हम शंख बजाएं, रामायण देखें तो कम्युनल और वो डॉक्टरों पर प’त्थर फेंके तो सेक्युलरिज्म, उन्हें कुछ मत कहो वरना…

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देश में आये दिन डॉक्टरों पर ह’मले की खबरें आ रही है. ये ह’मला मुस्लिम समुदाय द्वारा किया जा रहा है. मुस्लिम बहुल इलाकों में डॉक्टरों के पहुँचने पर प’त्थरबा’जी की जाती है. लेकिन उनके खिलाफ आप सोशल मीडिया पर कुछ नहीं कह सकते क्योंकि लिबरल गैंग आपको कम्युनल घोषित कर के आपका ट्विटर अकाउंट सस्पेंड करवा देगा. जैसा उसने कंगना रानौत की बहन रंगोली चंदेल का ट्विटर अकाउंट सस्पेंड करवा दिया. क्यों? क्योंकि मुसलमानों की गलतियों पर उंगली उठाना गुनाह है, इससे देश का सेक्युलरिज्म ख’तरे में आ जाता है. हम शंख बजाएं, दीये जलाएं, टीवी पर रामायण देखे तो हम कम्युनल हैं लेकिन मुस्लिम समुदाय के लोग डॉक्टरों पर ह’मले करें, नर्सों के साथ अभद्रता करें तो वो सेक्युलरिज्म है.

ज्यादा दिन नहीं हुए जब रामायण का दूरदर्शन पर दोबारा प्रसारण शुरू किया गया था. लिबरल गैंग को तुरंत मिर्ची लग गई. लिबरल गैंग के अनुसार रामायण दिखा कर देश में हिं’दुत्व फैलाया जा रहा है. महामहिम श्री श्री 108 ब्रह्माण्ड के सर्वश्रेष्ठ पत्रकार मैग्सेसे विजेता रवीश कुमार ने तो सवाल किया कि वो कौन लोग हैं जो रामायण देखन चाहते हैं? लेकिन रवीश कुमार ये सवाल नहीं उठाते कि वो कौन लोग हैं जो डॉक्टरों पर प’त्थर फेंकते हैं? क्योंकि रामायण का विरोध करना रवीश कुमार जैसे लिबरल गैंग के एजेंडे का हिस्सा है और प’त्थरबा’जों को कुछ कहना, उनपर सवाल उठाना उनके एजेंडे में फिट नहीं बैठता.

ये बात सही है कि कोरोना का कोई धर्म नहीं है लेकिन डॉक्टरों पर प’त्थर फेंकने वालों का तो धर्म है. हर जगह एक ही कौन के लोग पत्थर फेंक रहे हैं. लेकिन उनके खिलाफ आप कुछ नहीं कह सकते क्योंकि अगर कहा तो लिबरल गैंग आपको कम्युनल घोषित कर देगा, आप पर हिन्दू-मुस्लिम करने का आरोप लगा देगा, आप पर ज़’हर फैलाने का आरोप लगा देगा.

दीये के साथ पटाखे जलाओ तो सोनम कपूर जैसी लिबरल बिलबिला कर बिल से बाहर निकल आएगी, मत जलाओ पटाखे, कुत्तों को तकलीफ होती है. लेकिन डॉक्टरों पर प’त्थर बरसने से सोनम कपूर जैसे लिबरल को तकलीफ नहीं होती क्योंकि वो तो शांतिप्रिय लोगों द्वारा बरसाया गया है और वो पत्थर सोनम के कुत्तों को नहीं लगा. सोनम तब तक कुछ नहीं बोलती जब तक उनके कुत्तों को तकलीफ नहीं होती और सोनम के कुत्तों को तकलीफ सिर्फ पटाखे जलाने और शंख बजाने से होती है. सड़क पर उतरे मजदूरों की भीड़ से लेकर घर में पति -पत्नी के बीच के झगड़ों को रामायण से जोड़ने वाले लिबरल गैंग को डॉक्टरों पर बरसते प’त्थरों से कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन आप उन प’त्थरबा’जों की तरफ उंगली उठाओ तो उन्हें तकलीफ हो जायेगी.

CAA के खिलाफ मुसलमाओं को भड़का कर सड़क पर उतारने वाली स्वरा भास्कर तो गायब ही है. अगर ये कह दो कि कोरोना के मामले जमात मरकज के बाद तेजी से फैले तो वो तुरंत बिल से बाहर निकल पड़ेगी लेकिन डॉक्टरों पर प’त्थर बरसाने वालों के खिलाफ स्वरा भास्कर कुछ नहीं बोलेगी क्योंकि वो उनके एजेंडे को सूट नहीं करता. इन्ही पत्थरबाजों के खिलाफ कारवाई हो, उनकी संपत्ति जब्त करो तो लिबरल गैंग छाती पिटते हुए बिल से बाहर निकल आएगा कि मुसलमानों पर जुल्म हो रहा है.

जिनके अन्दर ज़हर भरा हुआ है, जो डॉक्टरों की जा’न लेने पर उतारूं है उनके खिलाफ कुछ मत बोलो क्योंकि देश का सेक्युलर फैब्रिक ख’तरे में आ जाएगा. कुछ मत बोलो सेक्युलरिज्म है.