84 साल पुराना सपना हुआ सच, कोसी महासेतु का उद्घाटन कर पीएम मोदी ने मिथिलांचल और कोसी को दिया यादगार तोहफा

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गजब किया तेरे वादें पे ऐतबार किया, तमाम रात इस दिन का इंतजार किया.
ये तमाम रातें अगर 84 साल की मुक्कमल रातें हो और इंतज़ार अगर बिहार के कोसी महापुल हो तो आज ये इंतज़ार पूरा हुआ. देश को आज़ाद हुए 74 साल हो गए. आज़ादी के 10 साल पहले से ही जो सपना देखा जा रहा था उसकी सुध लेने आजतक कोई सामने नही आया था. लेकिन आज उस महापुल का उद्घाटन हुआ है. बिहारियों को एक ऐसी सौगात मिली है जिसको देखने लिए कई पीढियां खप गईं. ये बिहार के लोगों के लिए किसी राम मंदिर से कम नही है. ये एक नए बिहार की शुरुआत भी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बिहार वासियों के 84 सालों के इंतज़ार को ख़त्म कर दिया. 84 साल पहले 1934 में आये भूकंप में कोसी नदी पर बना पुल ध्वस्त हो गया था जिसके कारण कोसी क्षेत्र का मिथिलांचल से संपर्क टूट गया था. आज पीएम मोदी ने कोसी नदी पर 516 करोड़ रूपए की लगत से बने रेल पुल का उद्घाटन कर 84 साल पहले तूते४ संपर्क को फिर से जोड़ दिया. इस रेल पुल का शिलान्यास 17 साल पहले 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था. वाजपेयी ने मिथिलांचल और कोसी के दिलों के तार को जोड़ने का जो सपना देखा था. वो आज सच हो गया.

बिहार का शोक कहे जाने वाले कोसी नदी पर बने इस 1.9 किलोमीटर लम्बे इस पुल पर ट्रेनों का परि’चा’ल’न शुरू होने के बाद सबसे ज्यादा लाभ दरभंगा, मधुबनी, सुपौल और सहरसा जिले में रहने वालों को होगा. इस रेल पुल के शुरू होते ही निर्मली से सरायगढ़ की जो दूरी 298 किलोमीटर है वो दूरी घटकर महज 22 किलोमीटर रह जाएगी. पहले निर्मली से सरायगढ़ तक के सफर के लिए लोगों को दरभंगा-समस्तीपुर-खगड़िया-मानसी-सहरसा होते हुए 298 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती थी.

अंग्रेजों ने साल 1887 में निर्मली और भपटियाही (सरायगढ़) के बीच मीटर गेज लिंक बनाया गया था, जो 1934 में विनाशकारी भूकंप की वजह से तबाह हो गया था. जिसके बाद कोसी और मिथिलांचल दो भागों में बंट गया था. कोसी महासेतु का उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अटल जी की सरकार जाने के बाद इस प्रोजेक्ट की रफ्तार कम हो गई. अगर दूसरी सरकार को बिहार के लोगों की फि’क्र होती और जो लोग तब रेल मंत्री थे उन्हें अगर चिंता होती तो काम पहले ही हो जाता. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और आज ये काम दृढ़ निश्चय और नीतीश जैसा साथी के होने से ही सब कुछ संभव हुआ है.

कोसी महासेतु के अलावा पीएम मोदी ने रेलवे से संबंधित 12 अन्‍य परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया. इसमें किउल नदी पर एक रेल ब्रिज, दो नई रेल लाइनें, पांच विद्युतीकरण से संबंधित परियोजनांए, एक इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव शेड और बाढ़ व बख्तियारपुर में तीसरी रेल लाइन परियोजना भी शामिल है. प्रधानमंत्री ने सहरसा-असनपुर कुपहा रेल सेवा को सुपौल स्टेशन से हरी झंडी दिखाई. इसके साथ सुपौल, अररिया और सहरसा जिले के लोगों की कोलकाता, दिल्ली और मुंबई जैसे महानगारों के लिए लंबी दूरी की यात्रा भी आसान हो गई.

प्रधानमंत्री ने हाजीपुर-सुगौली नई रेल लाइन के हाजीपुर से वैशाली तक के रेलखंड का उद्घाटन किया. पूर्व-मध्य रेलवे की इस योजना के तहत हाजीपुर से वैशाली तक रेल लाइन के साथ ही पांच रेलवे स्टेशन भी बन कर तैयार है और वैशाली से सुगौली खंड का काम तेजी से प्रगति पर है. प्रधानमंत्री मोदी ने मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी, समस्तीपुर-दरभंगा-जयनगर, समस्तीपुर-खगड़िया, कटिहार-न्यू जलपाईगुड़ी और भागलपुर-शिवनारायणपुर रेलखंडों की विद्युतीकरण परियोजनाओं का उद्घाटन किया. प्रधानमंत्री ने इसके अलावा बरौनी लोको शेड का भी उद्घाटन किया.

आज ही पीएम मोदी ने इस्लामपुर-तिलैया नई रेल लाइन पर ट्रेनों के परिचालन को हरी झंडी दिखाई. पूर्व-मध्य रेलवे के दानापुर मंडल के अंतर्गत इस्लामपुर-नटेसर के बीच रेलवे लाइन के साथ विद्युतीकरण कार्य भी पूरा हो चुका है.