UN में पीएम मोदी और इमरान का भाषण सुन पता चल गया, कौन राजा भोज और कौन गंगू तेली?

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शुक्रवार को यूनाइटेड नेशन के 74वें अधिवेशन को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान दोनों ने संबोधित किया. पीएम मोदी ने 17 मिनट तक भाषण दिया जबकि इमरान खान तय समय सीमा से कहीं अधिक 56 मिनट तक बोले. चूँकि पहले पीएम मोदी का संबोधन था और उसके बाद इमरान खान को बोलना था इसलिए सबकी नज़रें इस बात पर टिकी थी कि पीएम मोदी क्या बोलेंगे? क्या वो कश्मीर का जिक्र करेंगे? क्या वो पाकिस्तान का जिक्र करेंगे?

प्रधानमंत्री ने बोलना शुरू किया तो क्लाइमेट चेंज से लेकर आतंकवाद और बुद्ध के शांति संदेशों से लेकर गरीबी उन्मूलन तक पर बात की. लेकिन पाकिस्तान और इमरान खान का जिक्र तक नहीं किया. ऐसा लगा जैसे उन्होंने दोनों को इग्नोर कर दिया हो. जबकि इमरान के 56 मिनट के भाषण में मोदी, इंडिया, कश्मीर और RSS और परमाणु युद्ध के अलावा और कुछ नहीं था.

पहले बात पीएम मोदी के संबोधन की. पीएम मोदी ने बेहद संयम और सूझ बूझ के साथ अपनी बात रखी. उन्होंने उन मुद्दों पर बात की जिससे दुनिया को फर्क पड़ता है. उन्होंने जलवायु परिवर्तन, अक्षय ऊर्जा, गरीबी और भारत के विकास जैसे व्यापक मुद्दों को दुनिया के सामने रखा. आतंकवाद पर भी बोले लेकिन पाकिस्तान का जिक्र किये बगैर. उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है कि आतंकवाद किसी एक देश के लिए बल्कि पूरे विश्व एवं मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।’

पीएम मोदी ने गांधी का जिक्र किया और बुद्ध का भी. भारत में हिंदी-तमिल की लड़ाई के बीच UN के मंच से उन्होंने तमिल कवी कणियन पूकुन्रनारका जिक्रकिया. स्वामी विवेकानंद के 125 साल पहले शिकागो में धर्म संसद में दिए संदेश का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा, ‘दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का आज भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए शांति और सौहार्द ही, एकमात्र संदेश है.’ कश्मीर का जिक्र न कर उन्होंने ये साफ़ कर दिया कि आर्टिकल 370 हटाना भारत का आन्तरिक मामला है.

अब बात इमरान खान के भाषण की. इमरान खान बोलने आये तो UN के मंच का इस्तेमाल भी अपने प्रोपगैंडा को फैलाने के लिए किया. शब्दों की मर्यादाएं लांघी और इस्लामिक आतंकवाद तक को जस्टिफाई कर दिया. 56 मिनट के भाषण में इमरान 40 मिनट भारत के खिलाफ ज़हर उगलते रहे.

कश्मीर पर पूरी दुनिया में अलग थलग पड़ चुके इमरान इतने बदहवास और घबराए हुए थे कि अपने भाषण में 10 बार मोदी का नाम लिया. 10 बार कश्मीर का जिक्र किया और 10 बार RSS का नाम लिया और आखिर में परमाणु हमले की धमकी भी दे डाली.

इमरान की बदहवासी का आलम देखिये कि कई बार उन्होंने प्राइम मिनिस्टर मोदी की जगह प्रेसिडेंट मोदी .. प्रेसिडेंट मोदी कह रहे थे. इमरान ने जो बातें भाषण में कही वो तो अपने ट्वीट में भी कहते रहते हैं फिर ओवर टाइम लेने की क्या जरूरत थी. इस्लामिक आतंकवाद को जस्टिफाई करते हुए इमरान ने कहा कि मुस्लिमों के साथ अन्याय हो रहा है, जिसके चलते वो हथियार उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस्लाम के नाम पर युवक हथियार नहीं उठा रहे हैं, बल्कि अन्याय के खिलाफ लड़ाई के लिए हथियार उठा रहे हैं.

वैसे इमरान के भाषण के दौरान ख़ुशी का माहौल तो कांग्रेस पार्टी के खेमे में भी खूब होगा. आखिर UN जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर इमरान खान ने उसका जिक्र जो किया था. RSS की बात करते हुए कांग्रेस और तत्कालीन गृह मंत्री के बयानों का सहारा लिया और हिन्दू आतंकवाद की जिक्र किया

खैर इमरान के जहरीले भाषण के बाद भारत ने राईट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया और उसके प्रोपगैंडा को ध्वस्त कर दिया. यूएन में भारत की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने राईट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर गंभीर सवाल उठाए. विदिशा मैत्रा ने कहा, “क्या पाकिस्तान इस तथ्य की पुष्टि करेगा कि वह आज, यूएन द्वारा घोषित किए गए 130 आतंकवादियों और 25 आतंकी संगठनों का घर है?” उन्होंने ये भी पूछा पाकिस्तान से कि क्या पाकिस्तान इस बात को मानेगा कि वह दुनिया की अकेली ऐसी सरकार है जो यूएन द्वारा प्रतिबंधित अल-कायदा और आईएसआईएस के एक आतंकवादी को पेंशन देती है.

उन्होंने पाकिस्तान को नसीहत देते हुए कहा,“क्या पाकिस्तान समझा सकता है कि क्यों यहां न्यूयॉर्क में उसके हबीब बैंक पर टेरर फाइनेंसिंग के लिए जुर्माना लगाया गया और फिर क्यों बैंक बंद करना पड़ा ? विदिशा में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार पर घेरते हुए कहा, “पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की तादाद आज महज 3 फीसदी रह गई है, जो कभी 1947 में 23 फीसदी थी. ईसाइयों, सिखों, अहमदियाओं, हिंदुओं, पश्तूनों, सिंधियों और बलूचों पर ईशनिंदा के कानूनों के जरिए अत्याचार किया जा रहा है और जबरन धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है.’

एक तरफ जहाँ पीएम मोदी का संबोधन एक वैश्विक लीडर की तरह था, उनके भाषण में दुनिया कि समस्याओं का जिक्र था वहीँ इमरान का भाषण सुनकर ऐसा लगा मानों वो पिछले 2 महीनों के अपने ट्विटर टाइम लाइन को पढ़ रहे हैं. उनके भाषण में खौफ का था. भारत से, भारत के पीएम से, एक सांस्कृतिक संगठन RSS से. उनके भाषण में बस मैं, मोदी, कश्मीर और RSS था.