पीएम मोदी से मिले शरद पवार के मिलते ही अन्दर से आने लगी इस डील की खबरें

2194

अभी तक महाराष्ट्र में शिवसेना अपनी सरकार बनाने के लिए एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर खिचड़ी पका रही थी लेकिन अब महाराष्ट्र में चूल्हा और हलवाई दोनों बदल गए हैं और बिरयानी पकाई जाने लगी है, जिसकी चर्चा दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक के सियासी गलियारों में खूब हो रही है. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आज संसद में देश के दो बड़े नेताओं पीएम मोदी और शरद पवार की मुलाक़ात हुई. ये मुलाक़ात करीब आधे घंटे तक चली.

यूँ तो कहा जा रहा है कि ये मुलाक़ात महाराष्ट्र में किसानों की समस्या पर बात करने के लिए हुई लेकिन सूत्रों से जो खबरें छन छन कर आ रही है उसके मुताबिक़ महाराष्ट्र में भाजपा और एनसीपी की सरकार बन सकती है और इसके बदले में एनसीपी को केंद्र में तीन मंत्री पद मिल सकते हैं. लेकिन बात यहीं ख़त्म नहीं होती. पवार और पीएम मोदी की मुलाक़ात के बाद ये खबर भी दिल्ली कि हवाओं में तैरने लगी कि भाजपा ने उन्हें 2022 में राष्ट्रपति पद का भी ऑफर दिया है. अगर ये वाकई होने जा रहा है तो शिवसेना के साथ वो वाली बात हो गई कि चौबे चले छब्बे बनने, दूबे बन कर लौटे.

ये सब कुछ अचानक नहीं हुआ बल्कि इसकी तैयारी तो उसी दिन कर दी गई थी जब संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हुआ था. राज्यसभा के 250वें सत्र को संबोधित करते हुए जैसे पीएम मोदी ने एनसीपी की तारीफ़ की तो सबके कान खड़े हो गए. इस तारीफ़ के बाद शरद पवार और सोनिया गांधी आपस में मिले लेकिन बाहर निकल कर शरद पवार ने ये कह कर शिवसेना के पैरों तले जमीन खिसका दी कि सरकार बनाने के सम्बन्ध में कोई बात नहीं हुई. अभी तो उनके पास 6 महीने का वक़्त है. उन्होंने तो ये तक कह दिया कि कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का भी कहीं कोई अस्तित्व नहीं है.

मंगलवार को शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा था कि शरद पवार को समझने के लिए 100 जन्म लेने पड़ेंगे. लेकिन लगता है जिसे समझने में शिवसेना को 100 जन्म लेने पड़ेंगे उसे पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी चंद दिनों में समझ गई. संजय राउत खुद को शिवसेना का अमित शाह बनाना चाहते थे लेकिन वर्तमान हालातों को देख कर लगता है कि वो शिवसेना के शकुनी बन गए हैं जिसने मातोश्री के रौब की नींव हिला दी.

मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक़ एनसीपी के सांसद शिवसेना के साथ जाने की बजाये भाजपा के साथ जाने में फायदा देख रहे हैं. उन्हें समझ आ रहा है कि कांग्रेस की हालत ऐसी नहीं कि वो एनसीपी के कुछ काम आ सके. ऐसे में अगर एनसीपी भाजपा के साथ जाती है तो राज्य के साथ साथ केंद्र में भी भागीदारी मिल जायेगी. पार्टी के कई नेता इसके लिए अजित पवार से बात भी कर रहे हैं.

तो अब ऐसा लग रहा है कि दिल्ली में जो बिरयानी पक रही है उसकी खुशबू से मातोश्री के दीवारों की भी नींद उड़ गई है. दिल थम कर बैठिये क्योंकि ना सिर्फ शरद पवार को बल्कि मोदी और शाह की जोड़ी को भी समझने में 100 जन्म लग जायेंगे.