राजनीति से ना जुड़े होने के बावजूद इन लोगों ने राममंदिर मामले में खूब बटोरी सुर्खियाँ

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राम मंदिर पर फैसला आ गया है. सालों से चली आ रही इस लड़ाई पर फैसला आने के बाद लोगों में ख़ुशी है और बड़े ही सम्मानपूर्वक लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है लेकिन इस लड़ाई और इस केस के चक्कर में ना जाने कितने लोग सुर्ख़ियों में आये है… चर्चा का केंद्र बिन्दू बन गये.. अयोध्या जमीन विवाद में राजनीति के साथ ब्यूरोक्रेसी और ज्यूडिशरी से जुड़े लोग भी चर्चा में रहे है. आइए जानते हैं उन गैर राजनीतिक चेहरों के बारे में जिन्होंने राम मंदिर विवाद मामले में अपना योगदान दिया है या फिर अहम् भूमिका निभाई है.

इस लिस्ट में सबसे पहला नाम है महंत रघुबीर सिंह का.. 1885 में सबसे पहले जिला अदालत में जिस शख्स ने राम चबूतरे पर छतरी लगाने की याचिका दायर की थी, उसका नाम महंत रघुबीर सिंह था. हालांकि कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी थी.

दुसरे नम्बर पर है गोपाल सिंह विशारद… इनके बारे में हमने अपने चैनल पर एक वीडियो बनायीं है आप उसमें अच्छे से समझ सकते है कि गोपाल विशारद ने पहली बार फैजाबाद सिविल कोर्ट में राम मंदिर में पूजा करने की अनुमति मांगी थी..हालाँकि विशारद के निधन के लगभग 33 साल बाद उन्हें अनुमति मिली है.विशारद के निधन के बाद उनके बेटे केस को बढाते रहे..

अगले नंबर पर है के पारासरन

92 साल के के पारासरन को लोग आज सलाम कर रहे है. इतनी अधिक उम्र में के दौरान आज भी पारासरन लगातार हुई सुप्रीम कोर्ट के सुनवाई में मौजूद रहे, के पारासरन ने सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान की ओर से पक्ष रखा.

के के नायर

फैजाबाद के जिलाधिकारी रहते हुए के के नायर के कार्यकाल में ही मस्जिद में मूर्तियाँ स्थापित की गयी थी.. के के नायर ने नेहरु जी के आदेश को भी मानने से इंकार कर दिया था. दरअसल जब नेहरू ने दोबारा मूर्तियां हटाने को कहा तो केके नायर ने सरकार को लिखा कि मूर्तियां हटाने से पहले मुझे हटाया जाए.

हाशिम अंसारी
बाबरी मस्जिद के लिए लड़ाई लड़ने वाले हाशिम अंसारी 60 साल तक इस लड़ाई को लड़ते रहे. हाशिम के निधन के बाद उनके बेटे इकबाल अंसारी इस केस को लड़ रहे थे. उन्होंने 1949 में पहली बार इस मामले में मुकदमा दर्ज करवाया था.

आरके सिंह

आरके सिंह को तो आप जानते ही होंगे… बीजेपी के सांसद और मंत्री भी है. जब लाल कृष्ण अडवानी ने सोमनाथ से रथ यात्रा की थी उस समय जब समस्तीपुर में इस अधिकारी ने अडवानी को गिरफ्तार किया था वो थे आर के सिंह.

इसके अलावा अडवानी को गिरफ्तार करने का जिम्मा एक और अधिकारी को दिया गया था जिनका नाम आईएएस अफ़जल अमानुल्लाह.. इन्होने अडवानी जी इको गिरफ्तार करने से इंकार कर दिया था. वो बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक सैयद शहाबुद्दीन के दामाद थे. अमानुल्लाह को लगा था कि उनके इस क़दम से ग़लत संदेश जा सकता है और समाज में तनाव बढ़ेगा.

न्यायाधीश केएम पाण्डेय

न्यायाधीश केएम पांडे वो शख्स थे जिन्होंने सुनवाई पूरी कर मंदिर का ताला खुलवाया था. उन्होंने सिर्फ एक महीने में सुनवाई कर 1 फ़रवरी 1986 ताला खोलने का आदेश दे दिया था.

तो ये थे वो लोग जिन्होंने राम मंदिर के मामले में राजनीति में ना होते हुए भी अपनी भूमिका को लेकर सुर्ख़ियों में रहे..