कौन है ये लोग जो इरफान खान की मौ’त का जश्न मना रहे हैं

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इरफ़ान खान के निधन से हर कोई स्तब्ध है. न सिर्फ एक बेहतरीन अभिनेता बल्कि एक बेहतरीन इंसान के तौर पर भी इरफान जो खाली स्थान छोड़ गए हैं वो शायद ही कभी भर सके. इरफ़ान भले ही अपने चाहने वालों को रुला कर चले गए लेकिन वो अपनी बेहतरीन अदाकारी और फिल्मों के जरिये हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे. लेकिन समाज में कुछ ऐसे लोग भी है जो इरफ़ान की मौ’त का जश्न मना रहे हैं. ये लोग इंसानियत के नाम पर क’लंक है. ये उसी बिरादरी के लोग है जिन्होंने सुषमा स्वराज की मौ’त पर जश्न मनाया था. जिन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की मौ’त पर जश्न मनाया था. ये वही लोग हैं जिन्होंने अरुण जेटली की मौ’त पर भी जश्न मनाया था. सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों को आसानी से पहचाना जा सकता है.

इरफ़ान खान मुसलमान थे. लेकिन एक प्रगतिशील मुसलमान थे. उन्होंने हमेशा क’ट्ट’रपंथ का विरोध किया. आ’तंक’वाद, कु’र्बानी, रोजा जैसे विषयों पर खुल कर अपनी बात रखते थे. उन्होंने बकरीद पर मासूम जानवरों की कु’र्बा’नी का विरोध किया था. उनका कहना था कि कर्मकां’ड के बदले दिल की भावना आपको अल्लाह तक पहुंचती है. इरफ़ान के विचार, उनकी बातें हर लिहाज से क’ट्टर’पंथियों के आडंबर पर चोट करने वाली थी इसलिए वो क’ट्टर’पंथि’यों के निशाने पर भी रहते थे. वही क’ट्टर’पंथी आज इरफ़ान की मौ’त का जश्न मना रहे हैं.

ट्विटर और फेसबुक पर आज आपको अनगिनत ऐसे पोस्ट दिख जायेंगे जिसमे कहा गया है कि इरफान रोजा रखने को मुर्खता कहता था और रमजान में ही उसकी मौ’त हो गई. कई पोस्ट में इरफ़ान के लिए भद्दी भद्दी गा’लि’यों का इस्तेमाल किया गया है. जो हम लिख भी नहीं सकते.

ऐसे लोगों को देख कर आपको घि’न्न आएगी. आप सोच में पड़ जायेंगे कि क्या ये वाकई इंसान हैं . कहने क ये खुद को शांतिप्रिय बताते हैं लेकिन ये है इनकी शांतिप्रियता की असलियत. ये उसी समुदाय के लोग हैं जो कभी डॉक्टरों पर प’त्थर’बा’जी करते हैं तो कभी पुलिस पर प’त्थर’बा’जी करते हैं. तो कभी मृत आत्मा के लिए गा’लियाँ और ज़’हर उगलते हैं.