मिशन वुहान : चीन में फंसे भारतीयों को एयरलिफ्ट करने की पूरी कहानी जान कर आप भी करेंगे सलाम

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कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित चीन के वुहान शहर में भारत के 643 नागरिक फंसे थे. इनमे से अधिकतर छात्र थे. जब वायरस के बढ़ते कहर के कारण सारा वुहान शहर ठप हो गया, सड़कों पर सन्नाटा पसर गया तो दुनिया भर के देशों ने अपने अपने नागरिकों को वहां से निकालना शुरू कर दिया. भारतीय छात्र इस उम्मीद में थे कि उनकी सरकार भी उन्हें निकल लेगी. उनकी उम्मीदें जायज भी थी क्योंकि सूडान से लेकर यमन तक में फंसे भारतीयों के सरकार ने रेस्क्यू किया था.

28 जनवरी 2020 की शाम एयर इंडिया के सीएमडी अश्विनी लोहानी की फोन की घंटी घनघना उठती है. ये फोन सरकार की तरफ से था. अगले कुछ घंटों में अश्विनी लोहानी सरकार के प्रतिनिधियों के साथ एक इमरजेंसी मीटिंग में थे. उस मीटिंग में अश्विनी लोहानी को एक मिशन सौंपा जाता है. वो मिशन था उस शहर में जा कर कुछ लोगों को रेस्क्यू करना जिसे छोड़ कर हर कोई भाग रहा था. अश्विनी लोहानी को वुहान में फंसे भारतीयों को एयरलिफ्ट कर के वापस लाने का मिशन सौंपा जाता है. उस मीटिंग में उनसे पूछा जाता है कि क्या ये मिशन हो पायेगा? क्योंकि वायरस से ग्रसित वुहान शहर में जाना किसी सु’साइड मिशन से कम नहीं था.

एयर इंडिया के फ्लाइट से वापस आते भारतीय यात्री

अश्विनी लोहानी 2 घंटे का वक़्त लेते हैं. इन दो घंटों में वो अपने तमाम स्टाफ से बात करते हैं और फिर वो वापस सरकार को कॉल कर के कहते हैं कि सब कुछ तैयार है, रात के 8 बजे तक हम वुहान के लिए निकल सकते हैं. आपका सिग्नल मिलते ही प्लेन दिल्ली से टेकऑफ़ कर जायेगी वुहान के लिए.

उसके बाद शुरू होता है मिशन वुहान. 31 जनवरी से 2 फ़रवरी के बीच एयर इंडिया के 2 जम्बो प्लेन वुहान जाते हैं. ये मिशन था 3 दिनों का. इस ऑपरेशन को सफल बनाने का जिम्मा था 78 स्टाफ की स्पेशल टीम के कंधो पर. इन 78 स्टाफ में 68 एयर इंडिया से और 10 आरएमएल, सफदरजंग हॉस्पिटल के डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ थे. साथ में थी कुछ दवाइयां, मास्क, इंजीनियरिंग टीम और प्लेन के टायर समेत कुछ जरूरी औज़ार. ताकि अगर विमान में कोई खराबी आये तो उसे तुरंत ठीक किया जा सके. सभी करू मेंबर और स्टाफ को मास्क और जरूरी कपडे दिए गए ताकि कोई वायरस के संपर्क में न आ सके.

विमान के वुहान में लैंड करने से पहले ही चीन में भारतीय दूतावास ने भी अपनी पूरी कर ली थी. बसों का इंतजाम कर लिया था ताकि उनमे बैठा कर सभी भारतीयों को एयरपोर्ट लाया जा सके. छात्रों से बात कर उन्हें तैयार रहने के लिए कहा गया था ताकि बस के पहुँचते ही वो तुरंत उसमे बैठ सके और एयरपोर्ट पहुँच सके. उन्हें ये भी बताया गया था कि एक विमान में सभी नहीं आ पायेंगे इसलिए दो विमान भेजे गए हैं. कोई घबराये ना.

विमान जब वुहान एयरपोर्ट पर लैंड कतर रहा था तो पुरे शहर में सन्नाटा पसरा था. रनवे पर खड़े विमानों के इंजन सील थे. उन्हें रिसीव करने जो भी चीनी अधिकारी आये थे वो सभी मास्क और जरूरी कपड़ों से ढके हुए थे. कोई ज्यादा बात नहीं कर रहा था.

पहले चीनी सरकार की ओर से यात्रियों की जांच की गई थी, बाद में दिल्ली से गए डॉक्टर तमाम यात्रियों की जांच कर रहे थे कि किसी में कैरोना के कोई लक्षण तो नहीं है. जिनमे कोई लक्षण दिखे उसे चीनी अधिकारियों ने वहीँ रोक लिया ताकि ये संक्रमण दुसरे देशों में न पहुंचे. तीन स्तरीय जांच के बाद सभी यात्रियों ने प्लेन में बैठना शुरू किया. सबको ज्यादा बात करने से मनाही थी लेकिन सबके चेहरे पर वतन वापसी की ख़ुशी साफ़ झलक रही थी.

वापसी के लिए दिल्ली के IGI एअरपोर्ट पर भी विशेष तैयारी की गई थी. चीन से टी-3 उतरने वाले तमाम यात्रियों का इमिग्रेशन और कस्टम क्लियरेंस के लिए यहां टी-3 पर अलग से काउंटर लगाए गए थे. यह पैसेंजर एरिया से एकदम अलग थे. उन्हें उतार कर सीधे मानेसर के स्पेशल कैम्प में ले जाया गया और इस तरह से तीन दिनों का ऑपरेशन वुहान सफ़क हुआ.