आखिर क्यों पाकिस्तानी चैनल बरखा दत्त और राजदीप सरदेसाई के विचारों का हवाला देते हैं..

पाकिस्तान के दावे पर पुष्टि करते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने बुधवार शाम एक बयान जारी किया था … और बयान में कहा गया कि हमारा एक पायलट पाकिस्तान की कस्टडी में है.. हम पाकिस्तान से मांग करते हैं कि वह इंडियन एयरफोर्स के उस पायलट को तुरंत सही सलामत वापस भेजें… भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान यह सुनिश्चित करे कि सैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचे…और यहाँ आपको ये भी बता दें कि जेनेवा समझौते के तहत पाकिस्तान भारत के पायलट को नुकसान नहीं पहुंचा सकता…पहले आपको इस कन्वेंशन कि ये कुछ बातें जानना जरूरी है ..

  इस के तहत घायल सैनिक की उचित देखरेख की जाती है.

– उन्हें खाना पीना और जरूरत की सभी चीजें दी जाती है.

– इस संधि के मुताबिक किसी भी युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं किया जा सकता.

– किसी देश का सैनिक जैसे ही पकड़ा जाता है उस पर ये संधि लागू होती है… (फिर चाहे वह स्‍त्री हो या पुरुष)

-संधि के मुताबिक युद्धबंदी को डराया-धमकाया नहीं जा सकता. .. ना उसकी जाति, धर्म, जन्‍म आदि बातों के बारे में नहीं पूछा जाता…

ऐसा ही करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के फाइटर पायलट नचिकेता को बंदी बना लिया था.. और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार की कोशिशों के बाद 8 दिन के बाद उनकी रिहाई हो गयी  थी…तो अपनी सेना और सरकार पर भरोसा रखिये .. वो हमारे जवान को सही सलामत वापस लायेंगे.

लेकिन एक तरफ़ ऐसे बहुत लोग हैं जो इस स्थिति में एक बेहतर रुख़ लेकर, पॉजिटिव सोच के साथ यह कह रहे हैं कि हमें अपनी सेना के साथ, अपने देश के साथ खड़े रहने की ज़रूरत है.. और दूसरी तरफ एक गिरोह है, जिसके होने से हमें लगता है कि हमें पाकिस्तान के F-16 की ज़रूरत नहीं है..उससे ज़्यादा घाव तो यही लोग कर जाते हैं…

यहाँ राजदीप सरदेसाई ने कहा कि चैनल कह रहे थे कि सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान हवाई हमलों में 300 आतंकवादी मारे गए हैं… जबकि पाकिस्तानी चैनल दावा कर रहे थे.. कि पाकिस्तान में कोई हताहत नहीं हुआ है. यह भी कहा कि ये दोनों दावों के प्रमाण कहाँ हैं? यह सही है कि हताहतों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की गई है, लेकिन सरकार पर नहीं कम से कम सेना पर तो विश्वास रखना चाहिए .. इसके अलावा, जब राजदीप कहते हैं कि न तो दावों की पुष्टि की गई है और न ही सबूतों के सहारे बात रखी गई है..

पाकिस्तानी चैनलों पर बरखा दत्त की से नो टू वॉर की दलीलें चलाई जा रही हैं.. पाकिस्तानी पत्रकार भारतीय चैनलों पर आकर राजदीप सरदेसाई के विचारों का हवाला देते हैं..

आत्मघाती हमले, बम विस्फोट, पाकिस्तान में भारत विरोधी भाषणों का खुलेआम प्रचार-प्रसार, भारत के सार्वजनिक स्थलों पर हमले, घुसपैठ, सीमा पर सीजफायर का उल्लंघन, भारतीय मुस्लिम युवकों को बहकना, अलगाववाद की बात, कश्मीर की कथित आज़ादी के लिए ख़ूनी अभियान, भारतीय जवानों के ऊपर हमले पर हमले- यह सब क्या है? कौन कर रहा है? इसके मास्टरमाइंड कहाँ बैठे हैं? ये बातें लगभग सभी को पता है लेकिन ये मानते है युद्ध तो भारत भड़का रहा है न!

यह ठीक वैसा ही है जैसा 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद हुआ था…जब कुछ पत्रकारों ने सर्जिकल स्ट्राइक पर संदेह जाहिर किया था…ये वो ग्रुप है ..जिसे भारतीय मीडिया का विशेष ग्रुप कहा जाता है..जो सरकार को घेरने के मौक़े तलाशता रहता है.. क्यों की इनके पास शब्दों की कमी कभी होती नहीं, तो ये उस स्थिति में हमेशा रहते हैं जब मनगढ़ंत बात घुमाकर देश की सरकारों के मजबूत क़दमों के खिलाफ लोगो को लाया जा सके.. यह सही है कि वॉर समस्या का हल नहीं है लेकिन आतंकियों का सफाया करना सेना और सरकार का काम है, यह कोई वॉर नहीं है। वॉरवो है जिसे आतंकियों द्वारा छेड़ा गया है, भारत के ख़िलाफ़…वॉर वो है जो पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को बचाव और समर्थन देकर शुरू किया गया है…

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