अपने हौसले और जज्बे के दम पर इस युवा ने खड़ी कर दी ओयों कम्पनी

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आपने कई बार देखा होगा कि लोग पढाई के हिसाब से ही व्यक्ति का कद तय करते है. जो पढाई में बढ़िया होता है उसे होशियार यानी इंटेलीजेन्ट समझ लिया जाता है और जो बंदा पढाई में कमजोर होता है  या फिर उसका पढाई में मन नही लगता तो उसे बुद्धू या फिर देशी भाषा मे कहे तो ठप्प माना जाता है।  

भले ही पढ़ाकू लोग अपनी पढ़ाई के बलबूते लोगो की तारीफे बटोरते हो लेकिन इतिहास गवाह रहा है कि किताबी कीड़ा बनने के बजाय प्रेक्टिकल करने में यकीन रखने वाले लोग हमेशा इतिहास से ही रचते आए है।  हम आपको एक ऐसे ही युवा से मिलाने जा रहे है जिसका पढाई  में मन नही लगा जिसके चलते उसने पढाई छोड़ी और अपने बिजनेस पर फोकस करके सफलता के झंडे गाढ़ दिए।
जी हाँ हम बात कर रहे है oyo कंपनी के फाउंडर 24 साल के युवा रितेश अग्रवाल की।


 फिलहाल 20 आईआईएम और 200 आईआईटी की टीम हेड करने वाले रितेश 1993 को कटक में पैदा हुए और वही के सेक्रेड हार्ट स्कूल से उन्होंने  स्कूली पढ़ाई की 12वी क्लास के बाद दिल्ली के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस एंड फाइनेंस में एडमिशन ले लिया लेकिन उनके दिमाग मे शायद कुछ और ही था,अपने बिजनेस आइडिया को जमीन पर उतारने के लिए उन्होंने पढाई को बीच मे ही छोड़ दिया। रितेश बिल गेट्स,मार्क जुकरबर्ग,स्टीव जॉब्स जैसे लोगो से बहुत इंस्पायर थे और हमेशा इनकी ही तरह कुछ बड़ा करने की चाह इनके दिलो दिमाग मे हमेशा घूमती रहती थी।

रितेश को घूमने का बहुत शौक था और ये जहां जाते तो होटल के लिए काफी दिक्कत सहनी पडती।  होटल या तो महंगे होते या उनमें सुविधाओ की कमी होती,बस तभी से रितेश ने प्लान किया की वो ऐसी कंपनी लाएंगे जो लोगो को सस्ते और अच्छे होटल मुहैया करा सके। इसी प्लान पर काम करते हुए इन्होंने 2012 में औरेवेल स्टे प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कंपनी खोल दी,इस कंपनी का काम होटल्स की ऑनलाइन रिकॉर्ड रखना था, कम्पनी की तरफ से होटल्स के रेट को लोगो के बजट में करके उन्हें कम कीमत पर रूम उपलब्ध करवाए जाते थे ।

अब इतना बड़ा बिजनेस शुरू तो हो गया था लेकिन दिक्कत पैसे की थी क्योकि रितेश एक मिडल क्लास फैमिली से आते थे। ख़ैर उनकी दिक्कत जल्दी ही शार्टआउट हो गयी क्योकि वेंचर नर्सरी ने उन्हें 30 लाख रुपए का फंड दिया। इसके बाद उन्होंने अपना प्लान थैल फाउंडेशन के सामने रखा और पूरी दुनिया मे 10वे नंबर पर रहा जिसके चलते उन्हें लगभग 65 लाख की फैलोशिप मिलने लगी। उन्होने इस पैसे को अपने बिजनेस में लगाना शुरू कर दिया लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब घाटे के चलते उन्हें अपनी कम्पनी बन्द करनी पड़ी।

इतना बड़ा लॉस झेलने के बाद रितेश टूट से गए लेकिन फिर भी उन्होंने हिम्मत नही हारी और उन्होंने 2013 मे नए नाम और मकसद के साथ कंपनी को शुरू कर दिया। अब ओरेवल का नया नाम ओयो रखा गया। काम करने का अंदाज़ भी पिछली बार के मुकाबले थोड़ा सा अलग था। रितेश को समझ आ गया था कि भारत मे कस्टमर को सस्ते दामो में बेहतर सुविधा चहिए,उन्होंने इसके लिए अपने काम करने के पैटर्न को बदला और नतीजा ये हुआ कि किफायती दामो पर बेहतरीन सेवा देने वाली oyo कम्पनी थोड़े ही समय मे पूरे भारत में फेमस हो गई। 2014 आते आते oyo में लाइट स्पीड और डीएसजी कंज्यूमर पार्टनर जैसी बड़ी कंपनियों ने भी 4 करोड़ का निवेश किया और 2016 में जापान की कंपनी सॉफ्टबैंक ने भी रितेश के बिजनेस प्लान पर इन्वेस्ट कर दिया। ये सब नई कंपनी के लिए बहुत बड़ी बात होती है।

आज 2019 तक कंपनी 230 शहरों में 1000000 होटेल रूम्स का प्रबंधन करती है और इसकाकुल टर्नओवर 4 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। इस पूरी सफलता के पीछे अगर कोई है तो वो है युवा सोच,जिसने रितेश को कभी परेशान नही होने दिया और हमेशा उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रही। .