16 मई 2014: 5 साल पहले आज के ही दिन उठी थी देश में मोदी के नाम की सुनामी

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साल 2014, तारीख थी 16 मई …. ये वो तारिख थी जिसने भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय लिख दिया. ये वो तारीख थी जिस दिन भारत ने एक नया नायक देखा था. उस नायक का नाम था नरेंद्र मोदी, जिसने देश को गठबंधन के मकर जल से निकालकर पूर्ण बहुमत की सरकार दी थी. जिसने भारत को अच्छे दिनों का सपना दिखाया था, जिसने नये भारत के निर्माण का भरोसा दिलाया था .

नरेंद्र मोदी अपने वादों और इरादों में कितने सफल हुए ये बहस का विषय हो सकता है लेकिन ये बहस फिर कभी. आज हम बात करेंगे उस ऐतिहासिक दिन 16 मई 2014 की जिस दिन नरेद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा ने 30 सालों बाद पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी .

16 मई 2014 को evm से एक ऐसी भगवा लहर निकली जिसने कई क्षत्रपों के किले को ध्वस्त कर दिया था. जिसने देश की राजनीति को ऐसा बदला कि भाजपा देश की सबसे बड़ी पार्टी बन गई और नरेंद्र मोदी- अमित शाह की जोड़ी सबसे ताकतवर जोड़ी. मोदी –शाह की जोड़ी ने देश को चुनाव लड़ने का नया तरीका बताया. ये वो तरीका था जिस पर मैनेजमेंट कॉलेजों में रिसर्च किया जा सकता है.

चुनाव से पहले देश में जो माहौल था उससे विश्लेषकों को उम्मीद तो थी कि 10 सालों से देश की सत्ता में बैठी कांग्रेस को हार झेलनी पड़ सकती है लेकिन उसकी हर इतनी भयानक होगी और भाजपा की जीत इतनी बड़ी .. इसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी . 16वीं लोकसभा के चुनाव 7 अप्रैल 2014 से 12 मई 2014 तक नौ चरणों में चले थे .. ये चुनाव देश के इतहास में सबसे लम्बा चलने वाला चुनाव था . 16 मई 2014 को जो परिणाम आए उसकी पटकथा तो 10 जून 2013 को ही लिखी जा चुकी थी जब भाजपा ने नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था. उस वक़्त देश कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के भ्रष्टाचारों से त्रस्त था, 10 सालों तक शासन करने के बाद तत्कालीन प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह सत्ता विरोधी लहर से लड़ रहे थे. कांग्रेस के सामने नेतृत्व का संकट भी था, रही सही कसर अन्ना के भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन ने पूरी कर दी .

प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होते ही नरेंद्र मोदी ने आक्रामक तरीके से चुनाव प्रचार चलाया और जब नतीजे आए तो भाजपा ने 31.1 प्रतिशत वोटों के साथ 282 सीटें हासिल की. जबकि कांग्रेस 19.3 प्रतिशत वोटों के साथ 44 सीटों पर सिमट गई. कई राज्यों में तो कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो गया. और वो मुख्य विपक्षी पार्टी बनने के लायक भी नहीं रही. उत्तर प्रदेश में तो जैसे चमत्कार हो गया . मोदी लहर के आगे राम लहर भी छोटी पड़ गई . भाज्पाने राज्य के 80 लोकसभा सीटों में से 71 सीटों पर कब्ज़ा जमाया जबकि समाजवादी पार्टी 5 और कांग्रेस 2 सीटों पर सिमट गई .बहुजन समाज पार्टी का तो सूपड़ा साफ हो गया .

पुरे उत्तर भारत ने मोदी को सत्ता के शिखर तक पहुंचाने के लिए दिल खोल कर भाजपा की झोली सीटों से भर दी . देश एक बार फिर लोकसभा चुनाव के दौर से गुजर रहा है . एक बार फिर भाजपा नरेंद्र मोदी के चेहरे को लेकर चुनाव मैदान में है. अब देखना ये है कि क्या इस बार भी 2014 जैसा करिश्मा होगा?