इसलिए विंग कमांडर अभिनंदन का बाल भी बांका नहीं कर सकेगा पाकिस्तान!

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27 जनवरी यानी कि आज भारतीय सीमा क्षेत्र में पाकिस्तान लड़ाकू विमानों ने घुसपैठ की. जवाबी कार्रवाई करते हुए भारत ने एक पाकिस्तानी फाइटर जेट को मार गिराया. लेकिन इस दौरान भारत के एक फाइटर प्लेन पर पाकिस्तान ने अटैक किया, और भारत के एक पायलट को बंधक बना लिया है..  बता दें कि पाकिस्तानी सेना ने एक वीडियो जारी कर यह दावा किया है कि एक भारतीय पायलट उनके कब्जे में है. जिसे उन्होंने पाकिस्तानी सीमा से गिरफ़्तार किया है. वीडियो में भारतीय वायु सेना की वर्दी में एक व्यक्ति दिखाई दे रहा है जिसकी आंखों पर पट्टी बंधी है. यह व्यक्ति ख़ुद को विंग कमांडर अभिनंदन बता रहा है. उसकी वर्दी पर अंग्रेजी में ‘ABHI’ भी लिखा हुआ है.

बता दें कि पायलट के साथ हुए पाकिस्तान में अमानवीय व्यवहार पर भारत ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है..  विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त को तलब कर कहा है कि भारतीय पायलट से अमानवीय व्यवहार जेनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन है. इसके साथी ही भारत ने कहा है कि वायुसेना के पायलट को कोई नुकसान नही पहुंचना चाहिए और आशा की है कि उनकी जल्द ही सुरक्षित वापसी होगी..

जिनेवा संधि के अनुसार, युद्धबंदियों पर या तो मुकदमा चलाया जाएगा या फिर युद्ध के बाद उन्हें लौटा दिया जाएगा. पकड़े जाने पर युद्धबंदियों को अपना नाम, सैन्य पद और नंबर बताने का प्रावधान किया गया है.

जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदी से कुछ पूछने के लिए उसके साथ जबरदस्ती नहीं की जा सकती. उनके खिलाफ धमकी या दबाव का इस्तेमाल नहीं हो सकता. पर्याप्त खाने और पानी का इंतजाम करना उन्हें बंधक रखने वालों की जिम्मेदारी होगी. उन्हें वही मेडिकल सुविधाएं भी हासिल होंगी जो भारत मुहैया करवाता है.

बहरहाल, इसका सीधा मतलब ये है कि हमारे पायलट जिसे पाकिस्तान ने बंधक बनाया है उसका वो बाल भी बांका नहीं कर पायेगा.

जिनेवा संधि का आमतौर पर मतलब दूसरे विश्वयुद्ध के बाद 1949 में तैयार किए गई संधियों और नियमों से है. इसका महत्वपूर्ण मकसद युद्ध के वक्त इंसानी मूल्यों को बनाए रखने के लिए कानून तैयार करना था.

आपको याद होगा कि 20 साल पहले करगिल युद्ध के समय पाकिस्तान ने भारत के एक फाइटर पायलट को गिरफ्तार करने में सफलता पाई थी. जिसका नाम के. नचिकेता था. लेकिन भारत ने उसे पाकिस्तान की चुंगल से सही सलामत वापस अपने देश ला दिया था.

बता दें कि 3 जून 1999, कारगिल युद्ध के दौरान IAF  के फाइटर पायलट के. नचिकेता को भारतीय वायु सेना की ओर से चलाए गए ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में MIG 27 उड़ाने का काम दिया गया था. उस समय नचिकेता की उम्र 26 साल थी. जहां नचिकेता ने दुश्मन के एकदम करीब जाकर 17 हजार फुट से रॉकेट दागे और दुश्मन के कैंप पर लाइव रॉकेट फायरिंग से हमला किया. लेकिन इसी दौरान उनके विमान का इंजन खराब हो गया.

जिसके बाद इंजन में आग लगने से MIG 27 क्रैश हो गया. हालांकि नचिकेता विमान से सुरक्षित बाहर निकलने में तो सफल रहे लेकिन उन्हें पाकिस्तानी सैनिकों ने अपने कब्जे में ले लिया था. लेकिन इसके बाद जो हुआ उसे भारतीय कूटनीति में सबसे सफल किस्सों में गिना जाता है. नचिकेता को भारत में वापस लाया गया था. और इस बार भी ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि विंग कमांडर अभिनंदन को भारत जल्द ही सुरक्षित लाया जाएगा ।