सोनिया गाँधी ने RCEP पर उठाये सवाल तो पियूष गोयल ने दिया मुंहतोड़ जवाब

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पीएम मोदी तीन दिनों के थाईलैंड दौरे पर हैं. इस दौरान वो 16 वें “आसियान” और14 वें RCEP समित में हिस्सा लेंगे. लेकिन भारत में RCEP को लेकर सियासी घमासान मच गया. कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने जहाँ RCEP की आलोचना की और इसे किसानों, छोटे दुकानदारों और उद्धामियों के खिलाफ बताया वहीँ उनके आरोपों पर पलटवार करने की जिम्मेदारी केन्द्रीय मंत्री पियूष गोयल ने उठाई. पियूष गोयल ने न सिर्फ सोनिया गांधी पर पलटवार किया बल्कि पूर्व की यूपीए सरकार को कटघरे में भी खड़ा कर दिया. पियूष गोयल ने सिलसिलेवार ट्वीट करके सोनिया गांधी के आरोपों की धज्जियाँ उड़ा दी.

लेकिन उससे पहले आपको ये बता दें कि RCEP है क्या? RCEP यानी रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकॉनोमिक पार्टनरशिप एक मुक्त व्यापार समझौता है. इस समझौते के लिए आसियान के 10 देशों ब्रूनेई, दारुस्ल्लम, कम्बोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम के अलावा 6 अन्य देश चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, जापान और न्यूजीलैंड के बीच साल 2013 से ही बातचीत चल रही है.

RCEP के अंतर्गत सभी 16 देशों के बीच एक एकीकृत बाजार बनाए जाने का प्रस्ताव है. जिससे इन देशों के उत्पादों और सेवाओं के लिए एक दूसरे देश में पहुँच आसान हो जायेगी, व्यापार की बाधाएं कम होगी और साथ ही निवेश, आर्थिक और तकनीकी सहयोग और विवाद समाधान को बढ़ावा मिलेगा. इस समझौते के 25 चैप्टर में से 21 चैप्टर को अंतिम रूप दिया जा चूका है. शेष चार चैप्टर के लिए बातचीत जारी है.

सोनिया गांधी ने जब RCEP को भारत के लिए खतरनाक बताया तो पियूष गोयल ने पलटवार करते हुए पूछा कि सोनिया गांधी RCEP को लेकर अचानक से जाग गई हैं लेकिन उस वक़्त कहा थी जब RCEP देशों के साथ व्यापार घाटा साल 2004 में 7 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2014 में 78 बिलियन डॉलर हो गया था.

उन्होंने यूपीए सरकार के दौर को याद दिलाते हुए सोनिया गांधी से पूछा कि साल 2011 -12 में उनकी सरकार ने भारत को चीन के साथ RCEP वार्ता के लिए मजबूर किया था उस वक़्त सोनिया गाँधी कहाँ थी? सोनिया गाँधी उस वक़्त कहाँ थी जब 2010 में आसियान देशों के साथ FTA पर हस्ताक्षर किये गए थे? जब साल 2010 में दखिन कोरिया, 2011 में मलेशिया और जापान के साथ FTA पर हस्ताक्षर किये गए उस वक़्त सोनिया गांधी कहाँ थी? उस वक़्त तो केंद्र में उनकी ही सरकार थी.

उन्होंने कहा कि आज सोनिया गांधी रो रही हैं कि RCEP से छोटे व्यापारी और किसान बर्बाद हो जायेंगे लेकिन सोनिया जी उस वक़्त कहाँ थी जब उनकी ही यूपीए सरकार ने आसियान देशों के लिए देश के 74 फीसदी बाजार को खोल दिया था. जबकि इंडोनेशिया जैसे अमीर देश ने भारत के लिए सिर्फ 50 प्रतिशत बाजार खोला था.

पियूष गोयल ने सवाल उठाये कि तब गरीब दुकानदारों और किसानों की कीमत पर अमीर देशों को रियायत देने के खिलाफ सोनिया गाँधी ने सवाल क्यों नहीं उठाया जबकि वो उस वक़्त अपनी सरकार की चेयरपर्सन थीं. पियूष गोयल ने सोनिया गांधी को याद दिलाया कि जब साल 2007 में यूपीए सरकार के दौरान भारत और चीन के बीच FTA को लेकर सहमती हुई तब सोनिया गाँधी ने क्यों नहीं बोला.

पियूष गोयल ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि पूर्व पीएम मनमोहन सिंह अपने इस अपमान के खिलाफ बोलेंगे. उन्होंने कहा कि RCEP के खिलाफ डर का महाल बनाया जा रहा है जबकि पीएम मोदी साफ़ कर चुके हैं कि इसमें भारत के फायदे का सौदा होगा.