प्रियंका गाँधी की बात मान कर योगी आदित्यनाथ ने एक तीर से साध दिए तीन निशाने

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प्रवासी मजदूरों को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी घमासान मचा है. योगी आदित्यनाथ और प्रियंका गाँधी आमने सामने हैं. मामला है प्रवासी मजदूरों के लिए 1000 बसें उपलब्ध करवाने का. प्रियंका गाँधी ने यूपी सरकार को 1000 बसें उपलब्ध करवाने की पेशकश की तो यूपी सरकार ने भी तुरंत ही प्रियंका की पेशकश को मान कर सबको चौंका दिया. लेकिन जिन लोगों ने योगी आदित्यनाथ की राजनीति पर बारीकी से नज़र रखी है वो जानते हैं कि योगी आदित्यनाथ ने प्रियंका की पेशकश को मान कर बहुत ही तगड़ा दांव चला है.

जब लोकसभा चुनाव में औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल हो जाने के बाद भी कांग्रेस कोई कमाल नहीं दिखा सकी और उत्तर प्रदेश में अमेठी जैसा गढ़ गंवा कर सिर्फ 1 सीट पर सिमट गई तो प्रियंका गाँधी ने खुद को उत्तर प्रदेश में ही सिमित कर लिया और कांग्रेस को पुनर्जीवित करने की कोशिशें करने लगीं. लेकिन राजनीतिक रूप से उत्तर प्रदेश बहुत ही दुष्कर राज्य है. वहां चार प्रमुख पार्टियाँ है. जिनमे से तीन का अपना पारंपरिक वोटबैंक है जबकि कांग्रेस की झोली खाली है. ऐसे में प्रियंका गाँधी ने लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों का मुद्दा उठा कर उन्हें अपने पाले में करने की कोशिश की.

प्रियंका की पेशकश मान कर योगी आदित्यनाथ ने एक तीर से तीन निशाने साधे हैं. पहला उन्होंने इस पूरे मुद्दे पर सपा और बसपा को किनारे लगा दिया. सपा और बसपा तो इस पूरे दौरान कहीं है ही नहीं. योगी आदित्यनाथ ने माया और अखिलेश को किनारे लगा कर प्रियंका को अपने सामने खड़ा होने का मौका दे दिया. ये ठीक उसी तरह है जैसे मोदी के सामने राहुल गाँधी को खड़ा कर भाजपा आधा मुकाबला पहले ही जीत जाती है. आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जिम्मेदारी प्रियंका गाँधी के कन्धों पर होने वाली है और ऐसे में उनको अपने सामने खड़ा कर योगी आदित्यनाथ आधा मुकाबला पहले ही जीतना चाहते हैं.भाई राहुल की तरह बहन प्रियंका बभी परिवार के बलबूते राजनीति में आ गई और पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी तो पा गेन लेकिन हैं बिलकुल ही अनुभवहीन. और योगी इसी का फायदा उठाना चाहते हैं.