा चुनाव आयोग में भाजपा और आरएसएस के लोग भरे हुए हैं. प्रेस कांफ्रेंस में ममता ने कोलकाता में हुई हिंसा के लिए अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि अमित शाह हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं लेकिन उन्हें बर्खास्त नहीं किया गया. चुनाव आयोग को अमित शाह के खिलाफ करवाई करनी चाहिए लेकिन आयोग खुद अमित शाह और मोदी के इशारे पर काम कर रहा है. उन्होंने कहा “हम कहाँ रह रहे हैं .. कोई लोकतंत्र नहीं है …. सुप्रीम कोर्ट भी हमारी बात नहीं सुन रहा .. हम लोग कहाँ जाए ?” ममता ने मोदी पर निजी हमले करते हुए कहा कि जो आदमी अपनी बीवी का ख्याल नहीं रख पाया वो देश का ख्याल कैसे रखेगा ?

बंगाल में जारी बवाल के बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल ममता के साथ आ खड़े हुए. समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, डीएमके, राजद सभी ने एक सुर में बंगाल के बिगड़े हालात के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया . कांग्रेस ने मांग की की कोलकाता में हुई हिंसा के लिए अमित शाह पर कारवाई होनी चाहिए. मायावती ने इसके लिए भाजपा और आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया .

इसे सियासत का चरित्र ही कहेंगे कि सभी विपक्षी पार्टियाँ लोकतंत्र बचाने के नाम पर चुनाव लड़ रही है लेकिन जब बंगाल में भाजपा नेताओं को प्रचार से रोका जाता है, उनके हेलिकॉप्टर को लैंडिंग की इजाजत नहीं दी जाती है और चुनाव के दौरान भाजपा उम्मीदवारों पर हमले होते हैं तो लोकतंत्र बचाने की दुहाई देने वाली सभी पार्टियाँ मौन साध लेती हैं. हर चरण में हिंसा पर कांग्रेस ने मौन साध रखा था लेकिन जब चुनाव आयोग ने एक्शन लिया तो कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर धब्बा बताने में जरा भी देर नहीं किया. तो अब ये मान लिया जाये कि लोकतंत्र भी पार्टियों की सहूलियत के हिसाब से खतरे में आता है .

देश के 29 राज्यों में चुनाव हो रहे हैं . उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र समेत तमाम उन जगहों पर भी चुनाव हो रहे है जहाँ भाजपा की सरकार है और मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा समेत तमाम उन राज्यों में भी चुनाव हो रहा है जहाँ भाजपा सत्ता में नहीं है … लेकिन ना तो भाजपा शासित राज्य में हिंसा हुई और ना ही गैर भाजपा शासित राज्यों में . लेकिन जो हालात बंगाल में है वैसा किसी भी अन्य राज्य में नहीं.

आखिरी चरण में बंगाल में जिन 9 सीटों पर चुनाव है वो ममता का गढ़ है . 2014 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने सभी सीटों पर कब्ज़ा किया था और भाजपा ज्यादातर सीटों पर दूसरे नंबर पर रही थी . भाजपा की यही बढती ताकत ममता की बौखलाहट का कारण है . विपक्ष एकता को जवाब देने के लिए भाजपा की सहयोगी पार्टियाँ भी भाजपा के साथ आने लगीं . जेडीयू ने राज्य में बिगड़े हालात केलिए राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है. तो शिवसेना ने अमित शाह के रोड शोपर हमला के लिए ममता बनर्जी को निशाने पर लिया.

फिलहाल तो बंगाल पुरे देश के केंद्र में आ गया है . जो बवाल बंगाल में मचा हुआ है और जिस तरह से सभी विपक्षी पार्टियाँ ममता के साथ खड़ी हो गई है. उसने ममता को एक बार फिर से विपक्ष में नंबर वन बना दिया है और ममता यही चाहती भी थी. ममता मोदी और शाह से सीधे टकरा कर ये सन्देश देना चाह रही हैं कि एकलौती वही है जो इस जोड़ी से टक्कर ले सकती हैं . 42 सीटों की इस जंग में कौन किस पर भारी पड़ेगा ये तो 23 मई को सामने आएगा लेकिन जिस तरह से ममता बेचैन हैं … कहीं न कहीं उन्हें अंदेशा हो गया है कि इस बार भाजपा 2014 के अपने आंकड़े 2 सीटों को बढ़ने में कामयाब हो सकती है .