राजनीतिक दाव पेच के कारण इन फिल्मों को किया गया था बैन

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फिल्में समाज का आएना होती है…. फिल्मों में अक्सर वही दिखाया जाता है  जो हमारे आस पास घटित होता है उमें ही कुछ तड़का मिला कर हमारे सामने पेश किया जाता है,…

हमारे देश में फिल्मों का एक अलग महत्त्व है… और अलग अलग मायने है … किसी के लिए फिल्म खली समय का साथी होता , किसी के लिए आदत तो किसी के लिए ज़िन्दगी ;…..

खैर फिल्मों को देखने में जितना मज़ा आता है … उससे कहीं ज्यादा मेहनत इसको बनाने में लगता है …. और फिर इसे release करने में … लेकिन कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो release नहीं  हो पाती या फिर बैन  कर दी जाती हैं… कई फिल्में इसके कंटेंट के कारण बैन हो जाती…

वैसे हमारे देश में ज्यादातर अश्लील कंटेंट या दृश्य के लिए फिल्मों को बैन किया जाता है … लेकिन कई ऐसी फिल्में भी रहीं है जिनमें पोलिटिकल कंटेंट के कारण उन्हें बैन किया गया है….

तो चलिए उन फिल्मों की बात करते हैं जिहें एक ज़माने में बैन किया गया था क्योंकि उन्मीं पोलिटिकल कंटेंट था और कही न कहीं वह सरकार के खिलाफ थी ….

तो शुरू से शुरू करते है ….

आज़ादी के बाद जो पहली फिल्म बैन हुई थी …. नाम था नील आकाशेर नीचे… 1958 में बनी थी यह फिल्म… इसे मृणाल सेन ने डायरेक्ट किया था….. महादेवी वर्मा की कहानी ‘चीनी भाई’ पर आधारित थी यह फिल्म….. ब्रिटिश राज के आखिरी दिनों की कहानी को बयान करती थी….. 1930 के बाद के जो कलकत्ता था उसकी कहानी थी यह…. एक  गरीब चाइनीज़ फेरीवाला वांग लू की कहानी है इसमें…..जो कलकत्ता की गलियों में चाइना सिल्क बेचता है……. मजबूर बच्क्ग्रौन्द्द से आया होता है……

यह फिल्म लोगों को काफी पसंद आए थी.. उस वक्त जो प्रधानमंत्री थे जवाहरलाल नेहरु … उन्होनें भी इस फिल्म की काफी तारीफ़ की थी… लेकिन जब इंडिया चाइना बॉर्डर पर तनाव बढ़ा तो इसपर रोक लगा दी गई थी… फिल्म में भारत की अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई और 1930 के दौर में चीनी लोगों की साम्राज्यवादी जापान के अतिक्रमण की लड़ाई को एक ही दिखाने की कोशिश की गई थी…… बाद में संसद में कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद हीरेन मुखर्जी ने इसे लेकर टिप्पणी की. ….नेहरू और रक्षा मंत्री वीके कृष्णा मेनन वहीं थे….. इन्होंने बाद में फिल्म पर से बैन हटवाया….. ये बैन दो महीने चला था..

इस लिस्ट में एक फिल्म ऐसी है जो 1977 में आए थी… काफी हिम्मती फिल्म थी वो.. नाम था उसका किस्सा कुर्सी का…  इसे अमृत नाहटा ने डायरेक्ट किया था…..नाहटा खुद इंडियन नेशनल कांग्रेस में थे……  यह कहानी गंगू नाम के एक इंसान की है… जो जनता को मुर्ख बना कर राष्ट्रपति बन गया था ….और देश पर तानाशाही करता था ….इस फिल्म में सीधे आलोचना इंदिरा सरकार पर थी….. इसमें संजय गांधी की मजाक भी उड़ाई गई थी जो ऑटो-उद्योग में अपने फैसलों को लेकर चर्चा में थे….

इस फिल्म को 1975 में सेंसर बोर्ड भेजा गया… फिर निर्माता को बोर्ड द्वारा नोटिस भेजी गई और इसके 51 सीन्स पर आपत्ति जताई गई… फिर इमरजेंसी का दौर शुरू हो गया… फिल्म पर बैन लगा दी गई..

फिर संजय गांधी ने इसके सारे प्रिंट गुड़गांव की मारुति फैक्ट्री में मंगवाए और जला दिए…… मामले की जांच हुई 1977 में… इसके लिए कमीशन बैठा……संजय ने फिल्म के नेगेटिव भी जला दिया थे और ये अपराध था….. इनके खिलाफ केस 11 महीने चला… संजय और अन्य नेता वी.सी.शुक्ला को जेल की सजा सुनाई भी गई. बाद में फैसला पलट दिया गया…..हालांकि मनोहर सिंह, शबाना आज़मी, सुरेखा सिकरी, राज बब्बर ने फिल्म में काम किया था….

2005 में एक फिल्म आए थी…  सोनिया… यह फिल्म इटली की मूल निवासी और भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की बहू की कहानी थी… इन फिल्म में सोनिया गाँधी के जीवन से आधारित हर तथ्य को दिखाया गया… आम भाषा में कह लीजिये उनकी बायोपिक थी… फिल्म में कोई ख़ास कलाकार नहीं थे… साधारण सी फिल्म थी … लेकिन सेंसर ने इसपर रोक लगा दिया था… निर्माताओं को सोनिया गाँधी से परमिशन  लेने की हिदायत दी थी …

पूरे पांच साल धक्के खाने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने इसे release करने की अनुमति दे दी थी….

नंदिता दास ने एक फिल्म डायरेक्ट की थी…. फिराक… 2008 में बनी थी यह फिल्म …. इस फिल्म की  कहानी 2002 के गुजरात दंगों के एक महीने बाद की है……… जहां  अच्छे, बुरे हर तरह के लोग हैं और उनकी लाइफ में क्या फर्क पड़ा है…….. नसीरुद्दीन शाह, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, रघुवीर यादव, शहाना गोस्वामी, दीप्ति नवल, परेश रावल, दिलीप जोशी ने इसमें प्रमुख रोल किए थे…… गुजरात में ये फिल्म रिलीज नहीं हुई थी….. कारण ये बताया गया कि वितरक लोग सिनेमाघर मालिकों से ज्यादा पैसा मांग रहे थे, जबकि निर्माताओं के मुताबिक ऐसा कुछ नहीं था…. ये अघोषित बैन कहिन कही राज्य में शांति बनाए रखने के लिए था…

1975 में गुलज़ार के निर्देशन में एक फिल्म बनी थी आंधी …. ये फिल्म रिलीज हो गई थी  और 26 हफ्ते चली भी थी लेकिन अचानक  इसे बैन कर दिया गया था…. संजीव कुमार और सुचित्रा सेन ने इसमें लीड रोल निभा रहे थे…. सुचित्रा ने एक राजनेता आरती देवी का किरदार किया था जिसे प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जीवन पर आधारित बताया गया….. यहां तक कि फिल्म के प्रचार के लिए पोस्टरों पर ये भी लिखा गया कि अपनी प्रधान मंत्री को देखने थियेटर आइए…….. इसे थियेटरों से हटाया गया तब इमरजेंसी भी लग गई थी……. 1977 में आम चुनाव हुए और नई सरकार बनी तब इसे फिर से रिलीज किया गया……..