ऑपरेशन विजय के 20 साल पूरे, सेना ने दिखाया कैसे किये थे दुश्मन के दांत खट्टे!

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कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने ऊँची पहाड़ियों से भारतीय सेना पर लगातार हमला कर रहे थे. पाकिस्तानी सेना उंचाई पर थी और भारतीय सेना नीचे.. ऐसे में पाकिस्तानी सेना को हमला करना आसान हो गया था. भारतीय थल सेना के सामने मुसीबत थी. 5,062 मीटर की ऊंचाई पर स्थित टाइगर हिल पर जमे पाकिस्तानी भारत की सेना पर ताबड़तोड़ वार कर रहे थे। इस बीच भारत ने वायुसेना को उतारा, जिसने पाकिस्तानियों की कमर तोड़ दी और आखिर में 4-5 जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर भारत ने कब्जा जमा लिया। टाइगर हिल पर भारत की बढ़त 24 जून यानी आज ही के दिन शुरू हुई थी..इस ऑपरेशन को ऑपरेशन विजय नाम दिया गया था.

ऑपरेशन विजय के 20 साल पूरा होने पर सेना ने 24 जून सोमवार को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में टाइगर हिल पर पाकिस्तानी घुसपैठियों पर हुए अटैक के सीन को रीक्रिएट किया और शहीद जवानों को याद किया गया. यही वह मौका था, जब भारत ने ऑपरेशन सफेद सागर के जरिए पाकिस्तान को उसके दुस्साहस का सबसे बड़ा सबक सिखाया था.. इस सीन के रीक्रिएशन के मौके पर वायुसेना चीफ बीएस धनोआ भी मौजूद थे। दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई पर हुई इस जंग में भारतीय वायुसेना ने अपने शौर्य का प्रदर्शन किया था। 25-27 जुलाई तक भारतीय वायु सेना पूरे देश भर में कारगिल युद्ध में भारत की जीत के 20 साल पूरे होने पर जश्न मनाएगी.
युद्ध से पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने पकिस्तान के साथ शान्ति के लिये पहल की थी. इसी सिलसिले में लाहौर बस की शुरुआत की गई थी लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तानी सेना बाज नहीं आई और उन्होंने कारगिल में घुसपैठ कर दी.. टाइगर हिल पर भारत की बढ़त 24 जून को शुरू हुई थी, जब वायुसेना ने मोर्चा संभाला और दो मिराज 2000 एयरक्राफ्ट्स को भेजा। इन लड़ाकू विमानों ने टाइगर हिल पर जमे बैठे पाक सैनिकों पर लेजर गाइडेड बमों के जरिए हमला किया।

यह पहला मौका था, भारतीय वायुसेना ने लेजर गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया..पाकिस्तान ने इस तरह के हमले के बारे में कल्पना भी नहीं की थी और इसी हमले से हमारे दुश्मन को बड़ा नुकसान हुआ. वायुसेना के इस अभियान को थल सेना के जवान बेहद करीब से देख रहे थे जो उनका मनोबल बढाने वाला था.. इस पूरे मिशन की निगरानी खुद तत्कालीन एयरचीफ मार्शल अनिल यशवंत टिपनिस कर रहे थे, जो एक मिराज की बैकसीट पर बैठे थे… इसके बाद फिर लगातार कई दिन और रात तक हमले जारी रहे। आखिर में भारतीय सेना ने 4 जुलाई को 11 घंटे की जंग के बाद टाइगर हिल पर कब्जा जमा लिया।


चूँकि आज ही के दिन यानी 24 जून से भारतीय सेना को इस युद्ध में बढ़त हासिल हुई थी. तो इसके 20 साल पूरे होने पर इसका जश्न मनाया गया और इस युद्ध पाकिस्तानी सेना द्वारा हमले का शिकार हुए Mi-17 में अपने जान की आहुति देने वाले जवानों को याद भी किया गया.
यहाँ आपको यह भी बता दें कि कारगिल युद्ध के समय ऑपरेशन ‘सफेद सागर’ में कारगिल की पहाड़ियों में छिपे दुश्मन को मारने की जिम्मेदारी ग्वालियर के महाराजपुरा एयरबेस पर तैनात मिराज विमानों के स्क्वाड्रन को सौंपी गई थी। ये एयरफोर्स स्टेशन 1942 में बना और इस खास एयरबेस ने भारत के कई युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. 1965 और 71 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में विमानों ने यहाँ से ही उड़ान भरी थी. साथ ही महाराजपुरा का ये ऐसा एयरबेस है जहां से फाइटर प्लेन में हवा में ईंधन भरा जा सकता है.. यानी कि अगर युद्ध के दौरान किसी जेट को इंधन को जरूरत पड़ती है तो इस एयरबेस पर तुरंत दूसरा जेट प्लेन हवा में जाकर उसे रिफ्यूल कर सकता है।


खैर ऑपरेशन विजय के 20 साल पूरा होने पर आप सभी को बधाई जय हिन्द.
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