कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, CAA को लेकर विपक्षी एकता में पड़ गई फूट

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नारिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर देश में हिंसा और शिक्षा के संस्थान में भी हिंसा की जा रही है. जिसकी वजह से पूरा देश हिंसा से ग्रस्त है. आये दिन कहीं न कहीं देश के हर जिले में आगजनि,तोड़ फोड़ की और सरकारी संपत्ति को जलाया और भी बहुत नुकसान हुआ है. जेएनयू हिंसा के मामले पर सत्ताधारी दल बीजेपी पर दबाव बनाने के लिए विपक्षी एकता का दम दिखाने की कोशिश में कांग्रेस पूरी तरह से कामयाब होती नहीं दिख रही है. जिस विपक्ष का दम भरती थी कांग्रेस आज वो फुस्स होते दिख रही है. कांग्रेस अध्यक्ष की पहल पर आज दिल्ली में विपक्षी दलों की मीटिंग होने जा रही है, लेकिन एक-एक कर कई विपक्षी पार्टियां इससे दूरी बनाने लगीं है. इसके साथ ही, निगाहें नए साथी शिवसेना की ओर हैं जिसने बीजेपी की पुरानी दोस्ती तोड़ कांग्रेस और एनसीपी के साथ महाराष्ट्र में सरकार बनाई है.

आज देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश जहाँ लोकसभा की 80 सीटों के साथ सबसे बड़ा प्रदेश है. वहां की प्रभावी राजनीतिक दल बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस द्वारा बुलाई CAA के खिलाफ बैठक में हिस्सा नहीं लेने का ऐलान किया है. इसको देखते हुए कुछ देर बाद दिल्ली की सत्ताधारी दल आम आदमी पार्टी (आप) ने भी बैठक से दूरी बनाने का फैसला कर लिया है.  उधर, बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने पहले ही न केवल मीटिंग से किनारा कर लिया था, बल्कि कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों पर सीएए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा फैलाने का आरोप लगाकर गहरी नाराजगी भी जताई. ये सारा घटनाक्रम को देखते हुए यही लगता है कि क्या सभी विपक्षी पार्टियों को साधने की कांग्रेस के मंसूबे पर पानी फिरते हुए दिख रहा है, क्योकि सभी विपक्षी पार्टी को साथ लेकर चलने का दम भरने वाली कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. अगर बात करें वेस्ट बंगाल की मुख्यमंत्री जो खुद को मोदी सरकार के खिलाफ एक मुखर आवाज के रूप में स्थापित कर चुकीं ममता बनर्जी के मीटिंग में हिस्सा नहीं लेने के ऐलान के बाद से ही इस मीटिंग की प्रासंगिकता पर सवाल उठने लगे थे.

हमेशा से मोदी के खिलाफ मुखर आवाज उठाने वाली ममता ने CAA के खिलाफ मीटिंग को लेकर साफ़ मन कर दिया है कि वो इसका हिस्सा नही होंगी. इस के बाद मायावती ने भी बैठक से पहले कांग्रेस पर ही जमकर निशाना साधा अपने ट्वीट में मायावती ने लिखा, ‘जैसा कि विदित है कि राजस्थान में कांग्रेसी सरकार को बीएसपी का बाहर से समर्थन दिए जाने पर भी, इन्होंने दूसरी बार वहां बीएसपी के विधायकों को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल करा लिया है जो यह पूर्णतयाः विश्वासघाती है। ऐसे में कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष की बुलाई गई बैठक में बीएसपी का शामिल होना, यह राजस्थान में पार्टी के लोगों का मनोबल गिराने वाला होगा। इसलिए बीएसपी इनकी इस बैठक में शामिल नहीं होगी”.

आगे अपने दुसरे  ट्वीट में मायावती ने कहा, ‘वैसे भी बीएसपी CAA/NRC आदि के विरोध में है. जेएनयू और अन्य शिक्षण संस्थानों में भी छात्रों का राजनीतिकरण करना अति-दुर्भाग्यपूर्ण है. केन्द्र सरकार से फिर अपील है कि वह इस विभाजनकारी और असंवैधानिक कानून को वापस ले.

कांग्रेस ने दोपहर दो बजे संसद के उपभवन में बैठक करेंगे. कांग्रेस ने समान विचारधारा की सभी पार्टियों को एक साझा मंच पर आने का आमंत्रण भेजा है. कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि सभी विपक्षी राजनीतिक दल इस बैठक में शामिल होंगे समाजवादी पार्टी (एसपी) और कांग्रेस के नए गठबंधन साझेदार शिवसेना बैठक में शामिल हो सकते हैं