बच्चन परिवार का ढोंग : कंगना के दफ्तर पर बुलडोज़र चला तो आँखें बंद कर ली, बॉलीवुड में ड्र’ग्स की बात चली तो तकलीफ हो गई

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आज जया बच्चन चर्चा में हैं. संसद में उन्होंने बिना नाम लिए कंगना पर तंज कसा की कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं. जया बच्चन को तकलीफ इस बात से थी कि ड्र’ग्स रैकेट को लेकर फिल्म इंडस्ट्री पर सवाल उठाये जा रहे हैं. जया बच्चन को तकलीफ है कि कुछ लोगों की वजह से पूरी इंडस्ट्री को बदनाम करने की साजिश चल रही है. लेकिन जया बच्चन को इस बात से तकलीफ नहीं है कि वो कौन लोग है जो फिल्म इंडस्ट्री को गंदा कर रहे हैं. वो कौन लोग हैं जो फिल्म इंडस्ट्री में ड्र’ग्स का जाल फैला रहे हैं.

जया बच्चन को इस बात से तकलीफ होगी भी क्यों? उन्हें तो अपना सेलेक्टिव विरोध का एजेंडा चलाना है. उन्हें तो उस शिवसेना की मुंबई में रहकर अपना परिवार चलाना है जिस शिवसेना के खिलाफ बोलने पर कंगना के दफ्तर पर बुलडोजर चला दिया गया. जया बच्चन को तकलीफ उस वक़्त भी नहीं हुई जब उन्ही की बिरादरी में से किसी का दफ्तर सिर्फ इसलिए गिरा दिया गया क्योंकि उसने सत्ता और सरकार के खिलाफ बोला था.

ड्र’ग्स केस में मुख्य आरोपी रिया के जेल जाने के बाद बेटी श्वेता बच्चन रिया के समर्थन में स्मैश द पेट्रीयार्की का अभियान चलाती है और माँ संसद में चिल्लाती है कि फिल्म इंडस्ट्री को बर्बाद करने की साजिश हो रही है. महानायक अमिताभ बच्चन की तो कहें ही क्या? वो बेचारे तो बस इस बात से परेशान रहते हैं कि आज उन्हें T-3649 करना है या T-3694.

फिल्म इंडस्ट्री में रहकर फिल्म इंडस्ट्री की गंदगी के खिलाफ आवाज उठाना जिस थाली में खाना उस थाली में छेद करने के बराबर हो गया. इस लॉजिक से तो राजनीति में रहकर किसी पार्टी या नेता पर आरोप लगाना भी जिस थाली में खाना उसी थाली में छेद करना हो गया. जया बच्चन चाहती हैं कि सब उनके परिवार की तरफ खामोशी ओढ़ लें. सब अमिताभ बच्चन की तरह खामोशी ओढ़ कर T-3649 और T-3694 में अंतर ढूँढने लगें. अरे अमिताभ बच्चन तो इतने ढोंगी और कायर हैं कि उनसे हिंदी दिवस की बधाई भी इमानदारी से नहीं दी गई.

जया बच्चन को किस बात का डर था? वो बॉलीवुड में ड्रग्स की बात को इमानदारी से स्वीकार कर सकती थीं, वो उनकी आलोचना कर सकती थीं जो ड्र’ग्स का रैकेट फैला कर फिल्म इंडस्ट्री को गंदा और बदनाम कर रहे हैं, वो ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें इंडस्ट्री से बाहर करने की बात भी कर सकती थीं ताकि उनका प्यारा फिल्म इंडस्ट्री गटर न बन पाए. लेकिन जया बच्चन तो भड़क गई. ये ढोंग नहीं तो और क्या है. जिस थाली में खाते हो उसी में छेद वाला डायलाग न सिर्फ फिल्मों में ही अच्छा लगता है, बुराई की बुराई करने के लिए भी हिम्मत चाहिए होती है. डायलागबाजी तो कोई भी कर लेता है.