जब आतंकवाद का कोई धर्म नही होता तो कमल हासन ने क्यों कहा हिन्दू आतंकवाद?

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देश में चल रहे लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण से पहले एक बार फिर हिन्दू आतंकवाद मुद्दे ने देश की सियासत में हलचल मचा दी. अभिनेता से नये नये नेता बने कमल हासन ने नाथू राम गोडसे को हिन्दू आतंकवादी बता कर विवाद खड़ा कर दिया. रविवार को तमिलनाडु के अरवाकुरिची में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कमल हासन ने कहा कि “आजाद भारत का पहला आतंकवादी एक हिंदू था और उसका नाम नाथूराम गोडसे था। मैं यह इसलिए नहीं कह रहा हूं क्योंकि यहां पर कई सारे मुस्लिम मौजूद हैं। मैं महात्मा गांधी की मूर्ति के सामने खड़े होकर यह कह रहा हूं।”

कमल हासन के इस बयान के बाद विवाद खड़ा होना स्वाभाविक था और हुआ भी. सबसे बड़ी आपत्ति भारतीय जनता पार्टी ने जताई. भाजपा पहले से ही हिन्दू आतंकवाद शब्द इजाद करने को लेकर कांग्रेस को घेर रही है और इसलिए भोपाल से मालेगांव बम धमाके की आरोपी साध्वी प्रज्ञा को उस दिग्विजय सिंह के खिलाफ अपना उम्मीदवार बनाया है जिन्होंने UPA सरकार के दौरान हिन्दू आतंकवाद और भागवाद आतंकवाद शब्द को जोर शोर से उठाया था.

भाजपा में हासन के बयान पर आपति जताते हुए कहा कि हत्यारा और आतंकी में फर्क होता है. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा “कमल हासन के बयान से साबित होता है कि वह हत्यारे और एक आतंकवादी के बीच के फर्क को नहीं समझते हैं.” उन्होंने कहा कि कमल अपनी नयी राजनीतिक पार्टी को जल्दी स्थापित करने के लिए अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण की राह पर चल रहे हैं.

अब सवाल ये है कि जब सभी पार्टियाँ ये कहती आईं है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता तो फिर बार बार हिन्दू आतंकवाद शब्द क्यों सामने लाया जाता है. जब भी दुनिया कहीं कोई बड़ा आतंकी हमला होता है तो सभी राजनीतिक पार्टियों में ये बयान जारी करने की होड़ लग जाती है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता लेकिन जब वोटबैंक की बात आती है तो आतंकवाद का धर्म हिन्दू हो जाता है. कुछ ऐसा ही किया कमल हासन ने भी . रविवार को वो एक मुस्लिम बहुल इलाके में चुनावी जनसभा कर रहे थे. तो ये आसानी से समझ जा सकता है कि हिन्दू आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल करने के पीछे कमल हासन के पास क्या मजबूरी और मंशा रही होगी.

सोशल मीडिया पर फिल्म अभिनेता विवेक ओबेरॉय और अभिनेत्री कोयना मित्रा ने कमल हासन के बयान का तीखा विरोध किया. विवेक ओबेरॉय ने tweet किया -“प्रिय, कमल सर, आप एक महान कलाकार हैं. जिस तरह से कला का कोई धर्म नहीं होता है उसी तरह से आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता. आप कह सकते हैं कि गोडसे आतंकवादी थे लेकिन अलग से ‘हिन्दू’ कहने की क्या ज़रूरत थी? क्या यह इसलिए है कि आप मुस्लिम बहुल इलाक़े में थे?”

कोयना मित्रा ने कमल हासन का विरोध किया और कहा कि भारत के पहले आतंकी जिन्ना हे. उन्होंने tweet किया- “कमल हासन सर, भारत के पहले आतंकवादी जिन्ना थे. उन्होंने मुस्लिमों के लिए देश को बाँटा और इसमें लाखों लोग मारे गए. आपको हत्यारे और आतंकवादी में फ़र्क़ पता होना चाहिए.”

अमर सिंह ने भी कमल हासन को उनके हिन्दू विरोधी बयान के लिए आड़े हाथों लिया और साफ़ साफ़ जता दिया कि ये सही है कि सभी आतंकवादी मुसलमान नही होते लेकिन ये भी सच है कि ज्यादातर आतंकवादी मुस्लमान ही होते हैं. अमर सिंह ने tweet किया – “कमल हासन को रेखा के पिता ने आगे बढ़ाया, जो कि हिन्दू थे. पहली और आख़िरी पत्नी भी हिन्दू थी. अब वो ज़हरीली टिप्पणी कर रहे हैं. निश्चित तौर पर गोडसे हत्यारा था लेकिन वो 26/11 की तरह नहीं था. सभी मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं पर ज़्यादातर आतंकवादी मुसलमान हैं.”

वैसे ये पहली बार नहीं है जब कमल हासन ने हिन्दूओं को आतंकवादी बताया हो. इससे पहले उन्होंने 2017 में भी हिन्दू कट्टरवाद पर बयान दे कर विवाद खड़ा कर दिया था. 2017 में तमिल साप्ताहिक पत्रिका ‘आनंदा विकटन’ में उन्होंने एक लेख लिखा, जिसमें आरोप लगाया कि राइट विंग हिंसा में शामिल है और हिंदू कैंपों में आतंकवाद घुस चुका है. उन्होंने आगे लिखा कि हिंदू कट्टरपंथी पहले बातचीत में यकीन रखते थे, लेकिन अब हिंसा में शामिल हैं.

साल 2000 में कमल हासन ने एक फिल्म बनाई थी हे राम . इस फिल्म पर काफी विवाद हुआ था. इस फिल्म में कमल ने एक हिन्दू युवक साकेत राम की भूमिका निभाई थी जो महात्मा गाँधी की हत्या करना चाहता था क्योंकि बंटवारे के दौरान फैले दंगे में उसकी पत्नी की हत्या कुछ मुस्लिम युवक कर देते हैं. राम ने इस सब के लिए महात्मा गाँधी को जिम्मेदार माना और उनकी हत्या के लिए प्लान बनाने लगा. ये फिल्म अपने विवादास्पद कंटेंट की वजह से काफी विवादों में रही थी .
ये बात सही है कि किसी भी तरह से हत्या को जस्टिफाई नहीं किया जा सकता लेकिन एक हत्यारे की वजह से पूरे धर्म को आतंकी घोषित कर देना कहाँ तक सही है,वो भी तब जब एक धर्म विशेष आतंकी घटनाओं में संलिप्त होता है तो ये सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता.