साधुओं की लिं’चिंग वाले वीडियो में दिखा कुछ ऐसा कि पुलिस पर उठने लगे सवाल, पुलिस ने साधुओं को…?

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महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की हुई लिं’चिंग से उद्धव सरकार सवालों के घेरे में है. सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि जब महाराष्ट्र कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित है और जब वहां लॉकडाउन लागू है तो फिर कैसे सैकड़ों की संख्या में लोग साधुओं को लिं’च करने के लिए इकट्ठे हो गए? सोशल मीडिया पर घटना के वायरल वीडियो से पुलिस पर भी सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि किस तरह बुजुर्ग साधु जान बचाने के लिए पुलिस के पीछे बार बार छुपते हैं लेकिन पुलिस हाथ छुड़ा कर उन्हें ह’त्या’री भीड़ को सौंप देती है. ऐसे में सवाल उठाना लाजिमी है कि क्या ये ये महज एक ह’त्या थी या एक सोची समझी सा’जिश थी. आज तक की एंकर श्वेता सिंह और अंजना ओम कश्यप ने भी वीडियो के इन दृश्यों को सामने रखते हुए पुलिस पर सवाल उठाये हैं.

सवाल तो उठना लाजिमी है . लॉकडाउन के बीच रात को 200 लोगों की उ’न्मादी भीड़ ला’ठी,डं’डों और रॉ’ड के साथ क्या तैयार बैठी थी साधुओं की ह’त्या के लिए? सवाल तो उन बॉलीवुड सेलेब्रिटीज पर भी उठ रहे हैं जो एक हफ्ते पहले तक उद्धव ठाकरे को बेस्ट CM बताते हुए ट्विटर पर PR चला रहे थे. अपने बेस्ट CM की असफलता देख सबको सांप सूंघ गया है.

सवाल तो उठेंगे ही और सवालों के घेरे में उद्धव ठाकरे आयेंगे ही. ना तो उनसे कोरोना संभल रहा और न ही क़ानून व्यवस्था. महाराष्ट्र कोरोना केस की संख्या में नंबर वन बना हुआ है. मुंबई भारत का वुहान बन चुका है और मुंबई के नजदीक ही रात में 200 की भीड़ इकट्ठी हो जाती है और पुलिस खुद सा’धुओं को ह’त्या’री भीड़ के हाथों सौंप देती है, जैसा कि वीडियो में दिख रहा है तो इसपर सवाल तो उठेंगे ही.

सवाल तो उठेंगे ही कि साधुओं की लिं’चिंग हो गई और वो भी उस राज्य में जहाँ कांग्रेस सत्ता में है क्या इसलिए राहुल गाँधी और प्रियंका गांधी ने आँखे मूँद रखी है. अगर ये घटना किसी भाजपा शासित राज्य में हुई होती और लिं’चिंग संतों की बजाये मौलवी की हुई होती तो अब तक राहुल और प्रियंका तां’डव कर रहे होते. लेकिन कहीं कोई शोर नही. शोर होगा भी क्यों? हिन्दू ही तो म’रा है, साधु ही तो म’रे हैं और वो वोटबैंक थोड़े ही होते हैं.