विपक्ष वैक्सीन को लेकर टेंशन न ले, वैक्सीन बीमारों के लिए है मरे हुओं के लिए नहीं, विपक्ष तो 6 सालों से मरा हुआ है

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पूरी दुनिया के वैज्ञानिक, डॉक्टर और सरकारें कोशिश कर रही है कोरोना का वैक्सीन जल्द से जल्द लाने के लिए ताकि दुनिया को इस वायरस से निजात मिल सके. लेकिन भारत संभवतः दुनिया का एकलौता ऐसा देश है जहाँ वैक्सीन को लेकर भी राजनीति की जा रही है और वैक्सीन को किसी पार्टी विशेष का बताया जा रहा है. इसकी शुरुआत समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने की. उन्होंने वैक्सीन को भाजपा का वैक्सीन बता दिया. उनकी पार्टी के एक MLC ने तो वैक्सीन को केंद्र सरकार की साजिश करार दे दिया. उनका तर्क था कि वैक्सीन के जरिये केंद्र सरकार जनसँख्या कम करने और नपुंसक बनाने की साजिश कर सकती है. विरोध के स्वर उठाने वालों में कांग्रेस भी शामिल हो गई. वैसे भी कांग्रेस का मुख्य काम अब सिर्फ विरोध करना ही रह गया है और ये कर के वो जनता की नज़रों से कितनी उतर चुकी है ये बताने की जरूरत नहीं.

विपक्षी पार्टियों का विरोध इमानदार इसलिए प्रतीत नहीं होता क्योंकि उनके पास विरोध का कोई ठोस तर्क नहीं है. वो विरोध बस इसलिए कर रहे हैं क्योंकि ये केंद्र में मोदी सरकार है और उन्होंने इसे अपना जन्मसिद्ध अधिकार मान लिया है कि मोदी सरकार से जुड़े हर फैसले का विरोध करना है. इस विरोध में तर्क कम और विपक्ष का मानसिक दिवालियापन ज्यादा झलकता है. बजाये इसके कि देश के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाया जाए, सिर्फ विरोध के लिए विरोध किया जा रहा है.

अब कांग्रेस नेता राशिद अल्वी का बयान ही सुन लीजिये. अल्वी साहब का कहना है कि इस वैक्सीन का इस्तेमाल विपक्ष के खिलाफ किया जा सकता है. अब राशिद अल्वी को कौन समझाए कि वैक्सीन बीमारों के लिए है, मरे हुओं के लिए नहीं और सत्ता से पिछले 6 सालों से बाहर रह कर कांग्रेस तो यूँ ही मर चुकी है. विपक्ष को एक डर ये भी है कि वैक्सीन का फायदा भाजपा को चुनावों में मिल सकता है. जब वैक्सीन नहीं थी तो हार का ठीकरा EVM पर फोड़ा जाता था, और अब वैक्सीन आ जायेगी तो हार का ठीकरा वैक्सीन पर फोड़ा जाएगा. इसकी भूमिका पहले से ही बाँधी जा रही है. विपक्ष को अपनी कमियां नहीं देखनी बस दूसरों पर ठीकरा फोड़ना है. देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को समझना चाहिए कि विरोध रचनात्मक होता है. ऐसा नहीं कि हर बात का विरोध कर दें बिना उसकी गहराई में गए ही. अपनी इसी हरकतों की वजह से कांग्रेस आज जनता के दिलों से उतर चुकी है और भविष्य में भी उसके हालात सुधरने के आसार नज़र नहीं आते.