एक्शन में आई मोदी सरकार, कोरोना से निपटने के लिए बनाया तीन स्तरीय प्लान

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पीएम मोदी ने जब देश में 21 दिनों का लॉकडाउन लागू किया था तब उम्मीद थी कि कोरोना का संक्रमण फैलने से पहले रोका जा सकेगा. लेकिन कुछ लोगों की जिद और बेवकूफी ने पीएम मोदी की उम्मीदों और कोशिशों को पतीला लगा दिया. देश में कोएओन पॉजिटिव केस की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. अब इससे निपटने के लिए एक तरफ तो मोदी सरकार लॉकडाउन बढाने पर विचार कर रही है वहीँ दूसरी ओर एक तीन स्तरीय प्लान भी बनाया गया है जिसके जरिये कोरोना से निपटा जाएगा.

केंद्र की मोदी सरकार ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए राज्यों को पैकेज जारी किया है. इमरजेंसी रिस्पॉन्स एंड हेल्थ सिस्टम प्रेपेअरनेस नाम का ये पैकेज पूरी तरह से केंद्र की ओर से फंडेड है. कोरोना एक ऐसी बिमारी है जो लोगों के संपर्क में आने से फैलता है. इसलिए केंद्र का अनुमान है किकोरोना के खिलाफ लड़ाई लंबी चलेगी. इसलिए इस लड़ाई को तीन चरणों में लड़ने की योजना बनाई गई है. ये तीन चरण इस प्रकार हैं. पहला चरण- जनवरी 2020 से जून 2020. दूसरा चरण-जुलाई 2020 से मार्च 2021 तक और तीसरा चरण-अप्रैल 2021 से मार्च 2024 तक.

पहले चरण में सरकार आइसोलेशन ब्लॉक बनाने, वेंटिलेटर की सुविधा के ICU बनाने, Covid-19 अस्पताल विकसित करने, , पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट्स, N95 मास्क- वेंटिलेटर्स की उपलब्धता पर फोकस करेगी. कोरोना ने सरकार को आगाह कर दिया है कि हमें अपनी तैयारियों कको उस अनुरूप बनाना पड़ेगा कि जब कोई वैश्विक महामारी दस्ता दे तो हम उससे निपट सके और हमारे पास अपने लोगों को बचाने के लिए तैयारियां पूरी हो.

केंद्र सरकार ने जो फंड जारी किया है उसका उपयोग अस्पतालों, शहरों, एम्बुलेंसों और सार्वजनिक स्थानों के सेनीटाईजेशन में किया क्जायेगा ताकि इस वायरस के फिर से सर उठाने की साड़ी उम्मीदों को ख़त्म किया जा सके. सरकार लोगों को जाग्रुक्क करने पर भी ध्यान देगी. ताकि अगर दुबारा इस तरह की स्थिति आये तो लोग तैयार रहें. कोरोना के वक़्त देखा गया कि लोगों में जागरूकता की कमी थी. लोग जहाँ थे वहीँ रहने की बजाये अपने अपने गाँवों की ओर पलायन करने लगे जिससे संक्रमण और फैलने का खतरा बढ़ गया.