कंगाल पाकिस्तान के पास नहीं है कोरोना से लड़ने के लिए पैसे, अब इस संगठन के सामने फैलाई झोली

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पाकिस्तान जितने बुरे दौर से अब गुजर रहा है शायद ही कभी गुजरा हो. एक तरफ तो वो पूरी तरह से कंगाल हो चूका है, वहीं दूसरी तरह इस कंगाली के दौड़ में कोरोना ने उसपर हमला कर दिया. पकिअत्सं की हालत इतनी खस्ता है कि उसके पास कोरोना के मार से अपने नागरिकों को बचाने के लिए भी पैसे नहीं है. इस कारण उसने सार्क देशों से 3 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद मांगी है.

दुनिया भर के देशों के कर्जे के बोझ तले डूब चुके पाकिस्तान को उम्मीद थी कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) उसे बेलआउट पैकेज की तीसरी क़िस्त के रूप में 43 करोड़ डॉलर जारी करेगा तो उसकी मदद हो जायेगी. लेकिन IMF ने तीसरी क़िस्त जारी करने से साफ़ मना कर दिया. अमीर देश खुद कोरोना से लड़ रहे हैं ऐसे में पाकिस्तान को सार्क की याद आई.

पाकिस्तान कितना मतलबी है और सार्क उसके लिए कितना महत्त्व रखता है इस बात से समझिये कि जब पीएम नरेंद्र मोदी ने सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों की विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बैठक रखी थी तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने खुद शामिल होने की बजाये अआपना एक प्रतिनिधि भेज दिया था. कोरोना के ऊपर हो रही बैठा में पाकिस्तान ने अपनी मक्कारी दिखाते हुए उसमे भी कश्मीर का राग अलाप दिया था. अब जब किसी ने उसे पैसे नहीं दिए तो उसे सार्क की याद आई.

पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए कोविड-19 आपातकालीन फंड का गठन किया था. सार्क में शामिल लगभग सभी देशों ने उसमे कुछ न मच योगदान दिया. लेकिन पाकिस्तान को अब तक बस माँगना ही आया है तो उसने उस फंड में से भी पैसे मांगने शुरू कर दिए. वैसे मदद के नाम पर मिले पैसों का पाकिस्तान किस तरह से उपयोग करता है ये किसी से छुपा नहीं है.

विदेश विभाग की तरफ से जारी बयान में कहा गया, ‘पाकिस्तान के फैसले को सार्क सेक्रेटिएट को बताते हुए यह कहा गया है कि उनके अधीन फंड की सारी प्रक्रिया हो और इस फंड के उपयोग की औपचारिकताएं सार्क चार्टर के मुताबिक सदस्य देशों के विचार-विमर्श के जरिए किया जाना चाहिए.’