यूपी की राजधानी लखनऊ के इस बड़े अस्पताल ने कोरोना जांच के लिए निकाली ये सस्ती किट, जानिए कितने में होगी कोरोना की जाँच

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यूपी में कोरोना को लेकर योगी सरकार ने अव्वल दर्जे का काम किया है. जिसकी वजह से आज यूपी के अंदर कोरोना मरीजो की संख्या बाकि प्रदेशो से कम है. लेकिन इन सबके बीच यूपी की राजधानी लखनऊ जहां पर कोरोना को लेकर एक अच्छा कदम उठाया है.

यूपी की राजधानी लखनऊ मे कोरोना की रोकथाम के लिए लखनऊ के संजय गांधी  स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआइ) ने कोविड-19 जांच की सस्ती किट तैयार की है. अभी तक कोरोना की जांच को लेकर प्राइवेट लैब में 4 हजार के आस पास खर्चा आता था. जिसके डर से लोग अपनी जांच नही करवाने जाते थे. इसको देखते हुए अब लखनऊ के अंदर पीजीआई ने बहुत कम पैसे में कोरोना की जांच की सुविधा शुरू करने का फैसला लिया है.

कोरोना की जांच महंगी होने के कारण लोग जांच करवाने से भागते थे और बाद में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव निकलने पर अस्पतालों को सील करने के साथ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को क्वारंटीन करना पड़ रहा है. इसकी देखते हुए पीजीआई ने लोग को राहत देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. ताकि अब लोग आसानी से अपनी जांच मात्र 500 रूपये में करवा सकेगें. जिसकी जांच करने के लिए प्राइवेट लैब 4 हजार रूपये के आस पास लेती थी.

पीजीआइ में मॉलीक्यूलर एवं बायोटेक्नोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. स्वाति तिवारी के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम ने कोरोना जांच में हो रहे खर्च को कम करने के साथ प्रभावी किट बनाने की दिशा में शोध कार्य शुरू किया था. इसी रणनीति के तहत कोरोना जांच की किट विकसित की गई. यह तकनीकी आरएनए आधारित है इसे सीधे मरीज के जांच के नमूने पर इस्तेमाल नहीं किया जाता है. मरीज के नमूने में से आरएनए निकालकर उसमें ही संक्रमण देखा जाता है. वैज्ञानिकों ने जांच तकनीकी का परीक्षण सिंथेटिक कोरोना आरएनए राइबो न्यूक्लिक एसिड पर किया जिसमें यह सफल रही है. इस किट से तीस मिनट में जांच की जा सकेगी और खर्च भी पांच सौ रुपए के करीब आएगा.

पीजीआई विभाग ने जो किट तैयार की है. उस किट के पेटेंट के लिए आवेदन किया है. पेटेंट के बाद किट की वैधता की जांच के लिए इंडियन काउंसिल फार मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा. अनुमोदन मिलने के बाद इस किट का व्यावसायिक इस्तेमाल हो सकेगें. जिससे आम लोगो को जांच करवाने में सहुलियत मिलेगी.