कभी कांग्रेस कहती थी राम काल्पनिक है, अब कर रही है ऐसी बातें

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देश के सबसे बड़े विवादित मामले में आज फैसला आ गया. सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद में अपना फैसला सुनाते हुए विवादित स्थल को रामलला विराजमान को देने का आदेश दिया साथ ही सरकार को ये भी आदेश दिया कि मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक भूमि अयोध्या में ही दी जाए. ये फैसला भाजपा समेत कई हिंदूवादी पार्टियों के लिए मन मांगी मुराद है तो कांग्रेस जैसे तथाकथित सेक्युलर पार्टी ने भी फैसले का स्वागत करते हुए अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण की बात कही.

कांग्रेस के मुंह से अयोध्या में भव्य राम मंस्दिर निर्माण की बात सुनना ऐसा है जैसे गदहे के सर पर सिंग देखना. कभी कांग्रेस ने कहा था कि राम, रामायण और रामसेतु ये सब काल्पनिक चीजें हैं. इसलिए जब आज कांग्रेस कह रही है कि अयोध्या में भव्य मंदिर का निर्माण होना चाहिए तो आश्चर्य होना स्वाभाविक है.

साल 2007 का वक़्त था, केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार थी. उस वक़्त केंद्र सरकार एक महत्वकांक्षी परियोजना पर काम कर ररही थी जिसका नाम था सेतु समुद्रम परियोजना. इस परियोजना के अंतर्गत भारत के पूर्वी तट से पश्चिमी तट के बीच चलने वाले समुद्री जहाजों के लिए एक शार्ट कट बनाने के उद्देश्य से मन्नार की खाड़ी और पाक बे को अलग करने वाली पतली भूमि की पट्टी को काट कर पानी में जहाजों के आने जाने के मार्ग के निर्माण होना था.

मन्नार की खाड़ी और पाक बे को अलग करने वाली यही पतली भूमि की पट्टी को राम सेतु कहा जाता है. हिन्दू धर्म में मान्यता है कि राम सेतु  भगवान राम की सेना को लंका तक पहुंचाने के लिए वानर नल द्वारा बनाया गया था. जब इस परियोजना का विरोध हुआ तो तत्कालीन संस्कृति मंत्री अंबिका सोनी ने राज्यसभा (14 अगस्त, 2007) में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए झूठा दावा किया कि राम सेतु के संबंध में कोई पुरातात्विक अध्ययन नहीं किया गया है. यही नहीं सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार ने हलफनामा दिया कि भगवान राम थे ही नहीं और राम सेतु जैसी भी कोई चीज़ नहीं है, यह एक कोरी कल्पना है. उस समय कांग्रेस नेता कपिल सिब्ब्ल केंद्र सरकार की ओर से वकील थे.

इस हलफनामा के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार को तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था और उसपर हिन्दू विरोधी होने का तो लेबल चिपका वो अब तक जारी है. शायद इसलिए राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का जब फैसला आया तो कांग्रेस ने दिल खोल कर उसका स्वागत किया और भव्य राम मंदिर निर्माण की बात कही ताकि खुद के ऊपर चिपका हिन्दू विरोधी पार्टी के लेबल को हटा सके.