लद्दाख में पीएम मोदी ने एक तीर से साधे कई निशाने, पीएम मोदी के गर्जन की गूँज बीजिंग से वाशिंगटन से सुनाई देगी

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चीन के साथ तनाव को लेकर पीएम मोदी ने एक चुप्पी साध रखी थी. लेकिन अचानक लेह पहुँच कर उन्होंने सबको चौंका दिया. पीएम मोदी न सिर्फ निमू स्थित फॉरवर्ड पोस्ट पर पहुंचे बल्कि उन्होंने जवानों को संबोधित करके चीन को साफ साफ़ चेतावनी भी दी कि कोई दुस्साहस करने की कोशिश न करे. उनके दौरे को लेकर इतनी गोपनीयता बरती गई कि सुबह 7 बजे वो लेह पहुंचे और 10 बजे मीडिया को ये जानकारी हुई. लेकिन पीएम मोदी अचानक लेह क्यों पहुंचे? क्या है पीएम मोदी का मास्टर प्लान ? आइये जानते हैं.

लद्दाख पहुँच कर पीएम मोदी ने खुद मोर्चा संभाला और जवानों का हौसला बढ़ाया. लद्दाख से जब पीएम मोदी गरजे तो उन्होंने एक बार भी चीन का नाम नहीं लिया लेकिन बिना नाम लिए भी उन्होंने तीर सही निशाने पर लगाया. लद्दाख पहुँच कर उन्होंने साफ़ साफ़ कहा ‘लेह, लद्दाख से लेकर करगिल और सियाचिन तक, यहां की बर्फीली चोटियों से लेकर गलवान घाटी की ठंडे पानी की धारा तक. हर चोटी, हर पहाड़, हर जर्रा-जर्रा, हर कंकड़, पत्थर भारतीय सैनिकों के पराक्रम की गवाही दे रहा है.

पीएम मोदी ने लद्दाख में जो गर्जन किया उसकी गूँज बीजिंग तक सुनाई दी. पीएम मोदी ने अपने पूरे संबोधन में चीन का नाम नहीं लिया लेकिन उनके शब्द इतने मारक थे कि चीन को चोट महसूस हुई और वो तिलमिला गया. तभी तो जब पीएम लद्दाख में थे तभी चीन के विदेश मंत्रालय का बयान भी आ गया कि दोनों पक्षों को कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे हालात बिगड़े.

पीएम मोदी की यात्रा का रणनीतिक महत्त्व समझिये. लेह पहुँचने से एक दिन पहले ही पीएम मोदी रूस के राष्ट्रपति पुतिन से टेलीफोन पर बात कर एक बड़े रक्षा सौदे को अंजाम दे चुके थे. रूस से 33 नए लड़ाकू विमान खरीदने की मंजूरी दी जा चुकी थी. चीनी ऐप्स पर बैन को लेकर अमेरिका की प्रतिक्रिया भी आ गई थी और उसने भारत के कदम की जमकर तारीफ़ की थी. अमेरिकी सीनेट में भारत को पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान दिए जाने के लिए एक बिल पेश किया जा चुका था ताकि भारत और अमेरिका के बीच उसी तरह के रक्षा सम्बन्ध हो जिस तरह के इजरायल और अमेरिका के बीच हैं. भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पहली बार हांगकांग को लेकर बयान दिया और चीन को लताड़ लगाई थी. भारत और जापान की नौसेना ने संयुक्त युद्धाभ्यास किया था. फ्रांस ने राफेल की पहली खेफ भेजने का ऐलान कर दिया. थोडा पीछे जाएँ तो पीएम मोदी और ट्रम्प के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई थी और उसके बाद अमेरिका में एशिया में अपने मित्र देशों की मदद के लिए सेना तैनात करने का ऐलान किया. अगर उससे एक महीना पहले जाएँ तो भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक दुसरे के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने का ऐतिहासिक समझौता हुआ था ताकि हिन्द महासागर में चीन की घुसपैठ को रोका जा सके.

यूँ कहें कि पीएम मोदी लेह लदाख पहुँचने से पहले चीन की घेराबंदी हो चुकी थी और वो कितना तिलमिलाया हुआ है ये ग्लोबल टाइम्स की खबरें पढ़ कर समझा जा सकता है. पीएम मोदी ने आज लद्दाख से जो सन्देश दिया उसकी गूंग सिर्फ बीजिंग तक ही सिमित नहीं रहेगी बाकि इसकी गूँज टोक्यो, वाशिंगटन, पेरिस, केनबरा, ताइपेई तक सुनाई देगी. दुनिया एक नए भारत को देखेगी जो विस्तारवाद में अंधे हो चुके चीन को आँख में आँख दाल कर काबू कर सकता है. दुनिया एक नए भारत को देखेगी तो एशिया में चीन को चुनौती दे सकता है. दुनिया एक नए भारत को देखेगी जो चीन को धुआं धुआं कर सकता है.