किताब को लेकर हुआ बवाल तो नही गये पूर्व प्रधानमंत्री, “मनमोहन सरकार में सारी फाइलें 10 जनपथ होकर गुजरती थी”

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दस सालों तक देश के प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह को लेकर अभी भी खुलासे होते रहते हैं और खुलासे ऐसे जिनसे कांग्रेस की किरिकरी होती हैं..सिर्फ कांग्रेस ही नही बल्कि खुद प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह इन खुलासो की चपेट में आ जाते हैं….दरअसल शुक्रवार को पत्रकार और पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित कुलदीप नैयर की आखिरी किताब को लांच किया गया. इस किताब का नाम ‘On Leaders and Icons: From Jinnah to Modi’रखा गया है.
कुलदीप नैयर के इस किताब में कई ऐसे जिक्र हैं जो कांग्रेस की मुसीबत को और बढ़ा सकती हैं इस किताब के जरिये कुलदीप ने जिन्ना से लेकर प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल का जिक्र लोगों के सामने रखा है. अपने मृत्यु से तीन पहले ही कुलदीप नैयर ने इस किताब को पुब्लिसिंग के लिए भेजा था..इसके बाद शुक्रवार यानि 9 फ़रवरी को इस किताब को लांच किया गया.. बताया गया कि इस पुस्तक के विमोचन के मौके पर खुद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिहं आने वाले लेकिन वे नही आये….ना आने के पीछे का कारण जो बताया है वही इस किताब के विवादों से जुड़ने का भी कारण हो सकता है. बताया गया कि इस किताब में मनमोहन सिंह के कार्यकाल भी जिक्र हैं और लिखा गया है मनमोहन सिंह अपने सभी फाइलें 10 जनपथ यानि सोनिया गाँधी के पास भेजा करते थे. मतलब प्रधानमंत्री के पद मनमोहन सिंह जी सिर्फ नाम के लिए बैठे सारे फैसले सोनिया गांधी लेती थी.. अब इस बात को लेकर बवाल मच गया है.


वही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि ‘किताब के एक चैप्टर में मेरे बारे बात की गई है। पेज नंबर 172 पर मुझे संदर्भ मिला कि प्रधानमंत्री के मेरे कार्यकाल के चलते, सरकारी फाइलें सोनिया गांधी के आवास पर जाती थीं। यह बयान सच नहीं है, और कुलदीप ने कभी मुझसे इस बात की पुष्टि नहीं की। इसके चलते 8 फरवरी को किताब लॉन्चिंग कार्यक्रम में मुझे शामिल होने में शर्मनाक लगेगा.’
वहीँ इस पूरे मामले पर राजीव नैयर ने कहा कि मेरे पिता को विवादों को छेड़ना पसंद था और उन्होंने विवाद को जन्म दिया क्योंकि मूल रूप से डॉक्टर मनमोहन सिंह ने इस बात को स्वीकार किया था। मगर किताब पढ़ने के बाद उन्होंने इस बात से इनकार कर दिया’
हालाँकि इससे पहले भी यूपीए सरकार पर रिमोट की तरह काम करने के आरोप लग चुके हैं. कई किताबों और लेख जरिये यह बात कही गयी है कि मनमोहन सिंह की सरकार रिमोट कंट्रोल से चलती थी. जिसके चलते मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री रहते हुए भी कोई भी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नही थे. अब देखने वाली बात तो यह है कि इस किताब के बाद राजनीतिक गलियारे मने किस तरह की हलचल देखने को मिलती है.

लोकसभा चुनाव होने वाले हैं. सभी पार्टियाँ चुनाव से पहले वोटरों की लुभाने में लगी हुई हैं. अब देखने वाली बात तो यह है कि इस किताब का चुनाव पर कुछ फर्क पड़ता है या नही! इस किताब को लेकर कांग्रेस पार्टी पर हमला किया जाता है या नही! वैसे कांग्रेस सरकार की इस बात को लेकर काफी बवाल मचाया जा चूका है.