सुनवाई के बाद कोर्ट ने चिदंबरम को सुनाया ये फैसला

2317

कांग्रेस के नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम कानूनी दांव पेंच में फंसते जा रहे है. कुछ दिन पहले तक तो वो सीबीआई से पीछा छुड़ाने के लिए अलग अलग तरह के जुगाड़ खोज रहे थे, लेकिन अब खुद ही सीबीआई की गिरफ्त में रहने की इच्छा जता रहे है. आखिर पी चिदंबरम सीबीआई की गिरफ्त में क्यों रहना चाहते है. आइये हम आपको समझाते है कि पूरा मामला क्या है.

पी चिदंबरम पर आईएनएक्स मीडिया को फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रोमोशन बोर्ड से गैरकानूनी रूप से मंजूरी दिलाने के लिए 305 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है. जिसके बाद पी चिदंबरम को 21 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था और वह शुक्रवार तक सीबीआई की हिरासत में हैं. दरअसल, शुक्रवार को उनकी सीबीआई की कस्टडी खत्म हो रही थी और उन्हें निचली अदालत में पेश किया गया. सुनवाई के बाद कोर्ट ने चिदंबरम को उनकी कस्टडी बढ़ा दी है और 2 सितम्बर तक सीबीआई हिरासत में भेज दिया है. दरअसल सीबीआई अगर रिमांड आगे न मांगती तो न्यायिक हिरासत में चिदंबरम को तिहाड़ जेल भेजा भी जा सकता था. इससे बचने के लिए ही चिदंबरम ने खुद सीबीआई रिमांड बढ़ाने की पेशकश की थी.

अब आपको बताते है कि आखिर पूरा मामला था क्या. ये मामला 2007 का है, जब पी चिदंबरम वित्त मंत्री थे. आरोप है कि पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ने उनकी मदद से आईएनएक्स मीडिया को Foreign investment promotion board से Foreign investment की मंजूरी दिलाई थी. आईएनएक्स मीडिया को लगभग 305 करोड़ रुपए का Foreign investment हासिल हुआ था. INX मीडिया मामले में सीबीआई ने मई 15, 2017 को FIR दर्ज की थी. जबकि ईडी ने 2018 में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था. इस मामले में अहम मोड़ तब आया, जब इंद्राणी मुखर्जी 4 जुलाई को सरकारी गवाह बन गईं और इसी साल उनका स्टेटमेंट भी रिकॉर्ड किया गया. सीबीआई के मुताबिक मुखर्जी ने गवाही दी कि उसने कार्ति चिदंबरम को 10 लाख रुपये दिए थे. अब आप सोच रहे होंगे कि इन्द्राणी मुखर्जी कोन है. तो ये वो ही महिला है जो अपनी बेटी को मारने के जुर्म में जेल की हवा खा रही है और ये आईएनएक्स मीडिया की प्रमोटर भी है.

आपको को बता दे कि कार्ति चिदंबरम ने ही इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी को पी चिदंबरम से मिलवाया था. जिसके बदले में कार्ति चिदंबरम ने घूस के तौर पर करोड़ो रुपए लिए थे. लेकिन ऐसे मामलों में साफ़ निर्देश है कि Foreign investment के लिए कैबिनेट की Economic Affairs Advisory Committee से इजाज़त लेना जरुरी होता है. मतलब एक तय अमाउंट से ज्यादा कोई बाहरी कंपनी किसी भातीय कंपनी में निवेश करती है तो उन्हें Economic Affairs Advisory Committee से परमिशन लेनी पड़ती है.

15 मई 2017 को, ED ने कार्ति चिदंबरम, आईएनएक्स मीडिया और इसके प्रमोटर पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था. इसके बाद जून 2017 में, केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले Foreigner Regional Registration Officer और the Bureau of Immigration ने कार्ति चिदंबरम के खिलाफ एक लुक आउट सर्कुलर भी जारी किया था. मतलब CBI को इस केस में कार्ति चिदंबरम का भी कुछ न कुछ रोल होने शक हुआ और इसी के लिए उन्होंने लुक आउट सर्कुलर जारी किया. फरवरी 2018 में कार्ति चिदंबरम को चेन्नई हवाई अड्डे पर सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किया गया और उन्हें दिल्ली लाया गया था. लेकिन उन्हें 23 दिन जेल में बिताने के बाद जमानत भी मिली गयी थी. फिर 20 AUGUST को CBI और ED ने पी चिदंबरम को अपने सामने पेश होने का नोटिस जारी किया लेकिन तब वो पता नही कहा गायब हो गए. फिर वो लगभग 24 घंटे बाद कांग्रेस पार्टी मुख्यालय में दिखाई दिए और प्रेस को एक बयान भी दिया. उन्होंने बयान देते हुए कहा कि आईएनएक्स मीडिया मामले में मेने कोई अपराध नहीं किया है.सीबीआई ने चिदंबरम को अगले दिन उनके घर पर गिरफ्तार कर लिया. उनके घर के मैन दरवाज़े पर घुसने से मना किए जाने के बाद, कुछ सीबीआई अधिकारियो ने पीछे के गेट से धीरे से उनके घर में प्रवेश किया. उसके बाद उन्हें घर में घुसने दिया गया और फिर पी चिदंबरम की गिरफ्तारी की गई.हालंकि इस केस में जब इन्द्राणी मुखेर्जी से पी चिदंबरम की गिरफ्तारी के बारे में पूछा गया तो वो बेहद खुश थी.