दो महीने पहले कर्मचारियों को निकालने वाली थी पारले जी, अब मुनाफा 15% बढ़ा

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अगस्त के महीने में एक खबर ने देश में तहलका मचा दिया था. खबर ये थी कि देश कि सबसे बड़ी बिस्कुट बनाने वाली कंपनी पारले आर्थिक नुक्सान से गुज़र रही है इसलिए 10 हज़ार कर्मचारियों की छंटनी करेगी. इस खबर के सामने आने के बाद कहा जाने लगा कि देश में इतनी मंदी है कि लोग 5 रुपये की बिस्कुट भी नहीं खरीद पा रहे.

लेकिन दो महीनों बाद ही हालात बदल गए. बिजनेस स्टैण्डर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक़ वित्तीय वर्ष 2018-19 में कंपनी का मुनाफा 15.2 फीसदी बढ़ा है. कारोबारी मंच टॉफलर के अनुसार पारले बिस्कुट को वित्त वर्ष 2018-2019 में 410 करोड़ रुपये नेट प्रॉफिट हुआ है जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी का प्रॉफिट 355 करोड़ रुपये था.

कंपनी के रेवेन्यु में भी 6.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वित्तीय वर्ष 2018-19 में कंपनी का रेवेन्यु 9030 करोड़ हो गया जो वित्ति वर्ष 2017-18 में 8,780 करोड़ रुपये था. उसी तरह दूसरे इनकम में कंपनी को 26 फीसदी का इजाफा हुआ है, जो 250 करोड़ तक पहुंचा है, इससे कंपनी की टॉप लाइन ग्रोथ बढ़ी है.

अगस्त महीने में जब ये खबर आई कि कंपनी बुरे दौर से गुजर रही है तो मीडिया रिपोर्ट्स में इसका ठीकरा GST पर फोड़ गया था. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि सरकार ने जब GST लागू किया तो 100 रुपये प्रति किलो कीमत वाले सभी बिस्कुटों को 18 फीसदी स्लैब में डाला गया. ऐसे में कंपनियों की लागत बढ़ गई. लिहाजा कंपनी को दाम बढ़ाना पड़ा और इससे बिक्री पर निगेटिव असर पड़ा और सेल्स घट गई. इंडस्ट्री ने बिस्कुट पर GST में कटौती कि मांग की थी लेकिन सितम्बर में हुई GST परिषद की बैठक में इस मांग को खारिज कर दिया गया था.

जब 10 हज़ार कर्मचारियों को निकालने की बातें हो रही थी तब भी बिस्कुट 18 प्रतिशत GST स्लैब में था और जब कंपनी को फायदा हुआ है तब भी बिस्कुट 18 प्रतिशत GST स्लैब में ही है. तो अब सवाल ये उठता है कि क्या वाकई GST की वजह से पारले नुकसान में चल रही थी या फिर ये सिर्फ मीडिया द्वारा गढ़ी गई कहानियां थी. सवाल ये भी है कि क्या दो महीने पहले लोगों ने बिस्कुट खाना बंद कर दिया था और अब अचानक से इतनी बिस्कुट खा गए कि कंपनी का प्रॉफिट बढ़ गया.