गंभीर पर आतिशी के आरोप कितने सही? हर बार आरोपों के बाद केजरीवाल को मांगनी पड़ी है माफ़ी

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आरोपों की राजनीति में महारत हासिल कर दिल्ली में सत्ता के शीर्ष तक पहुँचने वाले अरविन्द केजरीवाल को अपने तथ्यहीन आरोपों के लिए कई बार अदालत में माफ़ी मांगनी पड़ी है. एक बार फिर अरविन्द केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की जंग जीतने के लिए आरोपों की राजनीति का सहारा लिया और एक बार फिर उन्हें अदालत में घसीट लिया गया.

अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और पूर्वी दिल्ली से पार्टी की उम्मीदवार आतिशी मर्लेना ने क्रिकेटर से नेता बने और पूर्वी दिल्ली से भाजपा उम्मीदवार गौतम गंभीर के खिलाफ काफी गंभीर आरोप लगाये तो गौतम गंभीर ने बिना देर किये उन्हें मानहानि का नोटिस भेज दिया.
दरअसल गुरुवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर के मनीष सिसोदिया और आतिशी ने गंभीर पर आरोप लगाये कि वो आतिशी के बारे में आपत्तिजनक पर्चे छपवा कर बंटवा रहे हैं. प्रेस कांफ्रेंस में पर्चे को पढ़ते हुए आतिशी रो पड़ी। उस पर्चे में केजरीवाल को कुत्ता केजरीवाल, मनीष सिसोदिया के लिए कंजर सिसोदिया और आतिशी को मिक्स्ड ब्रीड (मिश्रीत नस्ल) का बताया गया था. इसके अलावा पर्चे में आतिशी के चरित्र पर भी सवाल उठाये गए थे.

गौतम गंभीर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया साथ ही इसका इलज़ाम केजरीवाल पर डाल दिया कि वो चुनाव जीतने के लिए अपनी ही पार्टी के महिला कार्यकर्ता को बदनाम कर रहे हैं.
गंभीर ने शुक्रवार को भी केजरीवाल पर अपना हमला जारी रखा. गंभीर ने ट्वीट किया – आज अच्छे लोग राजनीति में नहीं आना चाहते हैं, क्योंकि वह अरविंद केजरीवाल जैसे लोगों के सामने खड़े नहीं होना चाहते हैं. केजरीवाल लगातार संक्रीण मानसिकता की राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं.

आतिशी के आरोपों के बाद ट्विटर पर हैश टैग आई स्टैंड विथ आतिशी ट्रेंड कर रहा था लेकिन उसके बाद हैश टैग आई स्टैंड विथ गंभीर ट्रेंड करने लगा और लोग खुल कर गंभीर के समर्थन में आने लगे. क्रिकेट में गंभीर के साथी रह चुके हरभजन सिंह भी खुल कर गम्हीर के समर्थन में आ गए. हरभजन ने गंभीर के समर्थन में tweet करते हुए लिखा – गंभीर के खिलाफ ऐसे आरोपों को सुनकर सन्न हूँ . गंभीर किसी भी महिला के बारे में ऐसी बातें नहीं कर सकते. कोई हारे या जीते फर्क नहीं पड़ता लेकिन गंभीर इन सब चीजों से ऊपर है. गंभीर की तरफ मानहानि केस के बाद आतिशी महिला आयोग में पहुँच गई .

अब सवाल ये उठता है कि जब उस कथित पर्चे पर किसी पार्टी, किसी नेता का नाम नहीं है, ना ही उस पर्चे पर उसे छपवाने वाले का नाम है तो आम आदमी पार्टी ये आरोप कैसे लगा सकती है कि ये पर्चे गंभीर ने छपवाए हैं? आम आदमी पार्टी और उसके लोगों के आरोपों पर इसलिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि अतीत में भी ये लोग चुनावों के वक़्त विपक्षियों पर ऐसे ही आरोप लगाते रहे हैं और अदालत में मानहानि का केस करने के बाद माफ़ी मांगनी पड़ी थी. ऐसे में केजरीवाल या उनकी पार्टी की तरफ से कोई आरोप लगाये जाते हैं तो उनपर शक होना लाजिमी है.

कब कब केजरीवाल को अपने लगाए आरोपों के लिए माफ़ी मंगनी पड़ी है

कपिल सिब्बल, नितिन गडकरी, अरुण जेटली और विक्रम मजीठिया वो नाम है जिन्होंने केजरीवाल के अनर्गल आरोपों पर मानहानि का केस किया तो केजरीवाल को माफ़ी मंगनी पड़ी थी . पंजाब विधानसभा चुनाव के वक़्त तो उन्होंने बिक्रम मजीठिया पर ड्रग्स बेचने का आरोप लगाया था और दावा किया था कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स डीलरों ने कई बार मजीठिया का नाम लिया है. लेकिन जब मजीठिया ने केजरीवाल को कोर्ट में घसीटा तो केजरीवाल को माफ़ी मांगनी पड़ी.
केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर अरविन्द केजरीवाल ने ई–रिक्सा के अलावा जमीन घोटाला का भी आरोप लगाया था. केजरीवाल को गडकरी को भारत का सर्वाधिक भ्रष्ट व्यक्ति बताया था और कहा था कि किसी भी कीमत पर माफ़ी नहीं मांगेंगे क्योंकि उनके आरोप सही है. लेकिन जब गडकरी ने मानहानि का केस किया तो केजरीवाल को माफ़ी मांगनी पड़ी.
केजरीवाल ने केन्द्रीय मंत्री अरुण जेटली पर DDCA में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे तब जेटली ने केजरीवाल पर 10 करोड़ के मानहानि का केस किया था. बाद में केजरीवाल को अपने आरोपों के लिए जेटली से माफ़ी मांगनी पड़ी थी.

अलग तरह की राजनीति करने का दावा करके राजनीति में कदम रखने वाले अरविन्द केजरीवाल ने अपनी नीतियों से अपनी विश्वसनीयता इतनी कम कर ली है कि उनको थप्पड़ पड़ने पर भी जनता कहती है कि ये उनका पब्लिसिटी स्टंट है. खैर गौतम गंभीर ने मानहानि काकेस तो कर ही दिया है. अब देखते हैं कि अरविन्द केजरीवाल उनसे माफ़ी कब मांगते हैं ?